मध्य प्रदेश में बढ़ा बेरोजगारी का स्तर, गांवों की चिंता, देशभर के आंकड़े और भी खराब
Aman Vaishnav | Jun 16, 2026, 11:28 IST
देश में बेरोजगारी का स्तर
देश के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी बेरोजगारी दर बढ़ गई है। भारत में यह आंकड़ा 5.5% पर पहुंच गया है। वहीं एमपी में 100 में से 9 युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
- ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई है।
- मध्य प्रदेश में भी युवाओं की बेरोजगारी दर में 0.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत पर आ गई है।
- बाजार में श्रम बल भागीदारी और रोजगार दोनों में गिरावट आई है।
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक मौसमी सुस्ती की वजह से यह गिरावट आई है।
देश के दिल मध्य प्रदेश से भी जो आंकड़े आ रहे हैं, वे युवाओं को परेशान करने वाले हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर रोजगार के बाजार में इस समय क्या चल रहा है।
बेरोजगारी का बढ़ता ग्राफ
फरवरी में बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत थी। (बेरोजगारी पर आई लिस्ट) मार्च में यह बढ़कर 5.0 प्रतिशत हो गई। अप्रैल में 5.2 प्रतिशत और मई में 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं इस बार की बढ़त सबसे तेज रही।
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गांवों में हालात सबसे खराब
वहीं शहरों में थोड़ी राहत मिली है। शहरी बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत हो गई। लेकिन गांवों की गिरावट इस राहत पर भारी पड़ गई।
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कम लोग काम ढूंढने निकले, फिर भी बेरोजगारी बढ़ी
LFPR (Labour Force Participation Rate) अप्रैल के 55.0 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत रह गई। यानी कम लोग काम के बाजार में नौकरी ढंढने आए। इसके बावजूद बेरोजगारी बढ़ी।
WPR (Worker Population Ratio) भी 52.2 प्रतिशत से गिरकर 51.4 प्रतिशत हो गया है। इसका सीधा मतलब है कि जितने लोग काम मांग रहे थे, उनके लिए रोजगार नहीं बना।
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सरकार ने क्या कहा
वहीं जानकार इस सफाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। लगातार चार महीनों की बढ़त को केवल मौसमी नहीं कहा जा सकता है।
क्यों नहीं बन रहीं नौकरियां
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के अलावा दूसरे रोजगार के अवसर सीमित हैं। इससे शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। लेकिन शहरों में भी सभी के लिए काम नहीं है।
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर
FAQ
- PLFS रिपोर्ट क्या होती है?
PLFS यानी Periodic Labour Force Survey सरकार की वह रिपोर्ट है जो हर महीने रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े जारी करती है। इसे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय तैयार करता है। यह रिपोर्ट 2025 से हर महीने आ रही है। - बेरोजगारी दर 5.5% का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि 100 में से 5.5 लोग जो काम करना चाहते हैं, उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। यह आँकड़ा जितना ज्यादा होगा, रोजगार बाजार उतना कमजोर माना जाएगा।
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