सरकार ला रही नया नियम, अब बिना 3-स्टार रेटिंग के नहीं बनेंगी बड़ी इमारतें
Kaushiki | Jul 21, 2026, 15:30 IST
Energy Star Rating for Buildings
केंद्र सरकार बड़े भवनों के लिए अनिवार्य ऊर्जा स्टार रेटिंग लागू करने की तैयारी में है। 20 हजार वर्गमीटर से बड़ी इमारतों के लिए कम से कम 3-स्टार रेटिंग पाना अनिवार्य होगा। इससे बिजली की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन भी काफी हद तक कम होगा।
Energy Star Rating for Buildings: देश में बिजली की खपत दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में ऊर्जा की बचत करना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है। इसी दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की पूरी तैयारी कर रही है। अब बड़ी इमारतों और भवनों को बिजली बचत के आधार पर स्टार रेटिंग मिलेगी।
बिजली मंत्रालय ने इसके लिए एक नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है। नए नियमों के तहत 20 sq.m या उससे बड़े भवनों को स्टार रेटिंग लेनी होगी। इससे न केवल बिजली बिल कम होगा बल्कि भवनों की ऑपरेटिंग कॉस्ट भी काफी घटेगी।
पर्यावरण को बचाने के लिए ये बहुत ही कारगर कदम साबित हो सकता है। रियल एस्टेट डेवलपर्स को अब शुरुआत से ही नई तकनीकों को अपनाना होगा। आइए इस पूरे नियम और इसके फायदों को समझें।
बिजली मंत्रालय ने भवनों के लिए नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ये नियम 20 sq.m से बड़े भवनों पर लागू होगा। नए रेजिडेंशियल और कमर्शियल बिल्डिंग्स को रेटिंग लेना अब जरूरी हो जाएगा। ऑफिस बिल्डिंग्स को भी कंस्ट्रक्शन से पहले रेटिंग हासिल करनी होगी।
ये रेटिंग बिजली बचत की क्षमता देखकर तय की जाएगी। इसके लिए भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency, India) से मान्यता लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे बिजली की बर्बादी काफी हद तक रुकेगी।
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प्रोपोसड रूल्स के मुताबिक,
ECBSCS (या ECSBS) का फुल फॉर्म Energy Conservation and Sustainable Building Code (ऊर्जा संरक्षण और सतत भवन कोड) है। यह भारत सरकार के बिजली मंत्रालय और भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा इमारतों में ऊर्जा की बचत और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए तय किए गए नियम और मानक हैं।
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भवन में इस्तेमाल होने वाली लाइटिंग और वेंटिलेशन को जांचा जाएगा। दीवार और छत के इंसुलेशन की क्वालिटी भी देखी जाएगी। ऊर्जा बचाने वाले इक्विपमेंट के इस्तेमाल पर ज्यादा नंबर दिए जाएंगे। कुल बिजली खपत का एक्यूरेट असेसमेंट करके ही रेटिंग तय होगी।
इससे बिल्डर्स शुरुआत से ही अच्छी तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। ग्रीन बिल्डिंग निर्माण को बाजार में पहले से अधिक बढ़ावा मिलेगा। घर खरीदने वालों को भी भविष्य में बिजली बिल में राहत मिलेगी।
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प्रोपोसड रूल्स के मुताबिक, शुरुआत में अस्थाई रेटिंग दी जाएगी। निर्माण कार्य पूरा होने पर फाइनल रेटिंग जारी की जाएगी। यह रेटिंग कुल 10 सालों की अवधि तक मान्य रहेगी।
10 साल बाद कमर्शियल भवनों को रेटिंग रिन्यू करानी होगी। रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स के लिए रिन्यू कराना पूरी तरह से ऑप्शनल रहेगा। कमर्शियल बिल्डिंग्स के रजिस्ट्रेशन के लिए एक लाख रुपए चार्ज होगा। 10 साल बाद रिन्यू कराने पर 50 हजार रुपए लगेंगे।
सरकार इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना चाहती है। भवन मालिकों को रेटिंग बोर्ड मुख्य स्थान पर लगाना होगा। ब्रोशर और एडवर्टाइजमेंट में भी रेटिंग का जिक्र करना होगा।
वेबसाइट और प्रमोशनल मटेरियल में ऊर्जा रेटिंग स्पष्ट रूप से दिखेगी। इससे ग्राहकों को पहले से ही पूरी जानकारी मिल जाएगी। वे जान सकेंगे कि इमारत में कितनी बिजली की बचत होगी। खरीदार अपने बजट के हिसाब से सही फैसला ले सकेंगे।
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भारत में कुल बिजली का 40% हिस्सा भवनों में इस्तेमाल होता है। शहरीकरण (Urbanization) बढ़ने से यह खपत आगे और भी ज्यादा बढ़ेगी। ऐसे में ऊर्जा दक्ष इमारतों का निर्माण बहुत जरूरी हो गया है।
इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास करना ही मुख्य लक्ष्य है। ग्रीन बिल्डिंग बनने से शहरों का तापमान भी नियंत्रित रहेगा। आने वाले समय में यह मॉडल बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
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जो भवन मानकों को पूरा नहीं करेंगे उन पर कार्रवाई होगी। गलत तरीके से रेटिंग दिखाने पर रेटिंग तुरंत हटा दी जाएगी। ऐसे डिफॉल्टर मामलों को सार्वजनिक करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। राज्यों को नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।
भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की टीमें समय-समय पर निरीक्षण करेंगी। गलत जानकारी देने वाली कंपनियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में ईमानदारी और गुणवत्ता को बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा स्टार रेटिंग लागू होने से देश को बड़ा फायदा होगा। बिजली की मांग नियंत्रित होने से बिजली कटौती कम होगी। पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करना आसान होगा।
बिल्डर्स और खरीदार दोनों ही इसके प्रति जागरूक होंगे। यह पहल भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। आने वाले समय में हर बड़ी इमारत ऊर्जा दक्ष बनेगी। हम सभी को मिलकर इस नई व्यवस्था का समर्थन करना चाहिए।
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बिजली मंत्रालय ने इसके लिए एक नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है। नए नियमों के तहत 20 sq.m या उससे बड़े भवनों को स्टार रेटिंग लेनी होगी। इससे न केवल बिजली बिल कम होगा बल्कि भवनों की ऑपरेटिंग कॉस्ट भी काफी घटेगी।
पर्यावरण को बचाने के लिए ये बहुत ही कारगर कदम साबित हो सकता है। रियल एस्टेट डेवलपर्स को अब शुरुआत से ही नई तकनीकों को अपनाना होगा। आइए इस पूरे नियम और इसके फायदों को समझें।
बड़ी इमारतों के लिए स्टार रेटिंग नियम
ये रेटिंग बिजली बचत की क्षमता देखकर तय की जाएगी। इसके लिए भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency, India) से मान्यता लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे बिजली की बर्बादी काफी हद तक रुकेगी।
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कम से कम 3-स्टार रेटिंग होना जरूरी
- नए रेजिडेंशियल और कमर्शियल बिल्डिंग्स को 3-स्टार रेटिंग पाना सबसे पहली शर्त होगी।
- बिना 3-स्टार रेटिंग के बड़ी इमारतों का निर्माण मान्य नहीं होगा।
- 5-स्टार इमारतों को सुपर ईसीबीएससीएस की केटेगरी में रखा जाएगा।
- 4-स्टार वाले भवनों को ईसीबीएससीएस प्लस केटेगरी में स्थान मिलेगा।
- वहीं 3-स्टार भवनों को ईसीबीएससीएस कोड केटेगरी में शामिल किया जाएगा।
- रेटिंग देने के लिए इमारत की पूरी डिजाइन देखी जाएगी।
- वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग जैसे मानकों की अच्छे से जांच होगी।
ईसीबीएससीएस क्या होता है
- Super ECSBC (सुपर ईसीबीएससीएस): 5-स्टार रेटिंग प्राप्त अत्यधिक ऊर्जा-दक्ष भवन।
- ECSBC Plus (ईसीबीएससीएस प्लस): 4-स्टार रेटिंग वाले भवन।
- ECSBC Code (ईसीबीएससीएस कोड): 3-स्टार रेटिंग वाले भवन।
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एनर्जी-सेविंग इक्विपमेंट से तय होगी रेटिंग
इससे बिल्डर्स शुरुआत से ही अच्छी तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। ग्रीन बिल्डिंग निर्माण को बाजार में पहले से अधिक बढ़ावा मिलेगा। घर खरीदने वालों को भी भविष्य में बिजली बिल में राहत मिलेगी।
मिडिल ईस्ट की जंग से बड़ा झटका, भारत में 5 लाख घरों का पजेशन अटका - housing delivery in india middle east conflict ntcpsc - AajTak
दस सालों तक मान्य रहेगी रेटिंग
10 साल बाद कमर्शियल भवनों को रेटिंग रिन्यू करानी होगी। रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स के लिए रिन्यू कराना पूरी तरह से ऑप्शनल रहेगा। कमर्शियल बिल्डिंग्स के रजिस्ट्रेशन के लिए एक लाख रुपए चार्ज होगा। 10 साल बाद रिन्यू कराने पर 50 हजार रुपए लगेंगे।
एडवर्टाइजमेंट में रेटिंग दिखाना होगा जरूरी
वेबसाइट और प्रमोशनल मटेरियल में ऊर्जा रेटिंग स्पष्ट रूप से दिखेगी। इससे ग्राहकों को पहले से ही पूरी जानकारी मिल जाएगी। वे जान सकेंगे कि इमारत में कितनी बिजली की बचत होगी। खरीदार अपने बजट के हिसाब से सही फैसला ले सकेंगे।
घर खरीदने का सपना हुआ महंगा, 10 में से 8 भारतीय परेशान, लेकिन मुंबई का हाल है अलग - Buying home getting tougher for Indians - AajTak
देश में बिजली की बचत है जरूरी
इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास करना ही मुख्य लक्ष्य है। ग्रीन बिल्डिंग बनने से शहरों का तापमान भी नियंत्रित रहेगा। आने वाले समय में यह मॉडल बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
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नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की टीमें समय-समय पर निरीक्षण करेंगी। गलत जानकारी देने वाली कंपनियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में ईमानदारी और गुणवत्ता को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य में पर्यावरण को मिलेगा लाभ
बिल्डर्स और खरीदार दोनों ही इसके प्रति जागरूक होंगे। यह पहल भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। आने वाले समय में हर बड़ी इमारत ऊर्जा दक्ष बनेगी। हम सभी को मिलकर इस नई व्यवस्था का समर्थन करना चाहिए।
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