क्यों वायरल हो रहा एक पटवारी का इस्तीफा, खबर पढ़कर आप भी सहमत हो जाएंगे
Sourabh Bhatnagar | Mar 10, 2025, 13:08 IST
thesootr
सोशल मीडिया पर एक पटवारी का इस्तीफा वायरल हो रहा है। अब ऐसा भी क्या है, जो एक पटवारी इस्तीफा दे और खबर बन जाए, तो आपको बता दें कि पटवारी के त्यागपत्र ने “सिस्टम” को हिला दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…
राजस्थान के उदयपुर जिला कलेक्टर कार्यालय में जिला रिसोर्स पर्सन (DILRMP) के पद पर कार्यरत वरिष्ठ पटवारी हेमंत उपाध्याय का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में उन्होंने सरकारी सिस्टम की खामियों और प्रशासनिक संस्कृति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
![thesootr]()
अपने त्यागपत्र में हेमंत उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने 12 वर्षों तक पूरी निष्ठा और मेहनत से काम किया, लेकिन सरकारी सेवा में 'जी हजूरी' को मेहनत और ईमानदारी से ज्यादा महत्व दिया जाता है। उन्होंने लिखा, मैं ईमानदारी और मेहनत से काम करता हूं, लेकिन हर बात में 'यस सर' नहीं कर सकता।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि, "मुझे यह सेवा अपने योग्य नहीं लगती। भले ही यह मेरा निजी मत हो, लेकिन मैं सरकार और प्रशासन को इस योग्य नहीं पाता कि मैं इनके साथ काम करूं।"
हालांकि, उपाध्याय का इस्तीफा मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने भावावेश में आकर इस्तीफा दिया था और अब वापस ले लिया है। सूत्रों के मुताबिक, उपाध्याय को ‘वर्क फ्रॉम होम’ या आत्मचिंतन के लिए समय दिया जा सकता है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हेमंत उपाध्याय का इस्तीफा सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह सरकारी सिस्टम में निष्ठावान कर्मचारियों की स्थिति को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन में मेहनत करने वालों को उचित सम्मान और अवसर मिलते हैं या फिर सिर्फ 'यस सर' कहने वालों को ही आगे बढ़ने का मौका मिलता है?
क्या लिखा है इस्तीफे में…
thesootr
अपने त्यागपत्र में हेमंत उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने 12 वर्षों तक पूरी निष्ठा और मेहनत से काम किया, लेकिन सरकारी सेवा में 'जी हजूरी' को मेहनत और ईमानदारी से ज्यादा महत्व दिया जाता है। उन्होंने लिखा, मैं ईमानदारी और मेहनत से काम करता हूं, लेकिन हर बात में 'यस सर' नहीं कर सकता।
खबर यह भी...
"सत्य बोलने से अधिकारी हिचकिचाते हैं"
उपाध्याय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने पूर्व में ईस्ट अफ्रीका में 5 वर्षों तक कार्य किया था, जहां की कार्य संस्कृति में कर्मठता और निष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। लेकिन भारत में सरकारी सेवा में प्रवेश के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहां सत्य बोलने वाले अधिकारियों को राज्य स्तर पर हतोत्साहित किया जाता है।
"सरकार और प्रशासन के साथ काम करने योग्य नहीं"
क्या इस्तीफा दबाव में वापस लिया गया?
प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा सवाल
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
मुख्य निर्वाचन आयुक्त का छत्तीसगढ़ दौरा अचानक स्थगित, वजह पर सस्पेंस, क्या विरोध के माहौल ने बढ़ाई चिंता?
By VINAY VERMA
रामदेव-बृजभूषण विवाद खत्म, पतंजलि ने वापस लिया 50 करोड़ का मानहानि केस, जानें पूरा मामला
By Sanjay Gupta
पंचायत चुनाव से पहले BAP को झटका: डूंगरपुर के 39 कार्यकर्ता भाजपा में शामिल, मदन राठौड़ ने दिलाई सदस्यता
By Saurabh Mishra
कोटा डबल मर्डर केस में अभियुक्त की फांसी की सजा पर लगी रोक, 75 साल की उम्र तक रहना होगा जेल में
By Mukesh Sharma
विधायक अनुज शर्मा का मोबाइल नंबर हैक, परिचितों से मांगे जा रहे पैसे, बोले- किसी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें
By Umeshwari Baghel
बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय की खुली पोल, 3.57 करोड़ खर्च, लेकिन एक भी एडमीशन नहीं
By Ashish Bhardwaj
नक्सल मुक्त बस्तर के दावों के बीच कांकेर में बड़ी वारदात 3 पोकलेन मशीनें फूंकीं, लाल सलाम के पर्चे भी मिले
By Umeshwari Baghel