युवाओं को कॉकरोच कहने वाले CJI सूर्यकांत को कॉन्वोकेशन में बुलाने पर भड़के छात्र
Sanjay Dhiman | Aug 09, 2026, 17:16 IST
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NALSAR हैदराबाद के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को 2026 कॉन्वोकेशन में बुलाने का विरोध किया। छात्रों ने वजह उनका पुराना कॉकरोच वाला बयान बताई। प्रशासन को पत्र लिखकर फैसला बदलने की अपील की गई। कॉन्वोकेशन की तारीख अब तक तय नहीं हुई है।
NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को कॉन्वोकेशन में बुलाने का विरोध किया है। छात्रों ने इसकी वजह उनका पुराना कॉकरोच वाला बयान बताई है। 2026 बैच के छात्रों ने प्रशासन को इस बारे में पत्र लिखा है। छात्रों ने इसे एकेडमिक फ्रीडम और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया है। कॉन्वोकेशन की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
CJI सूर्यकांत को लेकर हैदराबाद की एक बड़ी लॉ यूनिवर्सिटी में विवाद खड़ा हो गया है। NALSAR के छात्रों ने अपनी ही यूनिवर्सिटी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। मामला 2026 के कॉन्वोकेशन से जुड़ा है। छात्रों का कहना है कि CJI का पुराना बयान उन्हें ठीक नहीं लगा। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखा है।
नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR – National Academy of Legal Studies and Research) हैदराबाद की जानी-मानी लॉ यूनिवर्सिटी है। देश के टॉप लॉ स्कूलों में इसका नाम गिना जाता है। यहां के कुछ छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को कॉन्वोकेशन सेरेमनी में बुलाए जाने का विरोध किया है।
छात्रों ने इसकी वजह उनके पुराने बयानों को बताया है। उनका कहना है कि सीजेआई ने युवाओं को कथित तौर पर कॉकरोच कहा था। इसके अलावा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी उनका एक बयान चर्चा में रहा था। छात्रों ने इसे संवेदनशीलता की कमी बताया है।
आमतौर पर कॉन्वोकेशन किसी भी छात्र के लिए बड़ा दिन होता है। इसी दिन उसे डिग्री सौंपी जाती है। यही वजह है कि चीफ गेस्ट का चुनाव छात्रों के लिए मायने रखता है।
2026 बैच के छात्रों के एक ग्रुप ने वाइस-चांसलर और रजिस्ट्रार को पत्र भेजा है। यह पत्र फैकल्टी मेंबर्स को भी भेजा गया है। पत्र में छात्रों ने प्रशासन से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
पत्र में लिखा गया है कि स्टूडेंट्स CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बुलाने को लेकर अपनी चिंता साझा कर रहे हैं। छात्रों ने इसे पूरे ग्रेजुएटिंग बैच की राय बताया है। उनका कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति की शिकायत नहीं है।
पत्र में छात्रों ने साफ लिखा है कि सीजेआई ने युवाओं को कॉकरोच कहा था। इसके साथ ही पुलिस बर्बरता के वीडियो न देखने वाला बयान भी उठाया गया है। छात्रों ने इसे असंवेदनशील रवैया बताया है।
पत्र के मुताबिक ऐसे बयान देने वाले शख्स से डिग्री लेना उन्हें सही नहीं लगता। छात्रों का कहना है कि डिग्री का इमोशनल और एकेडमिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। इसलिए यह फैसला उनके लिए अहम है।
हालांकि बाद में CJI सूर्यकांत ने इस पर सफाई भी दी थी। उनका कहना था कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया। यह सफाई पहले भी सार्वजनिक तौर पर आई थी। इसके बावजूद छात्रों की नाराजगी कम नहीं हुई है।
छात्रों ने पत्र में एकेडमिक फ्रीडम का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सीजेआई को बुलाना कॉन्स्टिट्यूशनल अकाउंटेबिलिटी के खिलाफ जाता है। उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी के मूल्यों से जोड़कर देखा है।
छात्रों का मानना है कि एक एकेडमिक संस्थान को अपने फैसलों में जवाबदेही दिखानी चाहिए। उनके मुताबिक चीफ गेस्ट का चुनाव सिर्फ पद देखकर नहीं होना चाहिए। संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।
पत्र के आखिर में छात्रों ने अपनी अपील दोहराई है। उन्होंने लिखा है कि यह चिंता पूरे बैच की साझा राय है। किसी एक ग्रुप की व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस पर गंभीरता से विचार करेगा।
शुरुआत में यह इवेंट अगस्त महीने में होने की बात कही गई थी। लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई तारीख तय नहीं की है। इवेंट को लेकर तैयारियां भी शुरू नहीं हुई हैं।
जूनियर बैच से वॉलंटियर्स जुटाने का काम भी अटका हुआ है। इस बीच कुछ क्लास की परीक्षाएं भी चल रही हैं। इस वजह से इस महीने कार्यक्रम होना मुश्किल माना जा रहा है।
