IceBoost v2.0 का कमाल: एआई ने सुलझाया ग्लेशियरों का रहस्य, जानें क्या है मॉडल
Manya Jain | Aug 09, 2026, 11:29 IST
ai model iceboost glacier ice mapping
इटली के रिसर्चर्स ने IceBoost v2.0 नाम का AI मॉडल बनाया है। इसने दुनिया के ग्लेशियरों की बर्फ का सबसे सटीक नक्शा तैयार किया है। यह डेटा 2100 तक के अनुमान का आधार बनेगा।
समझें क्या है पूरा मामला
यह उपलब्धि वेनिस की का' फोस्करी यूनिवर्सिटी और इटली की नेशनल रिसर्च काउंसिल के रिसर्चर्स ने मिलकर हासिल की है। रिसर्चर्स के मुताबिक एआई ने जो डेटा तैयार किया है, वह अब तक का सबसे भरोसेमंद डेटा माना जा रहा है।
AI ने यह काम कैसे किया
इस मॉडल ने जमीन की ढलान, बनावट, बर्फ की गति और तापमान जैसे 26 अलग-अलग मानकों को मिलाकर हर ग्लेशियर की मोटाई का अंदाजा लगाया। दावा किया जा रहा है कि यह मॉडल पुराने तरीकों की तुलना में 40 प्रतिशत से ज्यादा बेहतर नतीजे दे रहा है।
क्या निकलकर आई अहम जानकारी
पूर्वी ग्रीनलैंड के 'गीकी पठार' में भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यहां ग्लेशियर करीब 2 किलोमीटर तक मोटे हैं। AI मॉडल के मुताबिक यहां पहले के अनुमानों से करीब दोगुनी बर्फ मौजूद है।
इस खोज से क्या फायदा होगा
संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन संस्था IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) ने भी इस खोज को समर्थन दिया है। वैज्ञानिक अब साल 2100 तक ग्लेशियरों के भविष्य का अनुमान लगाने के लिए इसी AI डेटासेट को आधार के रूप में इस्तेमाल करेंगे। दुनियाभर में पीने के पानी का संकट बढ़ रहा है। ऐसे में यह मॉडल सूखाग्रस्त इलाकों में भविष्य में साफ पानी की उपलब्धता का अंदाजा लगाने में भी मदद करेगा।
नाजुक इलाकों पर भी नजर
इन इलाकों की सटीक जानकारी मिलने से आगे चलकर जलवायु परिवर्तन के असर को समझना आसान होगा। खासतौर पर हिमालय क्षेत्र से जुड़ी जानकारी भारत और पड़ोसी देशों के लिए भी अहम मानी जा रही है।
आम लोगों के लिए भी वेब ऐप
इस वेब ऐप पर कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी भी ग्लेशियर की बर्फ की स्थिति देख सकता है। यह पहल आम लोगों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को बेहतर समझने में मदद करेगी।
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