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Photograph: (the sootr)
News in Short
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर पॉक्सो एक्ट तहत यौन शोषण का आरोप।
- एफआईआर प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई।
- स्वामी ने आरोपों को साजिश बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
- अग्रिम जमानत याचिका 24 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में जल्द ही जमानत याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।
News in Detail
प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो प्रकरण ने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अहम चरण में पहुंच चुका है। मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन हो गया है। जहां अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई है।
पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के निर्देश पर झूंसी थाने में अपराध क्रमांक 58/2026 दर्ज किया गया। इस एफआईआर में मुकुंदानंद ब्रह्मचारी का नाम भी शामिल है।
दोनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 2012 की धाराओं 16, 17, 3, 4(2), 5L और 6 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद यह प्रकरण धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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गिरफ्तारी की आशंका के बीच हाईकोर्ट की शरण
एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य ने 24 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की।
25 फरवरी 2026, बुधवार को यह याचिका विधिवत रजिस्टर्ड कर ली गई। उनकी ओर से अधिवक्ता राजराशि गुप्ता और अधिवक्ता सुधांशु कुमार न्यायालय में पक्ष रखेंगे। अभी सुनवाई की तिथि निर्धारित नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही इस पर सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान दो नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों को लेकर शिकायत प्रस्तुत की गई थी। 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज में यह मामला पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया।
यह शिकायत आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि धार्मिक गतिविधियों और गुरु सेवा की आड़ में नाबालिगों के साथ कथित रूप से अनुचित कृत्य किए गए।
माघ मेले के दौरान सामने आए घटनाक्रम का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। न्यायालय में प्रस्तुत सामग्री के आधार पर मामले को संज्ञेय मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को बताया साजिश
इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इन आरोपों को “पूरी तरह मनगढ़ंत और साजिश” करार दिया है।
उनका कहना है कि जिन लड़कों का हवाला दिया जा रहा है, उनका उनके गुरुकुल या संस्थान से कभी कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि संबंधित छात्र हरदोई के एक स्कूल से जुड़े बताए जा रहे हैं और उनके संस्थान से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि उनके द्वारा चलाए जा रहे ‘गौ-प्रतिष्ठा आंदोलन’-जिसमें गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की जा रही है-और अन्य धार्मिक अभियानों को रोकने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा गया है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।
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अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
मामला अब पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। अग्रिम जमानत याचिका रजिस्टर्ड होने के बाद जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई होने की संभावना है।
आने वाली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और उसके बाद ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी। फिलहाल सभी की नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
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