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News in Short
- 22 जनवरी 2026 को माघ मेला हिंसा मामले में कोर्ट में अर्जी।
- 16 फरवरी 2026 को कोर्ट ने मामले को “परिवाद” के रूप में दर्ज करने का आदेश।
- 28 जनवरी को उसी शिकायतकर्ता ने लगाया नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप।
- पॉक्सो केस में झूंसी थाने में अपराध क्रमांक 58/2025 दर्ज।
- 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई।
News in detail
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में यह जानकारी सामने आई है कि पहले उनपर मारपीट के आरोप लगे थे। 6 दिन बाद वही शिकायतकर्ता स्वामी आशुतोष ब्रह्मचारी यौन शोषण के आरोपो के साथ कोर्ट पहुंचे थे। प्रयागराज में चल रहा विवाद अब कई परतों में खुल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर सिर्फ यौन शोषण के आरोप ही नहीं लगे थे, बल्कि उससे पहले उन्हीं शिकायतकर्ता द्वारा हिंसा और मारपीट का मामला भी दायर किया गया था। अब पॉक्सो केस में गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बीच पूरा घटनाक्रम चर्चा में है। चर्चा इस बात की भी चल रही है कि आखिर 6 दिनों के भीतर ही एक के बाद एक हिंसा और यौन शोषण के आरोप सामने क्यों आए।
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पहले लगा माघ मेला में हिंसा और मारपीट का आरोप
यौन शोषण के आरोप से ठीक 6 दिन पहले स्वामी आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर हिंसा और मारपीट के आरोप लगाए थे। यह विवाद 18 जनवरी 2026 से जुड़ा बताया जा रहा है, जब मौनी अमावस्या के अवसर पर श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा निकाली जा रही थी। आरोप है कि त्रिवेणी मार्ग पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास मार्ग अवरुद्ध हो गया।
श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्वक रास्ता मांगने पर उनके साथ मारपीट की गई। आरोपों के मुताबिक मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने उनका गला दबाया और मंच से भारी वस्तुएं फेंकी गईं, जिससे उनके सिर में चोट आई। याचिका में यह भी कहा गया कि घटना के दौरान भगवान केशवदेव (लड्डू गोपाल) की प्रतिमा गिर गई और बाद में धमकियां भी दी गईं।
22 जनवरी 2026 को धारा 173(4) B.N.S.S. के तहत अर्जी दाखिल की गई। 16 फरवरी 2026 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कक्ष संख्या 5) संदीप पारचा ने मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया और 17 मार्च 2026 को धारा 223 B.N.S.S. के तहत बयान के लिए अगली तारीख तय की।
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6 दिन बाद लगा यौन शोषण का आरोप
हिंसा और मारपीट के आरोपों के ठीक 6 दिन बाद, 28 जनवरी को स्वामी आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए दोबारा अदालत का रुख किया।
इसी क्रम में पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में अपराध क्रमांक 58/2025 दर्ज हुआ। मामले में पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गईं। शिकायतकर्ता की ओर से मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि का दावा भी किया गया है, हालांकि पुलिस की ओर से इस पर कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया गया है।
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हाईकोर्ट से शंकराचार्य को अंतरिम राहत
गिरफ्तारी की आशंका के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। 27 फरवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।
शंकराचार्य पर केवल यौन शोषण के आरोप ही नहीं लगे थे, बल्कि उसी शिकायतकर्ता द्वारा इससे पहले हिंसा और मारपीट का मामला भी दायर किया गया था। 22 जनवरी से 28 जनवरी तक लगाए गए दो अलग-अलग आरोप अब कोर्ट की निगरानी में है। दोनों मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही विवाद की दिशा तय करेगी।
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