5 महीने बाद ओलंपिक, पहलवान कन्फ्यूज, कुश्ती की दो अथॉरिटी, कौन भेजेगा ओलिंपिक तय नहीं

इससे पहले कोटा लाने वाला ही ओलंपिक में जाता था। मैं बहुत खुश थी, ओलंपिक के लिए मुझे पहला कोटा मिला था। अब बस मेडल के लिए तैयारी करनी है। एशियन चैंपियनशिप और ओलिंपिक के ट्रायल होने हैं।

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Pooja Kumari
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BHOPAL. 26 जुलाई से ओलंपिक शुरू होना है। लेकिन अभी भी बहुत से पहलवान कन्फ्यूज हैं। बता दें कि 19 साल की अंतिम पंघाल कोटा हासिल करने के बाद भी चिंतित हैं कि वे ओलंपिक में खेल पाएंगी या नहीं। वर्तमान में अंतिम हिसार में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कॉम्प्लेक्स में प्रैक्टिस कर रही हैं। उनका कहना है कि मैं तो केवल मेहनत कर सकती हूं, ताकि अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं देश के लिए मेडल लाऊंगी। 

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कोटा लाने के बाद भी देना होगा ट्रायल 

इससे पहले कोटा लाने वाला ही ओलंपिक में जाता था। मैं बहुत खुश थी, ओलंपिक के लिए मुझे पहला कोटा मिला था। अब बस मेडल के लिए तैयारी करनी है। उन्होंने बताया कि उन्हें कोटा सितंबर में मिला, नवंबर में कुश्ती का मैनेजमेंट देख रही एडहॉक कमेटी ने कहा था कि ओलंपिक के लिए मुझे भी ट्रायल देना होगा। एशियन चैंपियनशिप और ओलिंपिक के ट्रायल होने हैं, लेकिन हमें पता ही नहीं है कि ट्रायल एडहॉक कमेटी कराएगी या रेसलिंग फेडरेशन। अभी तक कुछ भी साफ नहीं है।’

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पहलवानों की चिंता 

बता दें कि अंतिम अकेली नहीं हैं, उनकी तरह ओलंपिक खेलने के दावेदार दूसरे पहलवान भी इसी कन्फ्यूजन में हैं। ये कन्फ्यूजन रेसलिंग फेडरेशन और एडहॉक कमेटी के बीच टकराव से हुआ है। 23 अगस्त, 2023 को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने चुनाव न होने की वजह से रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को बैन कर दिया था। ये बैन 13 फरवरी, 2024 को हटा। दिसंबर में सरकार ने रेसलिंग फेडरेशन को सस्पेंड कर एडहॉक कमेटी बनाई थी। अब फेडरेशन और एडहॉक कमेटी दोनों ट्रायल करवा रहे हैं। दोनों का दावा है कि उनके ट्रायल में जीतने वाले पहलवान ही आगे की चैंपियनशिप में खेल पाएंगे। पहलवानों का कन्फ्यूजन इसी वजह से है कि आखिर किसकी बात मानें। किसके टूर्नामेंट में खेलकर वे एशियन चैंपियनशिप या ओलिंपिक में जा सकेंगे।

एडहॉक कमेटी के टकराव का असर पड़ रहा है पहलवानों पर 

अंतिम पंघाल : फेडरेशन बहाल हो जाए, तो हम खेल पर ध्यान दे पाएं। अंतिम पंघाल अभी हिसार में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कॉम्प्लेक्स में प्रैक्टिस कर रही हैं। पूरा ध्यान सिर्फ ओलंपिक पर है। सुबह से शाम तक ट्रेनिंग चलती है। फिक्र बस इस बात की है कि कोटा लाने के बावजूद उन्हें ट्रायल देना पड़ सकता है। रेसलिंग फेडरेशन और एडहॉक कमेटी के टकराव पर अंतिम कहती हैं, ‘इससे पहलवानों का बहुत नुकसान हो रहा है। इसका असर हमारी परफॉर्मेंस पर भी पड़ रहा है। 

