सत्याग्रह से सत्ता-परिवर्तन: भूखे पेट लड़ी गईं वो जंग, जिन्होंने देश का इतिहास बदल दिया

Amresh Kushwaha | Jul 20, 2026, 16:22 IST
Share
सत्याग्रह से सत्ता-परिवर्तन
सत्याग्रह से सत्ता-परिवर्तन

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत के बीच दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल भर्ती कराया। भारत में अनशन का इतिहास पुराना है। गांधी, भगत सिंह, अन्ना हजारे से लेकर ममता बनर्जी तक कई आंदोलनों में अनशन कारगर रहा, तो कई बार असफल भी...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें अस्पताल भर्ती कराया।
  • भारत में अनशन का इस्तेमाल आजादी से पहले से होता आया है।
  • कई आंदोलनों में अनशन से सरकारें झुकने पर मजबूर हुई हैं।
  • कई बार अनशन का कोई असर नहीं हुआ और मांगें अधूरी रहीं।
  • कुछ मामलों में अनशनकारियों की जान तक चली गई।

वांगचुक को अस्पताल भेजा गया

दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उन्हें उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। रविवार को भी वांगचुक ने कुछ नहीं खाया था। उन्होंने ड्रिप लगाने से भी इनकार कर दिया था। वे 20 दिनों से ज्यादा समय से उपवास पर थे। उनसे पहले भी देश में कई नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने अनशन का रास्ता अपनाया है। इससे शुरू हुए कई आंदोलनों ने सरकारों को झुकने पर मजबूर किया। वहीं, कई बार अनशनकारियों की मौत भी हो गई।

1918 में मिल मजदूरों की भूख हड़ताल

भारत में संगठित अनशन की शुरुआत काफी पुरानी मानी जाती है। साल 1918 में अहमदाबाद के मिल मजदूरों ने भूख हड़ताल की थी। उनकी मांग थी कि प्रबंधन उनकी बात सुने। आखिरकार प्रबंधन को मजदूरों की मांग माननी पड़ी। यह घटना भारत में अनशन की ताकत दिखाने वाली शुरुआती मिसालों में गिनी जाती है।

गांधी और भगत सिंह का अनशन

महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अनशन को हथियार बनाया। साल 1932 में उन्होंने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था। इसके बाद 1947 और 1948 में उन्होंने कोलकाता और दिल्ली में हिंसा रोकने के लिए भी अनशन किया। वहीं क्रांतिकारी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 1929 में लाहौर जेल में भूख हड़ताल की थी। दोनों ने 116 दिनों तक जेल में भोजन नहीं किया था। यह अनशन अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कैदियों के अधिकारों को लेकर था।

आंध्र प्रदेश के गठन की मांग

साल 1952 में पोट्टी श्रीरामुलु ने आंध्र प्रदेश के गठन की मांग को लेकर अनशन शुरू किया था। 58 दिनों की भूख हड़ताल के बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मौत का देशभर में गहरा असर हुआ। इसके बाद 1953 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन किया गया। यह घटना बताती है कि कई बार अनशन की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी।

वांगचुक के पिता के आगे झुकी थीं इंदिरा गांधी

सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल ने भी 1984 में अनशन किया था। उनकी मांग थी कि लद्दाख के समुदायों को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी (Scheduled Tribe) का दर्जा दिया जाए। उन्होंने इस मांग को लेकर 5 दिनों तक अनशन किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद लेह पहुंचीं। उन्होंने ही वांग्याल का अनशन खत्म कराया था। इसके बाद 1989 में लद्दाख के समुदायों को एसटी का दर्जा दे दिया गया। यह घटना दिखाती है कि सरकार के सबसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को भी कई बार झुकना पड़ा है।

सिंगुर और नर्मदा बचाओ आंदोलन

साल 2006 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने भी अनशन का सहारा लिया। उन्होंने सिंगुर में टाटा के नैनो प्लांट के विरोध में 26 दिनों तक अनशन किया। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और टाटा को यह प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा। इसी दौर में नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत मेधा पाटकर ने भी 20 दिनों तक अनशन किया था। दोनों घटनाएं बताती हैं कि जनआंदोलनों में अनशन कितना असरदार हथियार बन सकता है।

अन्ना हजारे का लोकपाल आंदोलन

साल 2011 में अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल की मांग को लेकर अनशन किया। उन्होंने 12 दिनों तक भूख हड़ताल जारी रखी। इस अनशन का देशभर में बहुत बड़ा असर हुआ। लाखों लोग उनके समर्थन में सड़कों पर उतर आए। आखिरकार सरकार को संसद में लोकपाल बिल लाना पड़ा। यह आजाद भारत के सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक माना जाता है।

इरोम शर्मिला की मांग नहीं मानी सरकार

हर बार अनशन सफल नहीं रहा। मणिपुर की इरोम शर्मिला ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून यानी अफ्सपा (Armed Forces Special Powers Act) हटाने की मांग को लेकर अनशन शुरू किया था। उनका यह अनशन साल 2000 से 2016 तक चला। इतने लंबे अनशन के बावजूद सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी। यह भारत के इतिहास का सबसे लंबा अनशन माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद यह असफल आंदोलनों में गिना जाता है।

गंगा संरक्षण और चंडीगढ़ की मांग

साल 2018 में प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल ने गंगा संरक्षण को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। 111 दिनों के लंबे उपवास के बाद उनकी मृत्यु हो गई। इसी तरह चंडीगढ़ को पंजाब में शामिल करने की मांग को लेकर स्वतंत्रता सेनानी दर्शन सिंह फेरूमन ने 1969 में अनशन किया था। जेल में 74 दिनों बाद उनका भी निधन हो गया। ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि कई बार अनशन का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।

अनशन का असर मिला-जुला रहा

भारत के इतिहास में अनशन कभी बड़ी जीत दिलाने वाला हथियार बना तो कभी जान लेने वाला संघर्ष भी साबित हुआ। कई आंदोलनों में सरकारें झुकने पर मजबूर हुईं और नीतियां बदलनी पड़ीं। वहीं कुछ मामलों में लंबे संघर्ष के बावजूद मांगें अधूरी रह गईं। सोनम वांगचुक का मौजूदा अनशन भी इसी लंबी परंपरा की एक नई कड़ी बन गया है।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर भारत में अनशन जैसे लोकतांत्रिक और अहिंसक विरोध के तरीके के इतिहास से जुड़ी है। भारतीय संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। अनशन का इतिहास बताता है कि जनता का दबाव सरकार की नीतियां बदल सकता है। साथ ही यह भी सिखाता है कि हर आंदोलन सफल नहीं होता और कई बार भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है। यह जानकारी नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकारों और उनके इस्तेमाल को समझने में मदद करती है। इसलिए यह खबर हर जागरूक नागरिक के लिए जानना जरूरी है।

ये खबरें भी पढ़िए...

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया, पत्नी ने इलाज पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने से हाईकोर्ट का इनकार, पत्नी डॉ. गीतांजलि ने लगाई याचिका

भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने हटाया, जबरन ले गई अस्पताल

अभिजीत दिपके का साथ देने सोनम वांगचुक पहुंचे जंतर-मंतर



Tags:
  • भारत
  • ममता बनर्जी
  • दिल्ली पुलिस
  • जंतर मंतर
  • भारतीय संविधान
  • पश्चिम बंगाल
  • अन्ना हजारे
  • सोनम वांगचुक
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच