ग्वालियर में FOP की ऊंची दर से थमी रियल एस्टेट की रफ्तार

ग्वालियर का नया मास्टर प्लान शहर के भविष्य के लिए लाया गया था। एफएआर ऑफ प्रीमियम (FOP) की अव्यावहारिक दरों से रियल एस्टेट सेक्टर प्रभावित हुआ है।

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Ravi Awasthi
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NEWS IN Inshort

1.2021 में बने मास्टर प्लान में FOP 0.05% प्रस्तावित थी।

2.2023 की अधिसूचना में गलती से FOP 0.50% कर दी गई।

3.तीन साल में एक भी भवन अनुज्ञा आवेदन नहीं।

4.नगर निगम को प्रीमियम व शुल्क से शून्य आय।

5.सरकार ने आश्वासन दिया,पर फैसला अब तक लंबित।

News in Detail

ग्वालियर में नया मास्टर प्लान जहां शहर के भविष्य की दिशा तय करने के लिए लाया गया था। वहीं एफएआर ऑफ प्रीमियम (FOP) की अव्यावहारिक दर ने रियल एस्टेट सेक्टर को लगभग ठप कर दिया है। नतीजा तीन साल से बहुमंजिला निर्माण बंद और नगर निगम की आय शून्य के करीब।

ग्वालियर का नया मास्टर प्लान

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ग्वालियर का नया मास्टर प्लान वर्ष 2021 में तैयार किया गया था। इसमें वर्ष 2035 तक विकास को ध्यान में रखते हुए एफएआर ऑन प्रीमियम (FOP) की दर 0.05 प्रतिशत प्रस्तावित थी। लेकिन वर्ष 2023 में मास्टर प्लान लागू करते समय जारी अधिसूचना में इसे दस गुना बढ़ाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया गया।

राजपत्र की गलती से कारोबार पर ब्रेक

राजपत्र में प्रकाशित इसी बदलाव ने रियल एस्टेट कारोबार की कमर तोड़ दी। ऊंची FOP दर के कारण बिल्डरों ने नए प्रोजेक्ट शुरू करना बंद कर दिया। इसका सीधा असर ग्वालियर नगर निगम के राजस्व पर भी पड़ा है। न नए भवन बने, न भवन अनुज्ञा जारी हुई और न ही निगम को प्रीमियम या शुल्क के रूप में आय मिली।

आश्वासन मिला, समाधान नहीं

रियल एस्टेट कारोबारियों की संस्था क्रेडाई ग्वालियर ने इस मुद्दे को कई बार शासन और जिम्मेदार अधिकारियों के सामने उठाया। सरकार की ओर से FOP दर में सुधार का आश्वासन भी मिला,लेकिन अफसरों ने अब तक अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।

दावे-आपत्ति भी बेअसर

बताया जाता है कि नगरीय प्रशासन विभाग ने 25 जुलाई को FOP दर में संशोधन के लिए दावे–आपत्ति आमंत्रित की थीं, लेकिन विभाग के प्रस्ताव का एक भी समर्थन या आपत्ति नहीं आई। इसके बावजूद विभाग ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

भोपाल–इंदौर में अलग हालात

मध्य प्रदेश में ग्वालियर समेत गिने-चुने शहरों में ही नया मास्टर प्लान लागू है। ग्वालियर महानगर श्रेणी में आता है, लेकिन इसी श्रेणी के भोपाल और इंदौर का नया मास्टर प्लान अब तक तैयार नहीं हुआ है। मेट्रोपोलिटन सिटी घोषित किए जाने के कारण इन शहरों में नए मास्टर प्लान के शीघ्र लागू होने की संभावना भी कम है।

एक्सपर्ट कमेंट

सिर्फ ग्वालियर में ही 0.50% FOP: सचिव क्रेडाई

क्रेडाई के सचिव शैलेष जैन ने कहा कि प्रदेश में 0.50 प्रतिशत FOP दर सिर्फ ग्वालियर में लागू है। उन्होंने बताया कि जुलाई में बुलाई गई दावे-आपत्ति प्रक्रिया में एक भी आपत्ति नहीं आई। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई, फिर भी छह महीने बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं हुआ। उन्होंने कहा,कि 0.50 प्रतिशत FOP रियल एस्टेट कारोबार पर बड़ा कुठाराघात है। इसके बाद से ग्वालियर में बहुमंजिला भवनों का निर्माण पूरी तरह ठप है। जिससे शहर का विकास भी रुक गया है।

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एक बार फिर दावे–आपत्ति: एसीएस

वहीं,नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आईएएस संजय दुबे ने माना कि मौजूदा दर व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा 0.05 प्रतिशत यदि मजाक है, तो 0.50 प्रतिशत भी बहुत ज्यादा है। हम बीच की कोई व्यावहारिक दर तय करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि बिल्डरों और सरकार दोनों को नुकसान न हो। इसके लिए जल्द ही नए सिरे से दावे-आपत्ति बुलाई जाएंगी।

Knowledge 

  • क्या है FAR on Premium (FOP)?
  • यह कोई टैक्स नहीं
  • अतिरिक्त FAR (निर्माण अधिकार) लेने की कीमत
  • कलेक्टर गाइडलाइन के प्रतिशत पर आधारित
  • FOP जमीन उपयोग,सड़क की चौड़ाई,आवासीय या व्यावसायिक प्रकृति व संबंधित इलाके की कलेक्टर गाइड लाइन दर पर निर्भर करती है।

आगे क्या होगा

यदि FOP दर में संशोधन नहीं हुआ तो ग्वालियर में निवेश और रोजगार और घटेगा। आवासीय-व्यावसायिक प्रोजेक्ट दूसरे शहरों की ओर शिफ्ट होंगे। वहीं एफओपी की दरें व्यावहारिक होने पर निर्माण फिर शुरू होंगे। नगर ​निगम को राजस्व बढ़ेगा। साथ ही, शहर का विकास हो सकेगा।

निष्कर्ष

ग्वालियर में समस्या नीति की नहीं। गलत दर निर्धारण की है। 0.05% और 0.50%,दोनों ही अतिवादी हैं। जब तक बीच की व्यावहारिक दर तय नहीं होती,तब तक न बिल्डर आगे आएंगे,न शहर आगे बढ़ेगा।

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