बादलों ने दे दी खुशखबरी: जल्द होने वाली है झमाझम बारिश, मौसम विभाग ने मैप जारी कर दी सूचना
Aman Vaishnav | Jul 19, 2026, 14:15 IST
देशभर में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तर, पूर्व और मध्य भारत में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। सैटेलाइट में भारत के दो-तिहाई हिस्से पर घने बादल देखे गए हैं। कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- 19 जुलाई को ISRO के सैटेलाइट ने भारत के मौसम की तस्वीर खींची।
- इसमें देश के दो-तिहाई हिस्से पर घने बादल दिखे।
- जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
- कुछ इलाकों में बेहद ठंडे और ऊंचे तूफानी बादल बने हैं।
- इनकी वजह से कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है।
कहां-कहां छाए बादल
साथ ही दक्षिणी प्रायद्वीप में अरब सागर से आती नमी के कारण लंबी बादल पट्टियां बनी हैं। सिर्फ पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्से साफ दिख रहे हैं। यह आंकड़ा दिनभर बदलता रहता है, क्योंकि बादल लगातार बनते-बिगड़ते हैं।
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सैटेलाइट कैसे करता है काम
इस सैटेलाइट में दो मुख्य कैमरे लगे हैं। पहला विजिबल चैनल है, जो सूरज की रोशनी से बादल की मोटाई पकड़ता है। दूसरा थर्मल इंफ्रारेड चैनल है, जो गर्मी को मापता है और दिन-रात दोनों समय काम करता है।
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जितना ठंडा उतना खतरनाक
जो बादल जितना ठंडा होता है, वह उतना ही ऊंचा और खतरनाक माना जाता है। माइनस 40 डिग्री से नीचे के बादल गहरे तूफानी बादल होते हैं। माइनस 70 डिग्री से नीचे के बादल बेहद हिंसक तूफान का संकेत देते हैं।
19 जुलाई की तस्वीर में जम्मू-कश्मीर में माइनस 80 डिग्री तक ठंडे बादल दिखे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर में भी माइनस 50 डिग्री से नीचे के बादल मौजूद हैं।
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हर बादल से बारिश नहीं
ये तूफानी बादल खुद अपनी ऊर्जा बनाते हैं। जब पानी की भाप जमा होती है, तो भारी गर्मी निकलती है। यह गर्मी हवा को तेजी से ऊपर धकेलती है। इससे बादल 15 किलोमीटर तक ऊंचे उठ जाते हैं। उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
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किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर
साथ ही अरब सागर से आती नमी वाली हवाएं पश्चिमी तट और मध्य भारत को भी प्रभावित कर रही हैं। बंगाल की खाड़ी फिलहाल शांत है, लेकिन इसमें बदलाव संभव है।
आगे क्या हो सकता है
INSAT-3DR जैसी तकनीक मौसम पूर्वानुमान को काफी सटीक बनाती है। पहले भी कई बार समय पर चेतावनी देकर जान-माल का नुकसान कम किया जा चुका है।
वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न बदल रहा है। कभी सूखा तो कभी अचानक भारी बारिश देखने को मिल रही है। ऐसे में सैटेलाइट निगरानी और सटीक पूर्वानुमान पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
आम नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालनकरना चाहिए। जरूरत न हो तो भारी बारिश के दौरान बाहर निकलने से बचें। उत्तरी और पूर्वी भारत में बारिश से राहत जरूर मिली है, लेकिन नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।
दक्षिणी हिस्सों में मानसून की प्रगति फिलहाल अच्छी बताई जा रही है। कुल मिलाकर इस साल मानसून सामान्य से बेहतर दिख रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।
FAQ
- INSAT-3DR क्या है?
यह इसरो का मौसम निगरानी सैटेलाइट है। यह हर आधे घंटे में भारत की तस्वीरें लेता है। IMD इन तस्वीरों से मौसम पूर्वानुमान बनाता है। - मौसम विभाग के अनुसार बारिश होने का खतरा सबसे ज्यादा किन राज्यों में है?
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून ट्रफ के कारण खतरा ज्यादा है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश की आशंका बनी हुई है।
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