ईडी का नया ढांचा 2027 से होगा लागू, मनी लॉन्ड्रिंग जांच में आएगी तेजी
Sandeep Kumar | Sept 15, 2026, 23:38 IST
ईडी का नया ढांचा 2027 से होगा लागू
ईडी का नया ढांचा वर्ष 2027 से लागू होगा। देशभर में 50 पीएमएलए और पांच फेमा जोन बनेंगे। विस्तार के तहत 1227 नए पद बढ़ाए जाएंगे। नए कार्यालयों से आर्थिक अपराधों की जांच तेज होगी। जांच पूरी करने का लक्ष्य डेढ़ वर्ष रखा गया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) अपनी जांच व्यवस्था का बड़ा विस्तार करेगा। नया ढांचा 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। देश में 50 पीएमएलए और पांच फेमा जोन बनेंगे। मंजूर पदों की संख्या बढ़कर 3256 हो जाएगी। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच लगभग डेढ़ वर्ष में पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अपना संगठनात्मक ढांचा बदलने जा रहा है। यह बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। इसके तहत जांच इकाइयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों के पद भी काफी बढ़ेंगे। ईडी पुनर्गठन (ED Restructuring) आर्थिक अपराधों की बढ़ती संख्या से जुड़ा है। मौजूदा संसाधनों पर जांच का बड़ा दबाव रहता है। कई मामलों की जांच में वर्षों लग जाते हैं। नया ढांचा इस अवधि को घटाने में मदद करेगा।
एजेंसी ने विस्तृत जांच व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य रखा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विदेशी मुद्रा उल्लंघनों की जांच भी अलग होगी। दोनों कानूनों के लिए अलग जोन बनाए जाएंगे। नए ढांचे को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। इसका क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। नए अधिकारियों की तैनाती भी इसी अनुसार होगी। राज्यों में जांच की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
नए ढांचे में 50 पीएमएलए जोन बनाए जाएंगे। ये जोन मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच करेंगे। अभी ईडी के पास 27 प्रमुख जोन हैं। इसके अलावा 18 सब-जोन भी कार्यरत हैं। पीएमएलए जांच जोन (PMLA Investigation Zones) राज्यों में फैले होंगे। इससे मामलों की स्थानीय स्तर पर जांच संभव होगी। अधिकारियों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। दस्तावेज और गवाहों तक पहुंच भी आसान होगी।
हर जोन में जांच अधिकारियों की टीम तैनात होगी। कानूनी और तकनीकी कर्मचारी भी टीम का हिस्सा होंगे। वित्तीय लेनदेन जांचने वाले विशेषज्ञ भी उपलब्ध रहेंगे। इससे जटिल मामलों की जांच बेहतर हो सकेगी। पीएमएलए का संबंध अपराध से प्राप्त संपत्ति से है। एजेंसी संदिग्ध धन के स्रोत की जांच करती है। बैंक खातों और संपत्तियों की जानकारी जुटाई जाती है। जरूरत पड़ने पर संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त होती है।
ईडी पांच अलग फेमा जोन (FEMA Enforcement Zones) भी बनाएगा। ये दिल्ली और चंडीगढ़ में स्थापित किए जाएंगे। मुंबई और कोलकाता भी सूची में शामिल हैं। पांचवां विशेष जोन चेन्नई में बनाया जाएगा। यहां फेमा का अर्थ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम है। यह विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है। विदेश भेजे गए धन की जांच भी होती है। नियम उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।
ईडी के मंजूर पदों की संख्या भी बढ़ेगी। अभी निदेशालय में 2029 स्वीकृत पद बताए गए हैं। पुनर्गठन के बाद यह संख्या 3256 हो जाएगी। इस तरह कुल 1227 नए पद जुड़ेंगे। ईडी पदों में बढ़ोतरी (ED Staff Expansion) लगभग 60 प्रतिशत है। इसमें जांच और कानूनी अधिकारी शामिल हो सकते हैं। प्रशासनिक कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत भी पूरी की जाएगी।
