सबरीमाला सुनवाई: SC ने कहा- धर्म की आड़ में सार्वजनिक रास्ते नहीं रोके जा सकते
Jitendra Shrivastava | Apr 28, 2026, 22:43 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEWDELHI. सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें नहीं रोकी जा सकतीं। सेक्युलर काम प्रभावित हो तो सरकार दखल दे सकती है।
News In Short
- धर्म के नाम पर सड़कें ब्लॉक करना असंवैधानिक।
- सेक्युलर काम प्रभावित हो तो सरकार दखल दे सकती है।
- आर्टिकल 25 धार्मिक रीति-रिवाजों की भी रक्षा करता है।
- AIMPLB बोला- मस्जिद में महिलाओं पर रोक नहीं।
- सबरीमाला केस में 7 अप्रैल से सुनवाई जारी है।
News In Detail
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी धार्मिक गतिविधि से सेक्युलर काम बाधित होता है, तो सरकार को दखल देने का पूरा अधिकार है। यह टिप्पणी आस्था और संविधान के बीच संतुलन की बड़ी बहस छेड़ गई।
सड़कें नहीं रोक सकते धर्म के नाम पर
यह सुनवाई केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संप्रदाय को अपनी पूजा पद्धति में स्वायत्तता जरूर है, लेकिन अगर उससे कोई सेक्युलर काम (Secular Activity) प्रभावित होता है, तो राज्य सरकार दखल दे सकती है।
आर्टिकल 25 पर बड़ी बहस
संविधान का आर्टिकल 25(2)(a) राज्य को धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़ी आर्थिक, वित्तीय और राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
नागराजन ने यह भी तर्क दिया कि आर्टिकल 25 की सुरक्षा केवल धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है। इसमें पूजा से जुड़े रीति-रिवाज, समारोह और परंपराएं भी शामिल हैं।
जस्टिस नागरत्ना की अहम टिप्पणी
यह टिप्पणी धर्म और संविधान (Religion and Constitution) के बीच की सीमा रेखा को और स्पष्ट करती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह किसी संप्रदाय के आंतरिक धार्मिक मामलों पर फैसला नहीं देगा। लेकिन सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुंचाना किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं होगा।
मस्जिद और हिजाब पर दलीलें
यानी धार्मिक विश्वास हमेशा संस्थागत नियमों से ऊपर नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मोहल्ले की मस्जिद सबके लिए खुली हो, तो भी कोई वहां जाकर घंटी नहीं बजा सकता क्योंकि हर धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है।
AIMPLB और केंद्र सरकार का पक्ष
वहीं केंद्र सरकार ने महिलाओं की सबरीमाला में एंट्री के विरोध में दलीलें दीं। सरकार ने कहा कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी वर्जित है। इसलिए धार्मिक परंपराओं (Religious Traditions) का सम्मान होना चाहिए।
7 अप्रैल से जारी है सुनवाई
यह मामला आस्था, संविधान और महिला अधिकारों (Women Rights) के बीच की जटिल बहस को सामने लाता है। आने वाली सुनवाइयों में कोर्ट का रुख और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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