भारत में 40% टैक्स के कारण आईफोन-15 महंगा, अमेरिका में बिक रहा 40% तक सस्ता, जानें क्या है वजह
Pratibha Rana | Sept 17, 2023, 24:00 IST
भारत में 40% टैक्स के कारण आईफोन-15 महंगा, अमेरिका में बिक रहा 40% तक सस्ता, जानें क्या है वजह
आईफोन को लेकर भारत समेत दुनियाभर में क्रेज बढ़ता जा रहा है। हर किसी का सपना होता है कि उसके हाथ में आईफोन हो, लेकिन वह उनकी जेब पर सबसे ज्यादा भारी है।
Mumbai. आईफोन को लेकर भारत समेत दुनियाभर में क्रेज बढ़ता जा रहा है। हर किसी का सपना होता है कि उसके हाथ में आईफोन हो, लेकिन वह उनकी जेब पर सबसे ज्यादा भारी है। इसके पीछे वजह है कई तरह से लगाया जाने वाला टैक्स। जी हां, भारत में आईफोन पर करीब 40% टैक्स लगता है। हाल ही में खबर आई थी कि आईफोन भारत में असेंबल होगा। यह सुनते ही लोगों के मन में आया था कि अब यह फोन सस्ता मिलेगा, लेकिन सस्ता तो दूर, यह तो अमेरिका से 40 प्रतिशत तक महंगा मिल रहा है।
आईफोन-15 के तीनों मॉडल के रेट में अंतर जानें
1- आईफोन 15 : भारत में कीमत 79,900 रुपए, जबकि अमेरिका में 799 डॉलर (66,426 रुपए) में बिक रहा है।
2- आईफोन 15 प्रो : भारत में कीमत 1,34,900 रुपए और अमेरिका में 999 डॉलर (83,048 रुपए) में बिक रहा है।
3- आईफोन 15 प्रो मैक्स : भारत में कीमत 1,99,900 रुपए, जबकि यही मोबाइल अमेरिका में 50% सस्ता यानी 1,32,717 रुपए का बिक रहा है।
भारत में बनने के बावजूद आईफोन-15 महंगा क्यों बिक रहा?
भारत में आईफोन 15 मैनुफैक्चर नहीं होता, सिर्फ असेंबल किया जाता है। आईफोन 15 के अलावा आईफोन 15 प्रो सीरीज की कोई डिवाइस भारत में असेंबल भी नहीं होती। ये पूरी तरह डिब्बा बंद होकर भारत में इंपोर्ट की जाती है। आईफोन 15 प्रो मॉडल्स पूरी तरह तैयार पैक होकर इंपोर्ट किए जाते हैं। सरकार इन पर 22% इंपोर्ट ड्यूटी और 2% सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगाती है। इस पर 18% जीएसटी भी लगता है। इससे आईफोन-15 प्रो मॉडल्स पर भारत में कुल टैक्स मिलाकर करीब 40% हो जाता है।
महंगा होने की वजह : जानें कौन से पार्ट्स पर कितना टैक्स लग रहा
आईफोन 15 के अलग-अलग पुर्जे इंपोर्ट किए जाते हैं और फिर इन्हें भारत में असेंबल किया जाता है। ताइवान की फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक प्लांट तैयार किया है, जहां आईफोन 15 असेंबल किया जाता है। इस फोन में लगने वाले सारे कंपोनेंट्स विदेश से इंपोर्ट किए जाते हैं, जिस पर कस्टम ड्यूटी लगती है। मसलन, आईफोन का डिस्प्ले सैमसंग बनाती है, जिस पर 20% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। सर्किट बोर्ड, ट्रांजिस्टर्स, प्रोसेसर्स सभी पर इंपोर्ट ड्यूटी और उसके बाद 18% जीएसटी लगता है। ये सब मिलाकर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा हो जाती है।
जब भारत में सस्ता नहीं तो घरेलू असेंबलिंग का क्या फायदा?
एपल ने भारत में अभी आईफोन असेंबल करना शुरू ही किया है। अगले दो सालों में दुनिया का हर 5वां आईफोन भारत में बनाने का टारगेट है। हालांकि फिर भी सस्ता नहीं हो रहा है। आईफोन मैनुफैक्चरिंग के लिए एपल चीन+1 का अप्रोच चाहता है। वो इस दिशा में आगे भी बढ़ रहा है। भारत ने भी अपनी बाहें फैला रखी हैं।
क्या है सरकार की योजना
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट स्पीच में मोबाइल कैमरा लेंस और लीथियम ऑयन बैट्री जैसे प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की बात कही थी। आईटी हार्डवेयर के लिए भारत ने सेकेंड राउंड प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम भी जारी की है, जिसमें फॉक्सकॉन ने भी आवेदन किया है। जनवरी 2023 में कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा था कि आईफोन का 5% से 7% निर्माण भारत में होता है। इसे 25% तक बढ़ाना है। इसके अलावा भारत के टाटा ग्रुप ने एपल के सप्लायर विस्त्रों कॉर्प्स के साथ एक डील की है। पहली बार कोई देसी कंपनी आईफोन असेंबल करना शुरू करेगी। इसका असर आने वाले सालों में आईफोन की कीमत पर देखने को मिल सकता है।
मोबाइल मैनुफैक्चरिंग में चीन के मुकाबले हम कहां खड़े?