अधिक कर्मचारियों से लंबित मामलों का दबाव घट सकता है। जांच टीमों को ज्यादा संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। एक अधिकारी पर मामलों की संख्या भी घटेगी। इससे जांच की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। सरकार ने मई 2026 में पद विस्तार मंजूर किया था। इसमें ईडी के छह संवर्ग शामिल किए गए हैं। इसकी जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दी गई थी।
ईडी की कार्यात्मक इकाइयों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी देशभर में 131 कार्यात्मक इकाइयां हैं। नया ढांचा बनने पर इनकी संख्या 241 होगी। इससे 110 अतिरिक्त इकाइयां काम शुरू करेंगी।
ईडी कार्यात्मक इकाइयां (ED Functional Units) अलग जिम्मेदारियां संभालेंगी। कुछ इकाइयां जांच से संबंधित कार्य करेंगी। कुछ कानूनी मामलों में सहायता प्रदान करेंगी। तकनीकी और खुफिया विश्लेषण भी महत्वपूर्ण रहेगा।
ईडी ने जांच अवधि घटाने का लक्ष्य बनाया है। अभी कई जांचों में चार-पांच वर्ष लग जाते हैं। नया लक्ष्य लगभग डेढ़ वर्ष निर्धारित किया गया है। इसके लिए जांच प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा।
मनी लॉन्ड्रिंग जांच अवधि (Money Laundering Investigation Time) घटाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। ऐसे मामलों में कई एजेंसियों से जानकारी चाहिए होती है। बैंक और कंपनियों का रिकॉर्ड भी जांचना पड़ता है। विदेशों से जानकारी मिलने में अधिक समय लग सकता है।
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ईडी का नया ढांचा
एजेंसी ने विस्तृत जांच व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य रखा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विदेशी मुद्रा उल्लंघनों की जांच भी अलग होगी। दोनों कानूनों के लिए अलग जोन बनाए जाएंगे। नए ढांचे को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। इसका क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। नए अधिकारियों की तैनाती भी इसी अनुसार होगी। राज्यों में जांच की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
बनेंगे 50 पीएमएलए जोन
हर जोन में जांच अधिकारियों की टीम तैनात होगी। कानूनी और तकनीकी कर्मचारी भी टीम का हिस्सा होंगे। वित्तीय लेनदेन जांचने वाले विशेषज्ञ भी उपलब्ध रहेंगे। इससे जटिल मामलों की जांच बेहतर हो सकेगी। पीएमएलए का संबंध अपराध से प्राप्त संपत्ति से है। एजेंसी संदिग्ध धन के स्रोत की जांच करती है। बैंक खातों और संपत्तियों की जानकारी जुटाई जाती है। जरूरत पड़ने पर संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त होती है।
पांच फेमा जोन बनेंगे
पदों में बड़ी बढ़ोतरी
अधिक कर्मचारियों से लंबित मामलों का दबाव घट सकता है। जांच टीमों को ज्यादा संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। एक अधिकारी पर मामलों की संख्या भी घटेगी। इससे जांच की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। सरकार ने मई 2026 में पद विस्तार मंजूर किया था। इसमें ईडी के छह संवर्ग शामिल किए गए हैं। इसकी जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दी गई थी।
इकाइयां बढ़कर 241 होंगी
ईडी कार्यात्मक इकाइयां (ED Functional Units) अलग जिम्मेदारियां संभालेंगी। कुछ इकाइयां जांच से संबंधित कार्य करेंगी। कुछ कानूनी मामलों में सहायता प्रदान करेंगी। तकनीकी और खुफिया विश्लेषण भी महत्वपूर्ण रहेगा।
डेढ़ साल में होगी जांच
मनी लॉन्ड्रिंग जांच अवधि (Money Laundering Investigation Time) घटाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। ऐसे मामलों में कई एजेंसियों से जानकारी चाहिए होती है। बैंक और कंपनियों का रिकॉर्ड भी जांचना पड़ता है। विदेशों से जानकारी मिलने में अधिक समय लग सकता है।
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