सरपंच से राष्ट्रपति पद तक 284 बार चुनाव लड़ने वाले धरती पकड़ का निधन
समझें क्या है पूरा मामला...
- 284 बार चुनाव लड़े, कभी नहीं जीते 'धरती पकड़'।
- भागलपुर के मशहूर समाजसेवी नागरमल बाजोरिया का निधन।
- इंदिरा गांधी से प्रणब मुखर्जी तक के खिलाफ लड़े चुनाव।
- लाहौर में जन्म, आजादी से पहले आए भागलपुर।
- गधों संग करते थे प्रचार, 97 साल की उम्र में निधन।
भागलपुर के मशहूर समाजसेवी नागरमल बाजोरिया का निधन हो गया है। वे 284 बार चुनाव लड़ने के कारण 'धरती पकड़' कहलाते थे। उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक का चुनाव लड़ा। लेकिन किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं की। गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान उनका निधन हुआ।
भागलपुर के चर्चित समाजसेवी नागरमल बाजोरिया अब हमारे बीच नहीं रहे। वे अपने अनोखे चुनावी सफर के लिए पूरे इलाके में मशहूर थे। गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। एमपी द्विवेदी रोड स्थित देवी बाबू धर्मशाला के पास वे रहते थे।
कौन थे नागरमल बाजोरिया
नागरमल बाजोरिया का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। देश की आजादी से पहले ही उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था। इसके बाद भागलपुर ही उनकी कर्मभूमि बन गई। यहीं से उन्होंने अपना अनोखा चुनावी सफर शुरू किया।
ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारी रमण साह ने उनके जन्म और परिवार के भागलपुर आने की जानकारी दी। उनके अनुसार बाजोरिया का भागलपुर से गहरा नाता रहा। वे यहां के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा बन गए थे।
284 बार लड़ा चुनाव, कभी नहीं मिली जीत
नागरमल बाजोरिया ने ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा तक के चुनाव लड़े। इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी 17 बार किस्मत आजमाई। हालांकि किसी भी चुनाव में उन्हें जीत नसीब नहीं हुई।
चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार के अनुसार, वे 284 चुनाव लड़कर एक अलग रिकॉर्ड बना चुके थे। 2013 से पहले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बने थे। उन्हें इतने वोट मिले थे कि उनकी जमानत राशि वापस हो गई थी।
इंदिरा गांधी से प्रणब मुखर्जी तक के खिलाफ लड़े
वार्ड नंबर-38 के पार्षद अश्विनी जोशी मोंटी ने बताया कि बाजोरिया करीब 281 से अधिक चुनाव लड़ चुके थे। हालांकि कुछ लोगों के अनुसार यह संख्या 284 तक बताई जाती है। लगातार चुनाव लड़ने और जीत न मिलने के कारण उन्हें 'धरती पकड़' नाम मिला।
नागरमल बाजोरिया ने 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ नामांकन किया था। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से और राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से भी चुनाव लड़ चुके थे। यानी देश के बड़े नेताओं के सामने वे बार-बार मैदान में उतरे।
नगरपालिका चुनाव जीतने का था दावा
हालांकि, उनके चुनावी सफर में एक अपवाद भी बताया जाता है। 2015 की एक बातचीत में बाजोरिया ने कहा था कि करीब 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने पार्षद का पद छोड़ दिया था।
इस वजह से यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि उन्होंने जीवन में कोई चुनाव नहीं जीता। यह जानकारी उनके चुनावी रिकॉर्ड को थोड़ा अलग रूप देती है।
गधों संग करते थे चुनाव प्रचार
नागरमल बाजोरिया अपने अनोखे चुनाव प्रचार के लिए भी चर्चा में रहते थे। वे अक्सर प्रचार के दौरान गधों को साथ रखते और खुद तांगे पर चलते थे। इस अनोखे अंदाज की वजह से वे चुनाव के समय खूब सुर्खियां बटोरते थे।
2004 के लोकसभा चुनाव में सैंडिस कंपाउंड में एनडीए प्रत्याशी सुशील कुमार मोदी के समर्थन में सभा हुई थी। उसमें बाजोरिया ने भी समर्थन दिया था। बाद में वे फिर स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतर गए। उन्होंने 278 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था।
सामाजिक कार्यों में भी रहे सक्रिय
नागरमल बाजोरिया केवल चुनाव लड़ने के लिए ही नहीं जाने जाते थे। वे सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग और गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करना उनकी प्राथमिकता रही।
इसके अलावा उन्होंने चापाकल लगवाने जैसे कई सामाजिक कार्य भी किए। उन्होंने गौवध के खिलाफ भी अभियान चलाया था। भागलपुर से उनका जुड़ाव सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं था।
निधन पर जताया शोक
मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल खेतान, चेंबर अध्यक्ष शरद सलारपुरिया, पूर्व अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया और चांद झुनझुनवाला समेत कई लोगों ने शोक जताया। उन्होंने कहा कि बाजोरिया के निधन से भागलपुर ने एक अनोखी पहचान वाला व्यक्ति खो दिया।
चांद झुनझुनवाला ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर शहरवासियों के अंतिम दर्शन के लिए भागलपुर लाया जा रहा है। शाम तक पार्थिव शरीर के भागलपुर पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
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