Rajasthan news : नकारा और भ्रष्टाचारियों को नौकरी से हटा रही सरकार, कर्मचारी संगठन कर रहे विरोध

सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा नियम के तहत ऐसे Compulsory Retirement के प्रावधान हैं। इसके तहत तीन महीने के वेतन एवं भत्तों के साथ तुरंत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाती है। हालांकि, कर्मचारी संगठन सरकार के इस फैसले के विरोध में आ गए हैं।

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Marut raj
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जयपुर. राजस्थान में भजनलाल सरकार बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करने जा रही है। प्रदेश की बीजेपी सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नकेल कसने जा रही है। सरकार ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनाकर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर भेजने की तैयारी में हैं, जिनपर भ्रष्टाचार के गंभीर केस हैं या जो परफोर्म नहीं कर पा रहे हैं। इसको लेकर मुख्य सचिव सुधांश पंत ( Chief Secretary Sudhansh Panth ) ने उच्च स्तरीय बैठक ली । इसमें उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाने के निर्देश दिए, जो अपना काम निष्पक्षता और पारदर्शिता से नहीं कर रहे हैं। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है। 

लिस्ट तैयार करने के निर्देश

सीएस ने बैठक में सख्त निर्देश दिए थे कि ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर भेज दिया जाए। मुख्य सचिव पंत के निर्देश के बाद शासन प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी प्रशासनिक विभागों और विभागध्यक्षों को लिखे पत्र में गेरा ने पंत के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि ऐसे सभी राज्य सेवा अधिकारियों/कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर निर्धारित समय सीमा में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाए।

पहले से ही बना है नियम

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 53 (1) के तहत ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने के प्रावधान पहले से ही बना रखे हैं। इस नियम के अनुसार ऐसे सरकारी अधिकारी/कर्मचारी जिन्होंने 15 साल की सेवा अथवा 50 साल की आयु जो भी पहले पूर्ण कर ली हो और अपने भ्रष्ट एवं असंतोषजनक काम से उपयोगिता खो चुके हैं, ऐसे कार्मिकों को तीन माह के नोटिस अथवा उसके स्थान पर तीन महीने के वेतन एवं भत्तों के साथ तुरंत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाए।

सरकारी कर्मचारियों को बदनाम करने का अभियान चला रही सरकार

राजस्थान के कर्मचारी संगठन इस निर्णय के विरोध में खुलकर आए गए हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मुख्य सचिव सहित राज्य सरकार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने राज्य कर्मचारियों को डराने धमकाने तथा प्रताड़ित करने और कर्मचारी, सरकारी विभागों, सरकारी विद्यालयों व चिकित्सालयों को बदनाम करने का अभियान चला रखा है।

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा का कहना है कि सरकार के मंत्री ही नहीं बल्कि सत्ताधारी दल के अनेक नेता लगातार कर्मचारियों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं।

सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की चेतावनी

महासंघ का कहना है कि सरकार अपनी कर्मचारी विरोधी नीतियों से बाज नहीं आई और कर्मचारियों के खिलाफ जारी अनुचित अभियान को नहीं रोका गया तो राज्य का कर्मचारी अपनी मान मर्यादा तथा न्याय के लिए न केवल सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएगा, बल्कि सरकार के साजिशपूर्ण कदमों की पोल खोलने के लिए आम जन के बीच भी जाएंगे।

सरकार करना चाहती है निजीकरण  

महासंघ के महामंत्री महावीर सिहाग ने बताया कि सरकार शिक्षा, चिकित्सा तथा जनसेवा की सार्वजनिक संस्थानों का निजीकरण करना चाहती है और सरकारी विभागों का आकार घटाना चाहती है। इन जन विरोधी कार्यो को अंजाम देने के लिए कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि कर्मचारी संगठित रूप से विरोध नहीं कर सके।

यदि सरकार इसमें सफल हो गई तो जन सामान्य एक तरफ इन सेवाओं से वंचित हो जाएंगे, ऊंची कीमत पर निजी क्षेत्र से यह सेवाएं खरीदनी पड़ेगी और दूसरी तरफ राज्य में लाखों पद समाप्त करके रोजगार के अवसर खत्म कर दिए जाएंगे।

 Rajasthan Compulsory Retirement | राजस्थान अनिवार्य सेवानिवृत्ति

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