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जॉन्टी भाटी : नेशनल में गोल्ड जीता, लेकिन जीत मान्य होगी, ये नहीं पता

जॉन्टी भाटी हैवीवेट कैटेगरी के पहलवान हैं। 86 किलो वेट कैटेगरी में कुश्ती लड़ते हैं। जॉन्टी के कमरे के बाहर एक लाइन लिखी है, मेरी नजर ओलंपिक गोल्ड मेडल पर टिकी है। इसी लाइन को पढ़कर वे रोज प्रैक्टिस करते हैं। जॉन्टी ने पुणे में 29 से 31 जनवरी तक हुए नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता है। सस्पेंड होने के बावजूद रेसलिंग फेडरेशन ने ये टूर्नामेंट कराया था। जीत की खुशी मनाने की बजाय जॉन्टी परेशान हैं। कहते हैं, ‘मैं ये सोचकर परेशान हूं कि मेरी इस जीत को रिकॉर्ड में लिखा भी जाएगा या नहीं। जॉन्टी को इसी साल जनवरी में एक झटका लग चुका है। क्रोएशिया में हुए जगरेब ओपन के लिए उनका नाम स्टैंडबाय पर था। 5 वेट कैटेगरी में पहलवानों ने नाम वापस ले लिए। अपनी वेट कैटेगरी में जॉन्टी को एंट्री मिल जाती, लेकिन एडहॉक कमेटी उनका नाम नहीं भेज पाई। इस वजह से पांचों वेट कैटेगरी में भारत का कोई पहलवान नहीं उतरा। जॉन्टी कहते हैं, ‘मेरे लिए वो बहुत बड़ी चीज थी। साल भर से सब ठप था। अगर क्रोएशिया जाता, बड़े पहलवानों से मुकाबला करता, तो अपनी प्रैक्टिस भी समझ आती। ओलंपिक या एशियन चैंपियनशिप से पहले अच्छी तैयारी हो जाती।’

ऋतिका हुडा : एक साल में सिर्फ एक नेशनल हुआ

ऋतिका हुडा अंडर-23 कैटेगरी में वर्ल्ड चैंपियन हैं। नेवी की टीम में हैं, इसलिए उन्होंने एडहॉक कमेटी के नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। ये टूर्नामेंट 2 से 5 फरवरी तक जयपुर में हुआ था। ऋतिका ने इसमें गोल्ड जीता था, लेकिन अनिश्चितता इतनी है कि वे आगे का सोचकर परेशान हैं। ऋतिका बताती हैं, ‘टूर्नामेंट न होने से पहलवान मेंटल प्रेशर महसूस कर रहे हैं। ये एडहॉक कमेटी और फेडरेशन के टकराव से और बढ़ गया है। किसी भी तरह फेडरेशन बहाल हो और सब पटरी पर आए। एक साल में टूर्नामेंट के नाम पर सिर्फ एक नेशनल हुआ है। कोई कैंप नहीं लगा। ऐसे में एकेडमी में प्रैक्टिस के बाद उन्हें सीधे ट्रायल देते थे।’ रेसलिंग फेडरेशन ने कहा था कि वो पुणे में नेशनल खेलने वाली टीम को ही मान्यता देगा। ऐसे में अगर आप फेडरेशन की तरफ से नहीं खेल पाईं तो क्या होगा? ऋतिका जवाब देती हैं, ‘अब मैं क्या बोलूं, किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा। मैं चाहती हूं कि ये टकराव खत्म हो। सब फेडरेशन के बैनर के नीचे ही खेलें।’

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रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और एडहॉक कमेटी के बीच टकराव

