रायपुर में नीति आयोग की कार्यशाला: शिक्षा और कौशल विकास में मेंटरशिप मॉडल पर जोर

रायपुर में आयोजित नीति आयोग की राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला के दूसरे और तीसरे सत्र में उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप की अहम भूमिका पर चर्चा हुई।

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Harrison Masih
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नीति आयोग की ओर से राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दूसरे और तीसरे सत्र में उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में "मेंटरशिप" की अहमियत पर गहराई से चर्चा हुई।

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उच्च शिक्षा में मेंटरशिप की जरूरत

दूसरे सत्र में यह विचार रखा गया कि उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और सबके लिए समान अवसरों वाला बनाने में मेंटरशिप बड़ी भूमिका निभा सकती है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. संजय कुमार और आईआईएम लखनऊ की प्रो. पुष्पेंद्र प्रियदर्शी ने सत्र का संचालन किया।

इसमें बताया गया कि कमजोर वर्गों और पिछड़े इलाकों के छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आत्मविश्वास देने के लिए मजबूत मेंटरशिप ढांचा तैयार करना जरूरी है। यूजीसी और एआईसीटीई के अधिकारियों ने बताया कि तकनीक की मदद से मेंटरशिप को और प्रभावी बनाया जा सकता है। केरल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उदाहरण साझा करते हुए कहा गया कि भारत में भी ऐसे मॉडल अपनाकर शिक्षा में समान अवसर दिए जा सकते हैं।

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कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप

तीसरे सत्र में कौशल विकास और उद्यमिता (Entrepreneurship) के क्षेत्र में मेंटरशिप की भूमिका पर चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन एनआईईएसबीयूडी की महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा और यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जुड़नी चाहिए। ओडिशा और तेलंगाना राज्यों के उदाहरण रखते हुए बताया गया कि वहां स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाए गए मॉडल से युवाओं को रोजगार और व्यवसाय दोनों के मौके मिले हैं।

उद्यमिता पर जोर देते हुए कहा गया कि यदि युवाओं को सही समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिल जाए तो वे नवाचार (Innovation) और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

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रायपुर में नीति आयोग की कार्यशाला के 5 मुख्य बिंदु 

  1. मेंटरशिप पर जोर – कार्यशाला में उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप की अहमियत पर चर्चा हुई।
  2. उच्च शिक्षा में समावेशिता – विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कमजोर वर्गों के छात्रों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए मेंटरशिप मॉडल तैयार किया जाए।

  3. कौशल विकास और रोजगार – मेंटरशिप से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिल सकते हैं।

  4. राज्य और अंतरराष्ट्रीय मॉडल – केरल, तेलंगाना और ओडिशा के सफल मेंटरशिप मॉडल और अंतरराष्ट्रीय उदाहरण साझा किए गए।

  5. राष्ट्रीय मेंटरशिप ढांचा – नीति आयोग ने सभी सुझावों के आधार पर भारत में एक मजबूत राष्ट्रीय मेंटरशिप फ्रेमवर्क बनाने की योजना बनाई।

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नीति आयोग की पहल

विशेषज्ञों की राय के आधार पर नीति आयोग ने कहा कि अब भारत में एक मजबूत राष्ट्रीय मेंटरशिप ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने समापन भाषण में कहा कि चाहे उच्च शिक्षा हो या कौशल विकास, हर स्तर पर मेंटरशिप की जरूरत है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इस कार्यशाला का मुख्य संदेश यही रहा कि मेंटर्शिप (मार्गदर्शन) शिक्षा और कौशल विकास का सबसे मजबूत आधार है। यह छात्रों और युवाओं को आत्मविश्वास, अवसर और प्रेरणा देता है और उनके करियर को सही दिशा दिखाता है।Niti Aayog workshop Raipur

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