भारत की सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन Cervavac को WHO से मिला ग्रीन सिग्नल, अब हर देश में पहुंचेगी ये वैक्सीन
Kaushiki | Oct 06, 2026, 14:13 IST
सर्वाइकल कैंसर का खतरा घटा सकता है ये भारतीय टीका, डब्ल्यूएचओ से मिली मंजूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में बनी सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इस स्वदेशी वैक्सीन का नाम सर्ववैक (Cervavac) रखा गया है। इसीरम इंस्टीट्यूट की यह स्वदेशी वैक्सीन महिलाओं को चार खतरनाक एचपीवी स्ट्रेन से बचाती है। यह वैक्सीन एचपीवी वायरस के चार प्रमुख स्ट्रेन से सुरक्षा देती है। अब दुनियाभर के देश इस भारतीय टीके को खरीद सकेंगे।
इस टीके का नाम सर्ववैक है। इसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है। WHO से मंजूरी मिलने का मतलब है कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता और मानकों पर खरा उतरा है।
भारत के लिए यह एक बहुत ही गर्व की बात मानी जा रही है। अब भारत में बनी यह दवा दुनिया के कई देशों में भेजी जा सकेगी। इससे दुनिया भर की लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में यह टीका बेहद कारगर साबित होगा। आइए जानें कि ये वैक्सीन किस तरह काम करती है। साथ ही यह भी समझेंगे कि इसका महिलाओं की सेहत पर क्या असर पड़ेगा।
क्या है सर्वाइकल कैंसर और ये कैसे फैलता है
ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा मामले इसी बीमारी के देखे जाते हैं। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र में भी इसके केस मिल रहे हैं। 20 से 30 साल की युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं।
शुरुआती दौर में इस बीमारी के कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं। लक्षण न दिखने से बीमारी का समय पर पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से समय पर टीका लगवाना सुरक्षा का सबसे बेहतरीन तरीका है।
भारतीय वैक्सीन सर्ववैक कैसे करती है काम
एचपीवी 16 और 18 को कैंसर के मेन खतरों से जोड़ा जाता है। वहीं एचपीवी 6 और 11 जननांगों में मस्से होने की वजह बनते हैं। यह टीका इन चारों स्ट्रेन को शरीर में पनपने से रोकता है।
डॉक्टर की सलाह पर यह टीका लगवाना बेहद फायदेमंद माना जाता है।टीका लगाने के बाद शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण होने लगता है। इससे भविष्य में वायरस के संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।
क्या कहते हैं WHO के आंकड़े
सही समय पर लिया गया एक फैसला जीवन भर की सुरक्षा देता है। भारत सरकार ने भी अपने राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में इसे शामिल किया है। स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।
जब बच्चियों को छोटी उम्र में ही यह टीका मिल जाता है तो वे सुरक्षित हो जाती हैं। एडल्ट होने पर उनमें इस जानलेवा कैंसर के होने की आशंका न के बराबर होती है।
WHO की मंजूरी मिलने के बाद क्या बदल जाएगा
हालांकि किसी भी देश में यह दवा तुरंत खुद ब खुद उपलब्ध नहीं होगी। हर देश की सरकार को अपनी स्वास्थ्य नीति के हिसाब से फैसला लेना होगा। उन्हें अपने देश के हिसाब से उम्र, खुराक और बजट तय करना पड़ेगा। फिर भी भारतीय वैक्सीन की वैश्विक पहुंच बढ़ना अब पूरी तरह तय है।
महिलाओं के स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य पर असर
कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण दवाइयां बनाना हमेशा से भारत की ताकत रही है। इस स्वदेशी टीके के आ जाने से इलाज का खर्च काफी कम हो जाएगा। हर वर्ग की महिलाओं तक इस टीके की पहुंच बनाना अब आसान होगा।
आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है। सही समय पर जागरूकता और वैक्सीनेशन से एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा।
सर्वाइकल कैंसर भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बाद महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है। अब 20 से 30 साल की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। इसलिए डब्ल्यूएचओ की मंजूरी सिर्फ वैज्ञानिक खबर नहीं है।
यह महिलाओं की सेहत से जुड़ा फैसला है। इससे भरोसा मिलता है कि भारत की वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर खरी है। साथ ही टीका लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
References:
- World Health Organization (WHO) Report.
- Ministry of Health and Family Welfare, Government of India
- Serum Institute of India (SII)
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