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, यानी WFI पर प्रतिबंध के बाद इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन ने WFI का काम देखने के लिए एडहॉक कमेटी बनाई थी। दोनों ने ही अपने नेशनल करा लिए हैं। दो अथॉरिटी होने से पहलवान भी बंट गए हैं। हालांकि रेसलिंग की इंटरनेशनल गवर्निंग बॉडी यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने शर्तों के साथ फेडरेशन से बैन हटा दिया है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने शर्त रखी है, कि WFI के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रोटेस्ट करने वाले तीनों पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, ये तीनों पहलवान यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के फैसले से खुश नहीं हैं। उन्होंने लेटर लिखकर फैसले की आलोचना की है। बैन हटने से एक बात तय है कि रेसलिंग फेडरेशन कुश्ती को लेकर आगे कोई भी फैसला ले सकेगा। उसकी भेजी टीम को ही इंटरनेशनल चैंपियन में एंट्री मिलेगी। एडहॉक कमेटी ने इस पर कहा कि वो सिर्फ इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन की सुनेगी।

21 दिसंबर, 2023 को संजय सिंह बने प्रेसिडेंट 

जनवरी, 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक ने बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया था। इसी दौरान बृजभूषण शरण सिंह का कार्यकाल खत्म हो गया। नई एग्जीक्यूटिव कमेटी के लिए 45 दिन में चुनाव कराना था, लेकिन प्रदर्शन के बाद बने माहौल से चुनाव नहीं हो पाए। 24 अगस्त, 2023 को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग, यानी UWW ने रेसलिंग फेडरेशन पर बैन लगा दिया। 6 महीने बाद फेडरेशन के चुनाव हुए और 21 दिसंबर, 2023 को संजय सिंह इसके प्रेसिडेंट बने।

साक्षी मलिक ने किया संन्यास का ऐलान 

बता दें कि संजय सिंह पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से सांसद बृजभूषण सिंह के करीबी हैं। इसलिए पहलवानों ने फिर से प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। साक्षी मलिक ने संन्यास का ऐलान कर दिया। इसी बीच नई कमेटी ने अंडर-15 और अंडर-20 के नेशनल्स की घोषणा कर दी। इसके बाद खेल मंत्रालय ने 24 दिसंबर को पैनल को सस्पेंड कर दिया। खेल मंत्रालय ने कहा कि नए पैनल ने WFI के संविधान का पालन नहीं किया है। फेडरेशन को बैन करने के बाद खेल मंत्रालय ने WFI की सारी जिम्मेदारी इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी को दे दी थी। बैन के बाद WFI के सारे काम एडहॉक कमेटी देख रही थी।

WFI को ग्रांट देता है खेल मंत्रालय 

WFI को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से मान्यता मिली है। WFI के नए पैनल और राज्यों के फेडरेशन का विरोध इसी बात पर है कि जब चुनाव सही तरीके से हुए हैं, तो खेल मंत्रालय उन्हें मान्यता क्यों नहीं दे रहा है। फेडरेशन का चुनाव कराने की जिम्मेदारी इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी की होती है। चुनाव के बाद नए पैनल को जीत का सर्टिफिकेट तो मिल गया, लेकिन कमेटी ने पैनल को अब तक नोटिफाई नहीं किया है। खेल मंत्रालय ही WFI को ग्रांट देता है। अगर उसने WFI को बहाल नहीं किया, तो फंड्स की दिक्कत हो सकती है। सरकारी मदद न मिलने से पहलवानों की तैयारी, कैंप और विदेशों में उनके खर्च उठाना फेडरेशन के लिए मुश्किल हो सकता है।

