5 साल में कैसे 4000 कारीगरों ने मिलकर बनाया 161 फीट ऊंचा भव्य अयोध्या राम मंदिर, जानें पूरी कहानी

राम मंदिर का निर्माण 5 सालों में 1800 करोड़ रुपए खर्च करके किया गया। 4000 श्रमिकों ने इस मंदिर को बिना लोहे और स्टील के बनाया, जो 1000 साल तक सुरक्षित रहेगा। जानिए मंदिर के आकार, निर्माण सामग्री और बाकी कामों के बारे में।

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Kaushiki
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अयोध्या का भव्य राम मंदिर 5 साल की मेहनत और 18 सौ करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है। इस मंदिर का निर्माण कार्य 4000 श्रमिकों और कारीगरों ने मिलकर किया। इसमें विभिन्न इंजीनियरों और संस्थाओं ने मदद की।

मंदिर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये आने वाली हजार सालों तक समय, मौसम और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सके। राम मंदिर का आकार अत्यधिक विशाल है। इसकी ऊंचाई 161 फीट, चौड़ाई 235 फीट और लंबाई 360 फीट है।

इसे विशेष रूप से राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के बलुआ पत्थर से निर्मित किया गया है। इस निर्माण में लोहे और स्टील का प्रयोग नहीं किया गया है ताकि इसकी उम्र बढ़ सके। इस निर्माण में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सुनिश्चित किया गया कि मंदिर का हर हिस्सा प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहे।

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मंदिर की संरचना और वास्तुकला

राम मंदिर का डिजाइन पांचवीं सदी की नागरा शैली पर आधारित है। इसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाएं शामिल हैं। इसके अलावा, मंदिर के अंदर 160 स्तंभ हैं जिनमें देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।

इसमें कुल 47 दरवाजे हैं, जिनमें से 14 दरवाजे सोने से सुसज्जित हैं। मंदिर का मुख्य हिस्सा 2.7 एकड़ में फैला हुआ है। इस परिसर में 70 एकड़ जमीन है।

मंदिर के बाहर एक बाहरी दीवार बनाई जा रही है, जो 4 किलोमीटर लंबी होगी। इस दीवार के पास एक बड़ा ऑडिटोरियम भी बनेगा। इसे 2026 तक पूरा किया जाने की उम्मीद है।

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निर्माण की चुनौतियां और समाधान

राम मंदिर के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती थी सामग्री का प्रबंधन और उसकी सही मात्रा में आपूर्ति। विशेष रूप से बंसी पहाड़पुर के बलुआ पत्थर की खुदाई और उसे सुरक्षित रूप से मंदिर तक पहुंचाना एक बड़ा कार्य था।

इसके अलावा, मंदिर की नींव में विशेष शोध और अध्ययन किए गए थे। ताकि यह 1000 साल तक टिक सके। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नींव की गहराई 14 मीटर है।

इसमें 1.32 लाख क्यूबिक मीटर रोलर-कम्पैक्टेड कंक्रीट भरी गई है। ये मंदिर की स्थिरता को बढ़ाती है। इसके ऊपर एक 6.5 मीटर ऊंची चट्टान रखी गई है, जो लगभग 24 हजार ग्रेनाइट पत्थरों से बनी है।

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बाकी बचा काम

राम मंदिर (अयोध्या में राम मंदिर निर्माण) का मुख्य निर्माण कार्य अब पूरा हो चुका है। अभी भी कुछ बाकी कामों को पूरा किया जाना है जैसे लैंडस्केपिंग और बाहरी दीवार का निर्माण। निर्माण कार्य 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद ही ये मंदिर पूरी तरह से श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

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  • राम मंदिर का निर्माण 5 सालों में 18 सौ करोड़ रुपए में हुआ।

  • 4000 से ज्यादा श्रमिकों और कारीगरों ने इसमें काम किया।

  • मंदिर में लोहे और स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया।

  • मंदिर का डिजाइन 1000 साल तक टिकाऊ बनाने के लिए किया गया है।

  • बाकी निर्माण कार्य 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

FAQ

राम मंदिर का निर्माण कब शुरू हुआ?
राम मंदिर का निर्माण 2020 में शुरू हुआ था। यह 2025 में लगभग पूरा हो चुका है।
राम मंदिर की निर्माण सामग्री में क्या विशेषताएं हैं?
राम मंदिर में लोहे और स्टील का उपयोग नहीं किया गया है, और इसे बंसी पहाड़पुर के बलुआ पत्थर से बनाया गया है।
मंदिर का अंतिम निर्माण कब तक पूरा होगा?
राम मंदिर का पूरा निर्माण 2026 तक पूरा हो जाने की संभावना है।

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