देशभर के स्कूलों में लागू होगा आयुष्मान स्कूल मिशन, 26 करोड़ स्कूली बच्चों की होगी जांच, सफल रहा है ट्रायल

Sanjay Dhiman | Jul 27, 2025, 18:00 IST
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aayushman sch mission
Photograph: (the sootr)

आयुष्मान स्कूल मिशन का लक्ष्य भारत के 26 करोड़ स्कूली बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी करना है। इसके पहले ट्रायल में त्रिपुरा सफल रहा है, और अब इसे देशभर में लागू किया जाएगा।

देश के स्कूलों में बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को लेकर सरकार ने एक नया कदम उठाया है। आयुष्मान स्कूल मिशन (Ayushman School Mission) के तहत, अब हर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी।

इस मिशन का उद्देश्य बच्चों की सेहत के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उनकी समय पर काउंसलिंग और उपचार सुनिश्चित करना है।

क्या है आयुष्मान स्कूल मिशन

आयुष्मान स्कूल मिशन स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान रखने व उन्हें समय पर सहीं उपचार प्रदान करने के लिए बनाई गई योजना है। इसकी शुरुआत 2018 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर से की गई थी।

इस योजना में बच्चों के स्वास्थ्य की मानिटरिंग, पोषण आहार, मानसिक स्वास्थ्य की जांच, स्वच्छता जागरुकता जैसे विषय शामिल किए गए है। स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चें का इस योजना में सालान रिपोर्ट कार्ड़ बनाया जाएगा, जिसमें हर बार की जांच का रिकार्ड भी मैंटेन किया जाएगा।

इस लिंक पर आयुष्मान स्कूल मिशन की विस्तृत जानकारी



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त्रिपुरा (Tripura) राज्य में सफलता रहा ट्रायल



aayushman sch mission in tripura
aayushman sch mission in tripura


आयुष्मान स्कूल मिशन का पहला ट्रायल त्रिपुरा (Tripura) राज्य में सफल रहा है। इसके तहत, 30 पैरामीटर पर बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें मानसिक और शारीरिक सेहत, भावनात्मक स्थिति, आक्रामकता, हड्डियों की स्थिति, मोटापा, दुबलापन, त्वचा रोग, और खून की कमी जैसी समस्याओं की जांच की गई।

इस ट्रायल से यह साबित हुआ कि स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी से उनकी समय पर काउंसलिंग और मेडिकल जांच की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद,केंद्र सरकार ने इसे देशभर में लागू करने की योजना बनाई है।

इन बिंदू पर होगी बच्चों की सेहत की जांच

आयुष्मान स्कूल मिशन के तहत, बच्चों की सेहत का पता लगाने के लिए विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी, जैसे:

  • मानसिक और भावनात्मक डिसऑर्डर
  • चोट, हिंसा, और असुरक्षित संबंध
  • पोषण स्थिति, मोटापा और दुबलापन
  • आंखों की रोशनी, त्वचा रोग और हड्डियों की स्थिति
  • खून की कमी (Anemia)
इन पहलुओं पर बच्चों की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी, ताकि समय रहते समस्या का समाधान किया जा सके। यदि किसी बच्चे को किसी विशेष चिकित्सा की आवश्यकता हो, तो उसे नजदीकी सरकारी अस्पतालों और विशेषज्ञ केंद्रों में भेजा जाएगा।

आयुष्मान स्कूल मिशन के लाभ



आयुष्मान स्कूल मिशन से बच्चों को कई प्रकार के लाभ होंगे:

  1. स्वस्थ बच्चों का निर्माण: बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान दिया जाएगा।
  2. समय पर इलाज: किसी बच्चे को बीमारी या कमी होने पर उसे समय पर इलाज मिलेगा।
  3. स्वस्थ जीवनशैली: बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बारे में शिक्षा दी जाएगी।
  4. मानसिक स्वास्थ्य: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि वे तनाव मुक्त और खुशहाल जीवन जी सकें।
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आयुष्मान स्कूल मिशन की कार्यप्रणाली

आयुष्मान स्कूल मिशन का कार्य संचालन तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है:

1. बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच

मिशन के तहत, बच्चों की आंखों, दांतों, त्वचा, पोषण और अन्य सामान्य रोगों की जांच की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को किसी प्रकार की शारीरिक समस्या न हो।

2. डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड प्रोफाइल

प्रत्येक छात्र की एक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इस प्रोफाइल में उसकी सेहत संबंधी सभी जानकारी होगी, जिससे यह ट्रैक किया जा सकेगा कि बच्चे को कब किस प्रकार की चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।

3. समय पर इलाज और काउंसलिंग

यदि किसी बच्चे में कोई बीमारी या कमी पाई जाती है, तो उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल या विशेषज्ञ केंद्र में भेजा जाएगा, ताकि समय रहते उसका इलाज किया जा सके। इसके साथ ही बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता, और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा।

आयुष्मान स्कूल मिशन का होगा विस्तार

आयुष्मान स्कूल मिशन के तहत, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय मिलकर इस योजना को देशभर में लागू कर रहे हैं। शुरुआत में इसे छोटे राज्यों में लागू किया जाएगा, जहां स्कूलों की संख्या कम होने के कारण यह योजना जल्दी लागू की जा सकती है।

इन राज्यों में पुद्दुचेरी, चंडीगढ़, मेघालय और मिजोरम शामिल हैं। इन राज्यों में इस योजना को चालू वित्त वर्ष के दौरान लागू किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य देशभर के 26 करोड़ बच्चों तक पहुंच बनाना है, जो स्वस्थ बच्चों (Healthy children) के निर्माण में मदद करेगा।

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