बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा फैसला! एक व्यक्ति-एक पद नियम से खत्म होगी दो कुर्सियों की राजनीति

Neel Tiwari | Mar 13, 2026, 20:19 IST
Bar Council India
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक व्यक्ति-एक पद का नियम लागू किया है। अब कोई भी अधिवक्ता बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल में एक साथ पद नहीं रख सकेगा। चुनावों में नया बदलाव।

News in Short

  • अब कोई अधिवक्ता बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल दोनों में एक साथ पद नहीं रख सकेगा।
  • चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को नामांकन के समय शपथ पत्र देना अनिवार्य।
  • चुनाव जीतने के बाद 15 दिन के भीतर एक पद चुनना होगा।
  • तय समय में निर्णय नहीं लेने पर स्टेट बार काउंसिल की सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य बार काउंसिल चुनावों को तय समय में कराने का निर्देश दिया।

News in detail

देशभर में बार काउंसिल चुनावों को लेकर बड़ा कानूनी और प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अधिनियम और नियमों में संशोधन करते हुए एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत लागू कर दिया है।



इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए राज्य बार काउंसिलों के चुनाव तय समय में कराने के निर्देश दिए हैं। इसका सीधा असर मध्यप्रदेश समेत देश के कई राज्यों में होने वाले आगामी बार काउंसिल चुनावों पर पड़ने वाला है।



Bar Council of India


मध्यप्रदेश कांग्रेस में ‘टैलेंट हंट’ से बनेंगे नए प्रवक्ता, 5 जोन में इंटरव्यू की तैयारी



नियमों में अहम संशोधन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े नियमों के चैप्टर 3 में संशोधन किया है। अब कोई भी अधिवक्ता एक साथ दो प्रमुख संस्थाओं में पदाधिकारी नहीं रह सकेगा। इस संशोधन का उद्देश्य बार काउंसिलों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना और नेतृत्व के अवसरों को व्यापक बनाना है।



नए नियम के अनुसार, यदि वकील किसी जिला या उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन में पदाधिकारी है, तो वह स्टेट बार काउंसिल में सदस्य या पदाधिकारी नहीं रह सकेगा। अब बार राजनीति में एक व्यक्ति-एक पद का सिद्धांत लागू किया गया है।



एमपी स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद खत्म : सुप्रीम कोर्ट कमेटी का बड़ा फैसला, 12 मई को वोटिंग



नामांकन के समय शपथ पत्र अनिवार्य

संशोधित नियमों के अनुसार, बार काउंसिल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ एक शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में उम्मीदवार को यह घोषित करना होगा कि यदि वह स्टेट बार काउंसिल का चुनाव जीतता है, तो वह बार एसोसिएशन के पद से इस्तीफा दे देगा।



यदि उम्मीदवार शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं करता, तो चुनाव अधिकारी को नामांकन निरस्त करने का अधिकार होगा। यह प्रावधान चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



SC-ST वकीलों के लिए बार काउंसिल में आरक्षण की मांग सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज



15 दिन में लेना होगा अंतिम निर्णय

नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिवक्ता दोनों पदों के लिए पात्र स्थिति में है। यदि उम्मीदवार स्टेट बार काउंसिल का चुनाव जीतता है, तो उसे 15 दिनों के भीतर तय करना होगा कि वह कौन सा पद रखेगा। उसे संबंधित बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल को लिखित रूप से सूचित करना होगा कि वह किस पद से इस्तीफा दे रहा है। इसके बाद दूसरे पद पर बने रहने की अनुमति नहीं होगी।



...तो सदस्यता स्वतः समाप्त

संशोधित नियमों में एक सख्त प्रावधान जोड़ा गया है। यदि कोई अधिवक्ता चुनाव जीतने के बाद 15 दिनों में अपना निर्णय नहीं देता, तो इसे स्टेट बार काउंसिल की सदस्यता अस्वीकार करना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाएगी और सीट रिक्त घोषित की जा सकती है। यह प्रावधान “डिफॉल्ट परिणाम” है, ताकि कोई व्यक्ति दोनों पदों का लाभ न उठा सके।



चुनावों पर सख्त समय-सीमा तय की

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि जिन राज्यों में कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वहां चुनाव जल्द कराए जाएं। मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है। इसके लिए एक स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा गया है।



एमपी स्टेट बार काउंसिल की सचिव की नियुक्ति हाईकोर्ट ने की रद्द, एलडीसी पद पर रिवर्ट करने के निर्देश



खत्म होगा दोहरी ताकत का प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन बार राजनीति में प्रभाव को समाप्त करेगा। पहले कई प्रभावशाली अधिवक्ता बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल दोनों में पद संभालते थे। इससे निर्णय प्रक्रिया पर उनका प्रभाव अधिक रहता था। नए नियम के बाद यह स्थिति समाप्त हो जाएगी। इससे नेतृत्व का दायरा बढ़ेगा।



युवा वकीलों के लिए खुलेंगे नए अवसर

इस बदलाव को युवा अधिवक्ताओं के लिए भी बड़ा अवसर माना जा रहा है। अब जब एक व्यक्ति एक ही पद पर रहेगा, तो बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल दोनों में नए लोगों के लिए जगह बनेगी। कानूनी हलकों में चर्चा है कि इस फैसले से बार काउंसिल चुनावों में नए चेहरे सामने आएंगे। इससे बार राजनीति में व्यापक बदलाव हो सकता है।





Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया
  • बार काउंसिल
  • बार काउंसिल चुनाव