15 अगस्त ही क्यों चुना गया भारत का स्वतंत्रता दिवस, जानें माउंटबेटन कनेक्शन

Sandeep Kumar | Aug 14, 2026, 17:21 IST
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भारत का स्वतंत्रता दिवस
भारत का स्वतंत्रता दिवस

भारत 15 अगस्त और पाकिस्तान 14 अगस्त को आजादी मनाता है, जबकि दोनों देश एक ही कानून से बने थे। जानें माउंटबेटन ने यह तारीख क्यों चुनी और दोनों देशों की तारीख अलग कैसे हुई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भारत 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाता है।
  • पाकिस्तान 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
  • दोनों देश ब्रिटिश शासन से अलग हुए थे।
  • स्वतंत्रता अधिनियम में 15 अगस्त तय था।
  • तारीख बदलने के पीछे माउंटबेटन की भूमिका थी।

भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को

भारत हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश साथ बने। ब्रिटिश कानून में दोनों के गठन की तारीख 15 अगस्त थी। फिर पाकिस्तान ने 14 अगस्त क्यों चुना? इसका जवाब लॉर्ड माउंटबेटन, विभाजन और सत्ता हस्तांतरण से जुड़ा है।

क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख

मार्च 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसराय बनकर आए थे। ब्रिटेन ने उन्हें जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरण करने का समय दिया था। लेकिन माउंटबेटन को जल्द ही समझ आ गया कि इतना इंतजार करना मुमकिन नहीं है।

उस समय देश के हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा था। पाकिस्तान की मांग मजबूत हो चुकी थी और सांप्रदायिक हिंसा फैल रही थी। इन्हीं वजहों से माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख जल्दी करने का फैसला लिया।

अपनी किताब में माउंटबेटन ने बताया था कि अंतरिम सरकार ज्यादा समय तक काम नहीं कर सकती थी। उनका मानना था कि अगर वे जल्दी तारीख का ऐलान कर दें, तो हालात संभल सकते हैं। लंबा इंतजार करने से हालात और बिगड़ सकते थे।

जापान के सरेंडर से जुड़ी है यह तारीख

15 अगस्त की तारीख चुनने का एक खास कारण भी था। माउंटबेटन खुद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान साउथ ईस्ट एशिया कमान (SEAC – South East Asia Command) के सुप्रीम कमांडर रह चुके थे। उन्होंने अक्टूबर 1943 से जून 1946 तक बर्मा और भारत में जापानी सेना के खिलाफ अभियानों की कमान संभाली थी।

15 अगस्त 1945 को ही जापान ने सिंगापुर में आत्मसमर्पण किया था। यही वजह थी कि माउंटबेटन ने यह तारीख आजादी के लिए भी चुनी। यह तारीख ब्रिटेन की जीत से जुड़ी थी, ना कि भारत और पाकिस्तान की तैयारियों से।

छह महीने में पूरा हुआ बड़ा फैसला

पूरी प्रक्रिया बेहद तेजी से आगे बढ़ी। भारतीय स्वतंत्रता विधेयक 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में पेश हुआ। महज दो हफ्तों में कानून पास हो गया और भारत-पाकिस्तान दोनों नए देशों के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख तय कर दी गई।

15 अगस्त 1947 को संविधान सभा में भाषण देते हुए माउंटबेटन ने अपनी जल्दबाजी का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव और हिंसा इतनी बढ़ चुकी थी कि जल्द फैसला लेना जरूरी हो गया था।

कई इतिहासकार मानते हैं कि अगर ब्रिटेन इतनी जल्दबाजी नहीं करता, तो बंटवारे की तैयारी बेहतर हो सकती थी। इससे शायद बंटवारे में हुआ भारी खून-खराबा भी कम हो सकता था।

पाकिस्तान 14 अगस्त को ही क्यों मनाता है आजादी

पाकिस्तान को सत्ता हस्तांतरण कराची में 14 अगस्त को हुआ था। उस समय माउंटबेटन भारत के वायसराय पद पर बने हुए थे। अगले ही दिन, यानी 15 अगस्त को उन्हें आजाद भारत का गवर्नर जनरल बनना था।

इस वजह से वे कराची और दिल्ली, दोनों जगह एक ही दिन मौजूद नहीं रह सकते थे। इसीलिए 1948 से पाकिस्तान ने 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मानना शुरू कर दिया।

कुछ जानकार इसकी एक धार्मिक वजह भी बताते हैं। 14 अगस्त 1947 को इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से रमजान की 27वीं तारीख भी थी, जो मुसलमानों के लिए खास मानी जाती है।

FAQ

  1. भारत ने आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी?
    15 अगस्त 1945 को जापान ने सिंगापुर में आत्मसमर्पण किया था। माउंटबेटन इस तारीख को अहम मानते थे। इसी वजह से उन्होंने यही तारीख आजादी के लिए भी चुनी।
  2. पाकिस्तान भारत से एक दिन पहले आजादी क्यों मनाता है?
    सत्ता हस्तांतरण कराची में 14 अगस्त को हुआ था। माउंटबेटन को अगले दिन दिल्ली में गवर्नर जनरल बनना था। इसी वजह से पाकिस्तान ने 14 अगस्त को अपनाया।
  3. भारतीय स्वतंत्रता विधेयक कब पास हुआ था?
    यह विधेयक 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में पेश हुआ था। महज दो हफ्तों में इसे पास कर दिया गया। इसमें 15 अगस्त 1947 की तारीख तय की गई थी।
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(स्रोत: Mountbatten and the Partition of India, Lapierre Dominique व Collins Larry; तथा 15 अगस्त 1947 का संविधान सभा भाषण)

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