देश में समोसा-वड़ा पाव को लेकर बदला नियम, एक गलती पर हो सकती है जेल

Sandeep Kumar | Jun 06, 2026, 16:35 IST
fssai vada pav newspaper
FSSAI ने देशभर में अखबार में खाना परोसने और पैकिंग पर पूरी तरह रोक लगाई। मुंबई में एक वड़ा पाव विक्रेता की घटना के बाद यह सख्त आदेश जारी हुआ। नियम तोड़ने पर जेल तक हो सकती है।

समझें पूरा मामला...

  • FSSAI ने अखबार में खाना परोसने पर देशभर में पूरी रोक लगाई है।
  • मुंबई में एक वड़ा पाव विक्रेता की घटना के बाद यह आदेश आया।
  • नियम ठेले वाले से लेकर बड़े होटल और कैटरर तक सभी पर लागू है।
  • अखबार की स्याही में सीसा और हानिकारक रसायन होते हैं।
  • नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई और जेल हो सकती है।

अखबार पर समोसा अब नहीं चलेगा

देश में करोड़ों लोग रोज सड़क किनारे के ठेलों पर समोसा, वड़ा पाव और पकौड़े खाते हैं। यह आम भारतीय की थाली का हिस्सा है। लेकिन अब इन्हें अखबार (newspaper ) में लपेटकर देने पर पूरी तरह रोक लग गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI-Food Safety and Standards Authority of India) ने यह सख्त आदेश जारी किया है। नियम तोड़ने वाले दुकानदार को जेल भी हो सकती है।



मुंबई की एक घटना से शुरू हुआ मामला

इस पूरे फैसले की जड़ मुंबई में है। वहां एक वड़ा पाव विक्रेता ग्राहकों को अखबार में खाना पैक करके दे रहा था। यह बात FSSAI की पश्चिमी क्षेत्र टीम की नजर में आई। इसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC - Brihanmumbai Municipal Corporation) के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की गई। यह घटना एक छोटी सी चिंगारी थी जिसने देशव्यापी आदेश की आग जला दी।



कौन-कौन आता है इस नियम के दायरे में?

यह सोचना गलत होगा कि यह नियम सिर्फ छोटे ठेले वालों के लिए है। FSSAI ने साफ कहा है कि यह आदेश सड़क किनारे के ठेले, छोटी दुकानें, बड़े होटल, क्लाउड किचन (Cloud Kitchen), कैटरर्स और फेरीवाले सभी पर समान रूप से लागू होगा। खाना लपेटने के लिए, समोसे-पकौड़ों का तेल सोखने के लिए और खाने को ढकने के लिए, किसी भी काम में अखबार का इस्तेमाल पूरी तरह बंद है।



अखबार की स्याही इतनी खतरनाक क्यों है?

विशेषज्ञों के मुताबिक अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में कई हानिकारक रसायन होते हैं। इनमें सीसा (Lead) और अन्य भारी धातुएं भी शामिल हो सकती हैं। जब गर्म खाना अखबार के संपर्क में आता है तो ये तत्व भोजन में घुल सकते हैं। धीरे-धीरे इनका शरीर में जमा होना गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।



इसके अलावा अखबार कई जगहों से होकर गुजरता है, फर्श पर गिरता है, हाथों से छुआ जाता है। इस पूरी यात्रा में उसमें बैक्टीरिया और रोगाणु जमा हो जाते हैं। ऐसे अखबार में गर्म खाना रखना सीधे बीमारी को न्योता देना है।



अब क्या विक्रेता क्या करें?

FSSAI ने साफ कहा है कि अब सिर्फ फूड-ग्रेड (Food-Grade) पैकेजिंग सामग्री का ही इस्तेमाल होगा। यानी ऐसी सामग्री जो खासतौर पर खाने की पैकिंग के लिए बनाई गई हो और जिसे खाद्य सुरक्षा मानकों पर परखा गया हो। सभी राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस नियम की सख्त निगरानी करें। जहां भी उल्लंघन मिले, वहां तुरंत कार्रवाई हो।



यह खबर क्यों जरूरी है?

FSSAI rules: यह खबर सीधे आम नागरिक की सेहत से जुड़ी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार देता है। FSSAI का यह आदेश उसी संवैधानिक भावना को लागू करने की दिशा में एक ठोस कदम है। स्ट्रीट फूड भारत की संस्कृति का हिस्सा है और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी भी।



ऐसे में यह जरूरी है कि विक्रेता नए नियम को जानें और ग्राहक अपने अधिकार को पहचानें। अखबार में लिपटा खाना सस्ता लग सकता है लेकिन उसकी कीमत लंबे समय में स्वास्थ्य के रूप में चुकानी पड़ सकती है। यह खबर सामाजिक जागरूकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।



FAQ

  1. FSSAI ने अखबार में खाना पैक करने पर रोक क्यों लगाई?
    FSSAI ने यह रोक इसलिए लगाई क्योंकि अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में सीसा और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं। गर्म खाने के संपर्क में आने पर ये तत्व भोजन में घुल सकते हैं और सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  2. FSSAI का नया नियम किन-किन लोगों पर लागू होता है?
    यह नियम सभी प्रकार के खाद्य विक्रेताओं पर लागू होता है। इसमें सड़क किनारे के ठेले, छोटी दुकानें, बड़े होटल, क्लाउड किचन, कैटरर्स और फेरीवाले सभी शामिल हैं।
  3. अखबार की जगह खाना पैक करने के लिए क्या इस्तेमाल करें?
    FSSAI के नए आदेश के अनुसार अब सिर्फ फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करना होगा। यानी ऐसा कागज, थैली या डिब्बा जो खासतौर पर खाने के लिए बना हो और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करता हो।

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