नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष बनेंगे अशोक लाहिड़ी, पूर्णकालिक सदस्य में गोबर्धन दास समेत 5 की नियुक्ती
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच नीति आयोग (NITI Aayog) में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट सचिवालय ने आयोग के नए नेतृत्व को अपनी मंजूरी दे दी है।
इस बदलाव के तहत अनुभवी अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। वहीं, गोबर्धन दास समेत पांच विशेषज्ञों को पूर्णकालिक सदस्यों के रूप में नियुक्त किया गया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
डॉ. अशोक लाहिड़ी संभालेंगे उपाध्यक्ष का पद
नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी भारत के सबसे प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों में से एक माने जाते हैं। चार दशकों से अधिक लंबे करियर वाले डॉ. लाहिड़ी ने वित्त और नीति निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वह भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहने के साथ-साथ वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
अशोक कुमार लाहिड़ी की विशेषज्ञता का लाभ केवल भारत तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक (World Bank) और आईएमएफ (IMF) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। कोलकाता के रहने वाले और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के छात्र रहे डॉ. लाहिड़ी से उम्मीद है कि वे देश की प्रगति के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करेंगे।
पांच नए पूर्णकालिक सदस्यों की टीम
सरकार ने नीति आयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के पांच दिग्गजों को बतौर पूर्णकालिक सदस्य शामिल किया है। इनमें पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, प्रो. के. वी. राजू, प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास के नाम शामिल हैं।
इन नियुक्तियों में प्रशासनिक अनुभव (Administrative Experience) और वैज्ञानिक शोध (Scientific Research) का बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है, जो अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।\
जानें कौन हैं डॉ. गोबर्धन दास?
आयोग के नए सदस्यों में डॉ. गोबर्धन दास का नाम विशेष चर्चा में है। वर्तमान में आईआईएसईआर (IISER) भोपाल के निदेशक के रूप में कार्यरत डॉ. दास एक प्रख्यात आणविक विज्ञान (Molecular Science) के प्रोफेसर हैं।
तीन दशकों के करियर में उन्होंने प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) और विशेष रूप से तपेदिक (Tuberculosis) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है। अमेरिका के येल विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में शोध का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए भारत लौटने का फैसला किया।
शरणार्थी शिविर से नीति आयोग तक का सफर
डॉ. दास की उपलब्धि केवल उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका व्यक्तिगत जीवन राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है। बांग्लादेश से आए एक हिंदू दलित शरणार्थी परिवार में जन्मे डॉ. दास ने अकल्पनीय गरीबी का सामना किया है।
उनके पिता एक गरीब किसान थे और उन्होंने स्ट्रीट लाइट (Street light) के नीचे बैठकर अपनी पढ़ाई पूरी की। दंगों के दौरान अपने परिवार के 17 सदस्यों को खोने का गहरा दुख सहने के बावजूद, वे कभी टूटे नहीं। विश्व भारती विश्वविद्यालय और जेएनयू (JNU) से होते हुए नीति आयोग तक का उनका यह सफर आज पूरे बंगाल और देश के लिए प्रेरणा की किरण बन चुका है।
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