एक साल में एक भी नेशनल टूर्नामेंट नहीं

एक साल में भारतीय पहलवानों के लिए किसी भी लेवल का एक भी नेशनल टूर्नामेंट नहीं हुआ था। पहलवानों ने या तो सीधे ट्रायल दिया या विदेश में टूर्नामेंट खेलने गए। एडहॉक कमेटी ने तीन बार नेशनल की तारीखें घोषित कीं, लेकिन फिर स्थगित कर दिया। 29 से 31 जनवरी तक रेसलिंग फेडरेशन ने पुणे में नेशनल कराया। इसमें राज्यों की फेडरेशन ने अपनी टीमें भेजीं। दूसरा सीनियर नेशनल एडहॉक कमेटी ने 2 से 5 फरवरी तक कराया। रेलवे की मदद से कराए गए इस नेशनल में सरकारी संस्थाओं की टीमें गईं, जबकि नेशनल टूर्नामेंट में राज्यों की फेडरेशन अपनी टीम भेजती हैं। राज्यों के फेडरेशन ने WFI के नेशनल में भी टीम भेजी। सिर्फ पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के दो में से एक फेडरेशन ने एडहॉक कमेटी के नेशनल में टीम भेजी। कुछ राज्यों ने पुणे में ए टीम और जयपुर में बी टीम भेजी। फेडरेशन का कहना था कि नेशनल कराने का अधिकार सिर्फ उसे है, इसलिए उसके टूर्नामेंट से ही पहलवान आगे ओलंपिक या इंटरनेशनल चैंपियनशिप में जाएंगे। वहीं एडहॉक कमेटी का कहना था कि खेल मंत्रालय ने कमेटी को मान्यता दी है, इसलिए जयपुर में नेशनल खेलने वाले पहलवान ही आगे के टूर्नामेंट खेल पाएंगे।

हरियाणा में कुश्ती के दो फेडरेशन

हरियाणा में कुश्ती के दो फेडरेशन हैं। इनमें से एक ने जयपुर, दूसरे ने पुणे टीम भेजी। जयपुर टीम भेजने वाले फेडरेशन के अध्यक्ष रोहतास नांदल कहते हैं, ‘हमने पहलवानों का भला सोचते हुए टीम भेजी थी, जिस टूर्नामेंट को सरकारी मान्यता है, पहलवान वहां जाएंगे। वहां के सर्टिफिकेट से उन्हें नौकरी मिलने में भी मदद मिलेगी।’ ‘WFI के नेशनल कराए जाने से पहलवान कन्फ्यूज हुए हैं। वे पहलवानों का इतना ही भला चाहते थे, तो एडहॉक कमेटी की मदद करते। खेल मंत्रालय से भी बातचीत करते रहना था। सस्पेंशन हटने पर सारे पहलवान फेडरेशन के बैनर तले ही खेलते।’वहीं, दूसरी फेडरेशन के सेक्रेटरी राकेश सिंह कहते हैं कि हमने जिस पैनल को जिताया है, उसे कैसे खारिज किया जा सकता है। मंत्रालय का फंड ही इकलौता कारण था, नहीं तो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग कब का हमें मान्यता दे चुका होता।

9 फरवरी से लगाया कैंप

जयपुर में सीनियर नेशनल कराने के बाद एडहॉक कमेटी ने 9 फरवरी से पहली बार कैंप लगाया है। पटियाला में लगे इस कैंप में जयपुर नेशनल में मेडल जीतने वाले पहलवान शामिल हो सकते हैं। हालांकि पुणे नेशनल में खेलने वाले पहलवानों को इसमें शामिल होने का मौका नहीं मिला, क्योंकि खेल मंत्रालय उन्हें मान्यता नहीं देता। यही कारण है कि पुणे में गोल्ड जीतने वाले जॉन्टी भाटी दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़े में प्रैक्टिस कर रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर हमें मौका मिलता तो बेहतर होता। कैंप में ट्रेनिंग के लिए अच्छे कोच मिलते। देश के बड़े पहलवानों से मुकाबला होता। अच्छी डाइट मिलती।’ जयपुर नेशनल की गोल्ड मेडलिस्ट ऋतिका जानबूझकर इस कैंप में नहीं गई हैं। वे प्राइवेट कोच की मदद से ट्रेनिंग कर रही हैं। वे कहती हैं कि चीजें इतनी बिगड़ी हुई हैं कि मुझे कैंप के बजाय अपने कोच पर ज्यादा भरोसा है। वे शुरुआत से मुझे ट्रेनिंग दे रहे हैं।’

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