SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की सुप्रीम तैयारी? केंद्र-राज्यों को नोटिस जारी

Neel Tiwari | Jan 12, 2026, 22:57 IST
sc st reservation creamy layer
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा कि क्यों न SC/ST वर्ग के संपन्न लोगों को आरक्षण से बाहर किया जाए।

NEWS in short

  1. याचिका में OBC की तर्ज पर SC और ST वर्ग में भी 'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत लागू करने की मांग की गई है।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर उनका आधिकारिक रुख स्पष्ट करने को कहा है।
  3. याचिकाकर्ता का तर्क है कि SC/ST की वर्तमान आरक्षण प्रणाली का लाभ केवल कुछ प्रभावशाली परिवार ही बार-बार उठा रहे हैं।
  4. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के आलोक में है। फैसले में राज्यों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी।
  5. इस कदम का उद्देश्य आरक्षण के लाभ को 'पिरामिड के सबसे निचले स्तर' पर मौजूद व्यक्ति तक पहुंचाना है।

News in Detail

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण के क्षेत्र में एक अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में तर्क दिया गया कि SC और ST वर्ग के भीतर एक ऐसा वर्ग बना है। यह वर्ग पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ लेकर सशक्त हो चुका है।



याचिका में दावा किया गया कि "क्रीमी लेयर" के अभाव में, इन वर्गों के गरीब, अनपढ़ और हाशिए पर लोग संपन्न लोगों से पिछड़ जाते हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि उच्च पदों पर पहुंचे लोग और जिनकी आय अधिक है, उनके बच्चों को आरक्षण से बाहर रखा जाए। यह कदम आरक्षण का लाभ 'सबसे गरीब' तक पहुंचाने के लिए होगा।



सभी राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों से जवाब मांगा है। शिक्षा और राज्य सेवाओं में आरक्षण का अधिकार राज्यों के पास है। यह सुनवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में 7 जजों की बेंच ने माना कि SC/ST श्रेणियों में अधिक पिछड़ी जातियों के लिए अलग कोटा बनाया जा सकता है।



सूत्र विश्लेषण

जबलपुर हाईकोर्ट में कई बहसों के दौरान यह उदाहरण सामने आया। यदि एक व्यक्ति IAS या IPS है, तो उसके बच्चे शोषित वर्ग में नहीं आते। आरक्षित वर्ग ने इसका विरोध किया। क्रीमी लेयर का मुख्य मुद्दा यह है। यदि पिता को आरक्षण मिला है और उसकी सामाजिक स्थिति उच्च है, तो क्या बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए?



क्रीमी लेयर के मामले में आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के अलग-अलग तर्क हैं। यह सत्य है कि आरक्षण मिलने के बाद यदि किसी व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति उच्च हो जाती है, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ देना आरक्षित वर्ग के अन्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।



क्रीमी लेयर सहित आरक्षण नियमों पर विभिन्न मत हैं। पक्षों का अपना कानूनी तथ्य है। इस मामले की सुनवाई 13 जनवरी को जबलपुर हाई कोर्ट में होगी। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक विवादों में घिरे इस मामले को देखते हुए, प्रमोशन और 27% आरक्षण मामले जल्द सुलझने के आसार नहीं हैं।



निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया है। यह संकेत है कि न्यायपालिका आरक्षण के लाभों के समान वितरण की दिशा में ठोस कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें 'क्रीमी लेयर' के पक्ष में सहमत होती हैं, तो सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में बदलाव होंगे। इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।



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