आईफोन्स पहली बार भारत में मई 2017 में बनाए गए थे, लेकिन वो पुरानी सीरीज के फोन थे। इस साल फॉक्सकॉन के चेन्नई प्लांट ने पिछले महीने ही आईफोन-15 बनाना शुरू कर दिया है। इससे भारत ने चीन के मुकाबले मैन्युफैक्चरिंग की दावेदारी पेश कर दी है। भारत में फिलहाल सिर्फ आईफोन-15 यानी बेस वर्जन ही असेंबल किया गया। प्रो सीरीज के मोबाइल अभी भी बाहर ही असेंबल किए जाते हैं। इसकी बड़ी वजह सप्लाई चेन है। चीन में पहले से ही एपल के पार्टनर और वेंडर मौजूद हैं, जिससे वहां बनाना सस्ता और सुविधाजनक पड़ता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 2-3 सालों में भारत पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लेगा।
प्री-बुकिंग : आईफोन-15 प्रो मैक्स आउट ऑफ स्टॉक, एक घंटे में पूरा स्टॉक बिका, अब दो से तीन हफ्ते की वेटिंग
एपल का प्रीमियम स्मार्टफोन आईफोन-15 प्रो मैक्स बुकिंग ओपन होते ही एक घंटे से भी कम समय में बिक गया। अब इस फोन के लिए खरीदारों को 2-3 हफ्ते का इंतजार करना पड़ेगा। कंपनी ने इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है। आईफोन 15 सीरीज के लिए प्री-ऑर्डर 15 सितंबर शाम 5:30 बजे कई देशों में शुरू हुआ था।
22 सितंबर से 40 देशों में शुरू होगी सेल
यदि ग्राहक प्री-सेल इवेंट के दौरान आईफोन-15 प्रो मैक्स नहीं खरीद पाते हैं तो उनके पास 22 सितंबर से सामान्य बिक्री शुरू होने पर इसे खरीदने का मौका होगा या कम से कम इंतजार करना पड़ सकता है। नए आईफोन 22 सितंबर से 40 से अधिक देशों में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। हालांकि मकाऊ, मलेशिया, तुर्की, वियतनाम और 17 अन्य देशों और क्षेत्रों के ग्राहकों को नए डिवाइस खरीदने के लिए 29 सितंबर तक इंतजार करना होगा।
आईफोन में पहली बार मिलेगा टाइप-C चार्जिंग पोर्ट
कैलिफोर्निया की टेक कंपनी ने मंगलवार (12 सितंबर) को अपने वंडरलस्ट इवेंट में 79,990 रुपए की शुरुआती कीमत में आईफोन 15 सीरीज को लॉन्च किया था। इसमें आईफोन-15 प्रो मैक्स को 1.60 लाख रुपए की शुरुआती कीमत में पेश किया गया था।
आईफोन-15 के तीनों मॉडल के रेट में अंतर जानें
1- आईफोन 15 : भारत में कीमत 79,900 रुपए, जबकि अमेरिका में 799 डॉलर (66,426 रुपए) में बिक रहा है।
2- आईफोन 15 प्रो : भारत में कीमत 1,34,900 रुपए और अमेरिका में 999 डॉलर (83,048 रुपए) में बिक रहा है।
3- आईफोन 15 प्रो मैक्स : भारत में कीमत 1,99,900 रुपए, जबकि यही मोबाइल अमेरिका में 50% सस्ता यानी 1,32,717 रुपए का बिक रहा है।
भारत में बनने के बावजूद आईफोन-15 महंगा क्यों बिक रहा?
भारत में आईफोन 15 मैनुफैक्चर नहीं होता, सिर्फ असेंबल किया जाता है। आईफोन 15 के अलावा आईफोन 15 प्रो सीरीज की कोई डिवाइस भारत में असेंबल भी नहीं होती। ये पूरी तरह डिब्बा बंद होकर भारत में इंपोर्ट की जाती है। आईफोन 15 प्रो मॉडल्स पूरी तरह तैयार पैक होकर इंपोर्ट किए जाते हैं। सरकार इन पर 22% इंपोर्ट ड्यूटी और 2% सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगाती है। इस पर 18% जीएसटी भी लगता है। इससे आईफोन-15 प्रो मॉडल्स पर भारत में कुल टैक्स मिलाकर करीब 40% हो जाता है।
महंगा होने की वजह : जानें कौन से पार्ट्स पर कितना टैक्स लग रहा
आईफोन 15 के अलग-अलग पुर्जे इंपोर्ट किए जाते हैं और फिर इन्हें भारत में असेंबल किया जाता है। ताइवान की फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक प्लांट तैयार किया है, जहां आईफोन 15 असेंबल किया जाता है। इस फोन में लगने वाले सारे कंपोनेंट्स विदेश से इंपोर्ट किए जाते हैं, जिस पर कस्टम ड्यूटी लगती है। मसलन, आईफोन का डिस्प्ले सैमसंग बनाती है, जिस पर 20% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। सर्किट बोर्ड, ट्रांजिस्टर्स, प्रोसेसर्स सभी पर इंपोर्ट ड्यूटी और उसके बाद 18% जीएसटी लगता है। ये सब मिलाकर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा हो जाती है।
जब भारत में सस्ता नहीं तो घरेलू असेंबलिंग का क्या फायदा?