तारीख तय न होने से छात्रों में असमंजस भी बना हुआ है। कई छात्र चाहते हैं कि विवाद सुलझने के बाद ही आगे की योजना बने। कुछ का मानना है कि देरी होने से मामला और बड़ा हो सकता है।
फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से इस विरोध पत्र पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों की मांग है कि प्रशासन उनकी चिंता को गंभीरता से ले। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। देश की बाकी लॉ यूनिवर्सिटीज की भी इस पर नजर बनी हुई है।
छात्रों का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ यह कदम नहीं उठाया। उनका मकसद सिर्फ अपनी चिंता प्रशासन तक पहुंचाना है। कई छात्रों ने इस मुद्दे पर आपस में भी चर्चा की है।
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CJI सूर्यकांत को लेकर हैदराबाद की एक बड़ी लॉ यूनिवर्सिटी में विवाद खड़ा हो गया है। NALSAR के छात्रों ने अपनी ही यूनिवर्सिटी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। मामला 2026 के कॉन्वोकेशन से जुड़ा है। छात्रों का कहना है कि CJI का पुराना बयान उन्हें ठीक नहीं लगा। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखा है।
छात्रों ने क्यों जताई नाराजगी
छात्रों ने इसकी वजह उनके पुराने बयानों को बताया है। उनका कहना है कि सीजेआई ने युवाओं को कथित तौर पर कॉकरोच कहा था। इसके अलावा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी उनका एक बयान चर्चा में रहा था। छात्रों ने इसे संवेदनशीलता की कमी बताया है।
आमतौर पर कॉन्वोकेशन किसी भी छात्र के लिए बड़ा दिन होता है। इसी दिन उसे डिग्री सौंपी जाती है। यही वजह है कि चीफ गेस्ट का चुनाव छात्रों के लिए मायने रखता है।
प्रशासन को लिखा पत्र
पत्र में लिखा गया है कि स्टूडेंट्स CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बुलाने को लेकर अपनी चिंता साझा कर रहे हैं। छात्रों ने इसे पूरे ग्रेजुएटिंग बैच की राय बताया है। उनका कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति की शिकायत नहीं है।
कॉकरोच वाला बयान फिर चर्चा में
पत्र के मुताबिक ऐसे बयान देने वाले शख्स से डिग्री लेना उन्हें सही नहीं लगता। छात्रों का कहना है कि डिग्री का इमोशनल और एकेडमिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। इसलिए यह फैसला उनके लिए अहम है।
हालांकि बाद में CJI सूर्यकांत ने इस पर सफाई भी दी थी। उनका कहना था कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया। यह सफाई पहले भी सार्वजनिक तौर पर आई थी। इसके बावजूद छात्रों की नाराजगी कम नहीं हुई है।
एकेडमिक फ्रीडम का हवाला
छात्रों का मानना है कि एक एकेडमिक संस्थान को अपने फैसलों में जवाबदेही दिखानी चाहिए। उनके मुताबिक चीफ गेस्ट का चुनाव सिर्फ पद देखकर नहीं होना चाहिए। संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।
पत्र के आखिर में छात्रों ने अपनी अपील दोहराई है। उन्होंने लिखा है कि यह चिंता पूरे बैच की साझा राय है। किसी एक ग्रुप की व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस पर गंभीरता से विचार करेगा।
कब होगा कॉन्वोकेशन, अब भी साफ नहीं
जूनियर बैच से वॉलंटियर्स जुटाने का काम भी अटका हुआ है। इस बीच कुछ क्लास की परीक्षाएं भी चल रही हैं। इस वजह से इस महीने कार्यक्रम होना मुश्किल माना जा रहा है।
तारीख तय न होने से छात्रों में असमंजस भी बना हुआ है। कई छात्र चाहते हैं कि विवाद सुलझने के बाद ही आगे की योजना बने। कुछ का मानना है कि देरी होने से मामला और बड़ा हो सकता है।
फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से इस विरोध पत्र पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों की मांग है कि प्रशासन उनकी चिंता को गंभीरता से ले। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। देश की बाकी लॉ यूनिवर्सिटीज की भी इस पर नजर बनी हुई है।
छात्रों का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ यह कदम नहीं उठाया। उनका मकसद सिर्फ अपनी चिंता प्रशासन तक पहुंचाना है। कई छात्रों ने इस मुद्दे पर आपस में भी चर्चा की है।
यह खबरें भी पढ़ें...
CJI सूर्यकांत बोले- न्याय के लिए लोगों को उनकी भाषा में आत्मसम्मान के साथ सुनना जरूरी
CJI थे चीफ गेस्ट, अचानक टला टाटा इंस्टीट्यूट का दीक्षांत समारोह, जानें वजह
CJP आंदोलन पर बनेगी द एक्सीडेंटल कॉकरोच पार्टी फिल्म, इस दिन होगी रिलीज
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