JP NARAYAN
जयप्रकाश नारायण जयंती: 1975 में इंदिरा के सामने युवाओं की ढाल बन खड़े हुए थे लोकनायक, आज सड़कों पर फिर गूंज रहा है वैसा ही नारा
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 11, 2026, 08:00 IST
जयप्रकाश नारायण जयंती
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती 11 अक्टूबर को मनाई जाती है। इस मौके पर Total Revolution और इमरजेंसी 1975 की चर्चा फिर तेज है। वजह है कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में चल रहा छात्र-युवा आंदोलन। नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच लोग जेपी के दौर से तुलना कर रहे हैं। लेकिन दोनों दौर में फर्क भी साफ हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
सिताब दियारा से लोकनायक तक
आज़ादी की लड़ाई में वे नेहरू के करीबी सहयोगी रहे। आज़ादी के बाद उन्होंने सत्ता का रास्ता छोड़ा और समाजसेवा चुनी। 1965 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। दिलचस्प बात यह है कि जिस इंदिरा गांधी के खिलाफ उन्होंने सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी, उन्हें वे पत्रों में "माई डियर इंदु" लिखते थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे पत्राचार में सिर्फ जेल से लिखे एक पत्र में उन्होंने "माई डियर प्राइम मिनिस्टर" लिखा। यानी यह निजी दुश्मनी की नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई थी।
1974: जब गुजरात से बिहार तक उठी चिंगारी
उसी साल उन्होंने जाति-भेद के खिलाफ अभियान चलाया। हज़ारों लोगों ने जनेऊ तोड़कर जाति प्रथा न मानने का संकल्प लिया।
गुजरात से बिहार तक उठी चिंगारी
1975: इमरजेंसी और जेपी का जवाब
1975 की इमरजेंसी और जेपी की क्रांति
बीमार शरीर के बावजूद वे विपक्ष को एकजुट करते रहे। 1977 के चुनाव में कांग्रेस हारी, जनता पार्टी की सरकार बनी और देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार आई। रामधारी सिंह दिनकर की पंक्ति "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है" इस आंदोलन का नारा बन गई।
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इस आंदोलन से लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, रामविलास पासवान, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे नेता निकले। इनमें से कई दशकों तक भारतीय राजनीति के शीर्ष पर रहे।
आज: फिर सड़कों पर युवा, फिर संसद की ओर कदम
आज फिर सड़कों पर युवा, फिर संसद की ओर कदम
समानताएं: जो 1975 की याद दिलाती हैं
मुद्दे वही परिवार के: तब भ्रष्टाचार और शिक्षा-व्यवस्था थी, आज पेपर लीक और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता है।
विपक्ष का साथ आना: जेपी ने बिखरे विपक्ष को जोड़ा था। आज भी अलग-अलग दल एक मंच पर दिख रहे हैं।
सड़क बनाम सत्ता: बैरिकेडिंग, भारी पुलिस तैनाती, मेट्रो स्टेशन बंद और प्रदर्शन की अनुमति पर विवाद, ये दृश्य हर दौर में दोहराए जाते हैं।
फर्क: जो तुलना को ईमानदार बनाते हैं
तुलना करते समय फर्क भी याद रखना होगा, वरना यह एकतरफा हो जाएगी।
जेपी की विरासत से क्या सीख
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