एपल ने भारत में अभी आईफोन असेंबल करना शुरू ही किया है। अगले दो सालों में दुनिया का हर 5वां आईफोन भारत में बनाने का टारगेट है। हालांकि फिर भी सस्ता नहीं हो रहा है। आईफोन मैनुफैक्चरिंग के लिए एपल चीन+1 का अप्रोच चाहता है। वो इस दिशा में आगे भी बढ़ रहा है। भारत ने भी अपनी बाहें फैला रखी हैं।
क्या है सरकार की योजना
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट स्पीच में मोबाइल कैमरा लेंस और लीथियम ऑयन बैट्री जैसे प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की बात कही थी। आईटी हार्डवेयर के लिए भारत ने सेकेंड राउंड प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम भी जारी की है, जिसमें फॉक्सकॉन ने भी आवेदन किया है। जनवरी 2023 में कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा था कि आईफोन का 5% से 7% निर्माण भारत में होता है। इसे 25% तक बढ़ाना है। इसके अलावा भारत के टाटा ग्रुप ने एपल के सप्लायर विस्त्रों कॉर्प्स के साथ एक डील की है। पहली बार कोई देसी कंपनी आईफोन असेंबल करना शुरू करेगी। इसका असर आने वाले सालों में आईफोन की कीमत पर देखने को मिल सकता है।
मोबाइल मैनुफैक्चरिंग में चीन के मुकाबले हम कहां खड़े?
आईफोन्स पहली बार भारत में मई 2017 में बनाए गए थे, लेकिन वो पुरानी सीरीज के फोन थे। इस साल फॉक्सकॉन के चेन्नई प्लांट ने पिछले महीने ही आईफोन-15 बनाना शुरू कर दिया है। इससे भारत ने चीन के मुकाबले मैन्युफैक्चरिंग की दावेदारी पेश कर दी है। भारत में फिलहाल सिर्फ आईफोन-15 यानी बेस वर्जन ही असेंबल किया गया। प्रो सीरीज के मोबाइल अभी भी बाहर ही असेंबल किए जाते हैं। इसकी बड़ी वजह सप्लाई चेन है। चीन में पहले से ही एपल के पार्टनर और वेंडर मौजूद हैं, जिससे वहां बनाना सस्ता और सुविधाजनक पड़ता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 2-3 सालों में भारत पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लेगा।
प्री-बुकिंग : आईफोन-15 प्रो मैक्स आउट ऑफ स्टॉक, एक घंटे में पूरा स्टॉक बिका, अब दो से तीन हफ्ते की वेटिंग
एपल का प्रीमियम स्मार्टफोन आईफोन-15 प्रो मैक्स बुकिंग ओपन होते ही एक घंटे से भी कम समय में बिक गया। अब इस फोन के लिए खरीदारों को 2-3 हफ्ते का इंतजार करना पड़ेगा। कंपनी ने इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है। आईफोन 15 सीरीज के लिए प्री-ऑर्डर 15 सितंबर शाम 5:30 बजे कई देशों में शुरू हुआ था।
22 सितंबर से 40 देशों में शुरू होगी सेल
यदि ग्राहक प्री-सेल इवेंट के दौरान आईफोन-15 प्रो मैक्स नहीं खरीद पाते हैं तो उनके पास 22 सितंबर से सामान्य बिक्री शुरू होने पर इसे खरीदने का मौका होगा या कम से कम इंतजार करना पड़ सकता है। नए आईफोन 22 सितंबर से 40 से अधिक देशों में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। हालांकि मकाऊ, मलेशिया, तुर्की, वियतनाम और 17 अन्य देशों और क्षेत्रों के ग्राहकों को नए डिवाइस खरीदने के लिए 29 सितंबर तक इंतजार करना होगा।
आईफोन में पहली बार मिलेगा टाइप-C चार्जिंग पोर्ट
कैलिफोर्निया की टेक कंपनी ने मंगलवार (12 सितंबर) को अपने वंडरलस्ट इवेंट में 79,990 रुपए की शुरुआती कीमत में आईफोन 15 सीरीज को लॉन्च किया था। इसमें आईफोन-15 प्रो मैक्स को 1.60 लाख रुपए की शुरुआती कीमत में पेश किया गया था।
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