काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का ऐलान- बनेगी चतुरंगिणी सेना
News in Short
- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना का गठन करने का ऐलान।
- सेना का उद्देश्य गौ-रक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा है।
- सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सदस्य शामिल होंगे।
- सेना का कार्य 'टोको', 'रोको' और 'ठोको' के आधार पर होगा।
- चतुरंगिणी सेना 10 महीने में तैयार हो जाएगी।
News in Detail
काशी यानी वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने चतुरंगिणी सेना के गठन का ऐलान किया। इस सेना का उद्देश्य गौ-रक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा होगा। उन्होंने सेना के गठन की योजना और कार्य विधि के बारे में विस्तार से बताया।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण से पहले लगे थे मारपीट के आरोप, 6 दिन में बदला घटनाक्रम
चतुरंगिणी सेना का उद्देश्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस चतुरंगिणी सेना का मुख्य उद्देश्य धर्म, शास्त्र, मंदिर और गाय की रक्षा करना होगा। यह सेना देशभर में फैलेगी और इसमें कुल 2 लाख 18 हजार 700 सदस्यों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि सेना में 27 सदस्यीय पदाधिकारियों की घोषणा पहले ही कर दी गई है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक
रोको, टोको और ठोको
शंकराचार्य ने अपनी सेना के कार्य करने के तरीके को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पहले 'टोको', यानी टोकना होगा। यदि गलत काम हो रहा है, तो पहले टोकेंगे। यदि लोग नहीं मानेंगे, तो 'रोको', यानी रोकने की कोशिश करेंगे। फिर भी सुधार नहीं होने पर, 'ठोको', यानी मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना होगा। यह सभी संवैधानिक तरीकों से कार्य करेंगे।
10 महीने में सेना तैयार
शंकराचार्य ने बताया कि चतुरंगिणी सेना माघ मेला में पूरी तरह तैयार हो जाएगी। 10 महीने के भीतर यह धरातल पर उतरेगी। उन्होंने सेना के लिए स्लोगन भी घोषित किया। उनका मुख्य उद्देश्य गौ रक्षा होगा। सेना के गठन में हर पत्ती (टीम) में 10 लोग होंगे। 21 हजार 870 टीमें बनाकर सेना तैयार की जाएगी।
चतुरंगिणी सेना का अर्थ चार अंगों से बनी सेना है। इसमें पदाति (पैदल सैनिक), अश्व (घुड़सवार), रथ और गज (हाथी) शामिल होते हैं। प्राचीन भारत में यह सेना महत्वपूर्ण मानी जाती थी। इसका उल्लेख महाभारत और रामायण में मिलता है। यह सेना युद्ध कौशल और सैन्य संगठन की उन्नत सोच को दर्शाती थी।
चतुरंगिणी सेना का गठन एक महत्वपूर्ण कदम है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य समाज की रक्षा और धार्मिक मूल्यों की सुरक्षा है। यह सेना सामाजिक जागरूकता फैलाएगी। शंकराचार्य के नेतृत्व में यह सेना देशभर में प्रभाव छोड़ेगी।
आज यूपी के वाराणसी-जौनपुर में रहेगा सीएम मोहन यादव का दौरा, स्थानीय कार्यक्रम में होंगे शामिल