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News In Short
- इलाहाबाद हाईकोर्ट आज अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा।
- स्वामी पर नाबालिगों के यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
- शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास वीडियो और मेडिकल रिपोर्ट जैसे पुख्ता सबूत हैं।
- बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को धार्मिक और राजनीतिक साजिश करार दिया है।
- 13 मार्च को पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले मामले की सुनवाई होगी।
News In Detail
इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज 27 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी अहम सुनवाई होगी। उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आने वाला फैसला बेहद निर्णायक होगा। इस अदालती कार्यवाही से साफ होगा कि उन्हें राहत मिलेगी या गिरफ्तारी होगी। शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गंभीर आपराधिक आरोपों के घेरे में हैं। उन पर नाबालिगों के यौन शोषण का मामला दर्ज है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने की शिकायत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। आशुतोष का आरोप है कि कुछ नाबालिग वेदपाठी छात्रों के साथ यौन शोषण किया गया है। इस मामले में स्वामी के साथ उनके करीबी शिष्य भी नामजद हैं। अदालत के कड़े निर्देश के बाद प्रयागराज के झूसी थाने में FIR हुई। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
संगठित अपराध या गहरी साजिश?
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया के सामने आकर कई चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने इसे एक संगठित व्यवस्था के तहत चलने वाला अपराध बताया है। आशुतोष के अनुसार करीब 20 पीड़ित बच्चे उनके संपर्क में हैं जो गवाही देंगे। ये घटनाएं केवल एक स्थान नहीं, बल्कि विभिन्न धार्मिक आयोजनों में हुईं। दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
स्वामी के समर्थकों का तर्क
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने इसे उन्हें बदनाम करने की बड़ी साजिश कहा है। उनका दावा है कि कथित पीड़ित बच्चे कभी उनके छात्र रहे ही नहीं। उनके शिष्य मुकुंदानंद ने इन आरोपों को बेहद आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण बताया है। स्वामी के वकील ने राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। आज की सुनवाई तय करेगी कि पुलिस उन्हें हिरासत में लेगी या नहीं।
श्री विद्या मठ की जमीनी हकीकत
वाराणसी के केदार घाट स्थित श्री विद्या मठ की असलियत जानने की कोशिश हुई। यह मठ तंग गलियों में स्थित है जहां गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं। मठ के प्रतिनिधि ने बताया कि यहां तीन मंजिला भवन बना हुआ है। पहली मंजिल पर गुरुकुल और छात्रावास है जबकि दूसरी मंजिल पर रसोई है। स्विमिंग पूल के आरोपों पर उन्होंने इसे पुरानी पानी की हौदी बताया।
पीड़ितों ने लगाए गंभीर आरोप
खुद को पीड़ित बताने वाले कुछ बटुकों ने बेहद डरावने अनुभव साझा किए। उनका दावा है कि दीक्षा के नाम पर उनके साथ गलत काम हुए। राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से भी बच्चों को यहाँ लाया जाता था। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियाँ दी जाती रही हैं। ये बच्चे डर के मारे मठ से भागकर आशुतोष ब्रह्मचारी के पास पहुंचे।
13 मार्च को अगली सुनवाई
आशुतोष ब्रह्मचारी ने पेन ड्राइव में वीडियो और चैट होने का दावा किया है। उनके पास 20 बच्चों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट भी मौजूद हैं। वहीं स्वामी की ओर से भी पॉक्सो कोर्ट में एक केस किया गया है। इसमें पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर आपत्ति जताई गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 मार्च को सुनिश्चित की गई है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में धर्म युद्ध बोर्ड जारी कर नया विवाद छेड़ा है। इसमें एक तरफ शंकराचार्य का साथ और दूसरी तरफ सत्ता का जिक्र है। उन्होंने रवींद्र पुरी महाराज की तस्वीर लगाकर उन पर निशाना साधा है। इस बोर्ड को 1 मार्च को सार्वजनिक रूप से जारी करने का प्लान है। गो रक्षा के मुद्दे पर यह वैचारिक संघर्ष अब काफी तेज हो गया है।
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