मल्टी-फेथ प्रेयर रूम: जानें, कब और कहां से शुरू हुई एविएशन की अनोखी परंपरा
Anjali Dwivedi | Mar 25, 2026, 14:07 IST
airport prayer room
1960-70 के दशक में बढ़ती हवाई यात्रा के साथ एयरपोर्ट प्रेयर रूम की अवधारणा जन्मी। बोस्टन से शुरू हुई यह परंपरा हीथ्रो होते हुए दुनियाभर में फैली। भारत में दो हजार के बाद यह सुविधा बड़े एयरपोर्ट पर आई।
News In Short
- यह एक न्यूट्रल जगह है जहां सभी धर्मों के लोग प्रार्थना और ध्यान कर सकते हैं।
- इसकी शुरुआत 1960-70 के दशक में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुविधा के लिए हुई।
- बोस्टन और हीथ्रो एयरपोर्ट से आधुनिक प्रेयर रूम का वैश्विक मॉडल सामने आया है।
- भारत में दो हजार के बाद पीपीपी मॉडल के तहत बड़े हवाई अड्डों पर यह सुविधा शुरू हुई।
- चांगी और दुबई जैसे एयरपोर्ट आज मल्टी-फेथ रूम के बेहतरीन ग्लोबल उदाहरण हैं।
News In Detail
शुरुआत कब और क्यों हुई?
लंबी लेओवर यानी एक फ्लाइट से दूसरी फ्लाइट के बीच घंटों का इंतजार आम बात थी। इस दौरान यात्रियों की धार्मिक जरूरतें पूरी करने का कोई इंतजाम नहीं था। तब एयरपोर्ट प्रशासन को लगा कि एक ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां सब जा सकें।
यहीं से मल्टी-फेथ प्रेयर रूम की अवधारणा पैदा हुई। यह विचार सबसे पहले पश्चिमी देशों में उभरा, जहां धार्मिक विविधता पहले से दिखने लगी थी।
पहला एयरपोर्ट चैपल: बोस्टन लोगन
आधुनिक मल्टी-फेथ रूम का जन्म: हीथ्रो
दुनियाभर में कैसे फैला?
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Dubai International Airport) पर कई मस्जिदें और नमाज रूम हैं। सिंगापुर का चांगी एयरपोर्ट (Changi Airport) मल्टी-फेथ प्रेयर रूम का बेहतरीन आधुनिक मॉडल माना जाता है। दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इस सूची में शामिल है।
भारत में कब आई यह सुविधा?
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बढ़ती संख्या और वैश्विक मानकों को अपनाने की जरूरत ने यह बदलाव लाया। आज भारत के बड़े शहरों के हवाई अड्डों पर यह सुविधा सामान्य हो चुकी है।
FAQ
- एयरपोर्ट पर प्रेयर रूम की शुरुआत कहां से हुई?
एयरपोर्ट पर धार्मिक स्थान का पहला उदाहरण अमेरिका के बोस्टन लोगन इंटरनेशनल एयरपोर्ट में 1950 के दशक में बना क्रिश्चियन चैपल था। लेकिन आधुनिक मल्टी-फेथ प्रेयर रूम का कॉन्सेप्ट यूके के हीथ्रो एयरपोर्ट से 1960-70 के दशक में शुरू हुआ। हीथ्रो में सभी धर्मों के यात्रियों के लिए एक साझा प्रार्थना स्थान बनाया गया, जो दुनियाभर के लिए मॉडल बना। - मल्टी-फेथ प्रेयर रूम और किसी एक धर्म के पूजा स्थल में क्या फर्क है?
मल्टी-फेथ प्रेयर रूम किसी एक धर्म की जगह नहीं होती। इसका डिजाइन तटस्थ रखा जाता है ताकि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख या किसी भी आस्था के व्यक्ति वहां सहज महसूस कर सकें। जबकि किसी एक धर्म का पूजा स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद या चर्च उस धर्म के प्रतीकों और परंपराओं के अनुसार बना होता है। एयरपोर्ट पर मल्टी-फेथ स्पेस का मकसद सबको साझा जगह देना है। - भारत में किन एयरपोर्ट पर प्रेयर रूम की सुविधा है?
भारत में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु के बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर प्रेयर और मेडिटेशन रूम उपलब्ध हैं। चेन्नई एयरपोर्ट के इंटरनेशनल टर्मिनल में भी प्रेयर रूम है। हालांकि एएआई के मुताबिक इसके लिए कोई एक मानकीकृत नीति नहीं है और यह सुविधा हर छोटे एयरपोर्ट पर नहीं मिलती
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