बाबा अशोक खरात की कृपा या राजनीतिक सेटिंग? रूपाली चाकणकर के इस्तीफे की पूरी कहानी
धर्म की आड़ में अधर्म का खेल खेलने वाले नासिक के स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात के पापों का घड़ा अब भर चुका है। दुष्कर्म के संगीन आरोपों में घिरे खरात की पुलिस हिरासत अदालत ने 29 मार्च तक बढ़ा दी है।
विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने न केवल महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारे को बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। खरात के ठिकानों से पुलिस को 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो और करीब 1,500 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति के डॉक्यूमेंट्स मिले हैं।
कब हुई अशोक खरात की गिरफ्तारी?
अशोक खरात के पतन की शुरुआत तब हुई जब एक पीड़िता ने हिम्मत दिखाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि खरात ने तीन साल तक उसके साथ दुष्कर्म किया, जिसके बाद 18 मार्च को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इस ढोंगी बाबा की दरिंदगी की नई परतें खुलती गईं।
अब उसके खिलाफ दो और नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से एक मामला सात महीने की गर्भवती महिला के यौन शोषण का है। खरात पर आरोप है कि वह पुनर्विवाह कराने के बहाने महिलाओं को जाल में फंसाता था।
रूपाली चाकणकर ने क्यों दिया इस्तीफा
अशोक खरात की सत्ता के गलियारों में गहरी पैठ थी। नासिक के सिन्नर में एक मंदिर ट्रस्ट का प्रमुख होने के नाते बड़े-बड़े नेता उसके चरणों में सिर झुकाते थे। इसी रसूख का एक बड़ा शिकार महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर बनीं।
रूपाली एक पढ़ी-लिखी महिला हैं और उन्होंने MBA किया है। बताया जाता है कि सरकारी नौकरी की तलाश के दौरान वह खरात के संपर्क में आई और उसकी शिष्या बन गई। बाबा की कृपा से वह राजनीति में ऊपर चढ़ती गईं और महिला आयोग की अध्यक्ष बनी, लेकिन खरात का कांड उजागर होते ही उन्हें नैतिकता के नाते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी ओर रूपाली चाकणकर पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि वह खुद महिलाओं को अशोक खरात के पास भेजती थी।
शक्ति के नाम पर तकता था शोषण
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इस मामले पर कई सनसनीखेज जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि खरात महिलाओं को अलौकिक शक्तियां होने का झांसा देकर उनका शारीरिक शोषण और ब्लैकमेल करता था।
हद तो तब हो गई जब कोर्ट में सरकारी वकील ने उस पर नरबलि (Human Sacrifice) देने और कस्तूरी के लिए हिरणों का शिकार करने जैसे रूहानी और गैर-कानूनी कृत्यों के आरोप भी लगाए। मामला इतना गंभीर है कि इसकी सीधी निगरानी पुलिस महानिदेशक (DGP) कर रहे हैं।
1500 करोड़ का साम्राज्य और डिलीटेड डेटा की जांच
खरात के वित्तीय साम्राज्य की जांच के लिए अब आयकर विभाग को भी टीम में शामिल किया गया है। एसआईटी को जांच में 1500 करोड़ रुपए की संपत्ति के कागजात मिले हैं, जो किसी भी आम बाबा की हैसियत से परे हैं।
वहीं, साइबर पुलिस (cyber police) उन 100 आपत्तिजनक वीडियो की फॉरेंसिक जांच कर रही है, जिन्हें खरात ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल करता था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि यदि डिलीट किए गए डेटा में किसी भी नेता या अधिकारी के साथ आर्थिक लेनदेन के सबूत मिलते हैं, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
एसआईटी की अपील: डरो मत, सामने आओ
आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में एसआईटी वर्तमान में छह मामलों की जांच कर रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई और भी इस ढोंगी बाबा का शिकार हुआ है, तो वह निडर होकर जानकारी साझा करे।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि गवाहों और पीड़ितों की पहचान पूरी तरह गोपनीय (Confidential) रखी जाएगी। यह मामला अब केवल एक अपराध नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ एक बड़ी जंग बन चुका है।
ये खबरें भी पढ़ें...
छात्रों के लिए मुसीबत बने बड़े बाल, स्कूल में परीक्षा देने से रोका, छिड़ गई तीखी बहस
दिल्ली एयरपोर्ट के मल्टीफेथ स्पेस में बीजेपी नेता माधवी लता का दुर्गा सूक्तम पाठ, क्यों भड़के विरोधी
मल्टी-फेथ प्रेयर रूम: जानें, कब और कहां से शुरू हुई एविएशन की अनोखी परंपरा
मुंबई के होटल में बुकिंग की फर्जी वेबसाइट, नोबेटल होटल के नाम पर हो गई 1.44 लाख की ठगी