मालवीय ही नहीं, बल्कि भाजपा में गए कई कांग्रेस नेता घर वापसी के इंतजार में

राजस्थान में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए कई नेता घर वापसी के लिए छटापटा रहे हैं। उनका दो साल में ही भाजपा से मोहभंग होता दिख रहा है। वजह मानी जा रही है कि इन्हें भाजपा में तवज्जो नहीं मिल रही है।

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Mukesh Sharma
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Jaipur. राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के समय अनेक कांग्रेस नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। इनमें कई साल तक कांग्रेस सरकारों में सत्ता का आनंद लेने वाले दिग्गत नेता भी थे। लेकिन, अब दो साल में ही अधिकांश नेताओं का भाजपा से मोहभंग होता दिख रहा है। घर वापसी के लिए इन्हें कांग्रेस आलाकमान की हरी झंडी का इंतजार है। 

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ऐसे आया मामला चर्चा में

बांसवाड़ा के आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस से चार बार विधायक, दो बार सांसद, दो बार जिला प्रमुख तथा दो बार राज्य में मंत्री रहे है। उनकी पत्नी रेशम मालवीया तीन बार जिला प्रमुख रही है। इसके बावजूद महेंद्रजीत नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाने पर विधायक पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। अब दो साल बाद उनका अचानक भाजपा से मोहभंग हो गया है। उन्होंने भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में फिर शामिल होने की घोषणा कर दी है। हालांकि उन्हें कांग्रेस में पुन: शामिल होने की औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि उनके मामले में अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

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और भी नेता हैं घर वापसी की कतार में

मालवीय के अलावा कांग्रेस छोड़कर गए करीब 7 नेता घर वापसी की कतार में है। इनके संबंध में भी मामले अनुशासन समिति में लंबित है। इन नेताओं को आशा है कि जल्दी ही अनुशासन समिति उनके पक्ष में रिपोर्ट देगी और उनकी घर वापसी होगी। बताया जाता है कि भाजपा में उपेक्षित चल रहे यह नेता वापिस कांग्रेस में आने को तैयार है। इसके लिए कुछ नेताओं ने दिल्ली और राज्य के बड़े नेताओं से संपर्क भी साधा है। 

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इनको है घर वापसी का इंतजार 

घर वापसी के इंतजार में भाजपा में शामिल होने के कुछ महीने बाद ही भाजपा छोड़ने वाले पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा,गोपाल गुर्जर, पूर्व विधायक रामचंद्र सराधना, बलराम यादव और कैलाश मीणा शामिल है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी से बगावत करने वाले पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, बाड़मेर के पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान, ओम बिश्नोई, सुनील परिहार और कामां से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले मुख्तार खान की कांग्रेस में वापसी हो चुकी है। 

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अमीन खान व मेवाराम की घर वापसी ने लगाए पंख

इन नेताओं की उम्मीद को 2025 में बाड़मेर के मेवाराज जैन और अमीन खान की घर वापसी से पंख लगे है। अमीन को लोकसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और मेवाराम जैन को एक अश्लील वीडियो के कारण दो साल पहले कांग्रेस ने निकाल दिया था। बायतू विधायक हरीश चौधरी के लाख विरोध के बावजूद अगस्त 2025 में अमीन खान और मेवाराम जैन सितंब 2025 में वापिस कांग्रेस में शामिल कर लिए गए।   

ये बड़े चेहरे गए थे भाजपा में  

विधानसभा चुनाव से पहले और बाद में पार्टी के कई बड़े और दिग्गज चेहरे ऐसे थे, जो कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में चले गए थे। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को पहला झटका नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा के भाजपा में जाने से लगा था। उनके साथ खींवसर से कांग्रेस उम्मीवार रहे पूर्व आईपीएस सवाई सिंह चौधरी भी भाजपा में शामिल हुए थे।  

इसके बाद पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया और राजेंद्र यादव के साथ ही पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा, उनके बेटे व पूर्व विधायक विजयपाल मिर्धा, पूर्व सांसद गोपाल सिंह ईडवा, जयपुर की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, पूर्व विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा, पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा, जेपी चंदेलिया, पूर्व विधायक आलोक बेनीवाल,रमेश खींची, दीपचंद खेरिया,और कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहे सीताराम अग्रवाल और भीलवाड़ा के कांग्रेस नेता रामपाल शर्मा शामिल है। 

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नहीं मिली तवज्जो

बताया जाता है कि विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए अधिकांश नेताओं को भाजपा में ज्यादा तव्वजो नहीं मिली है। ज्योति मिर्धा को छोड़ दिया जाए तो बाकी नेताओं का भाजपा में नाम लेने वाला भी नहीं है। भाजपा राजस्थान ने मालवीय को जरूर 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वह जीत नहीं सके। इसके बाद से उन्हें ना भाजपा संगठन में कोई पूछ रहा है और ना ही सरकार में उनकी कोई सुनता है। यही हाल बाकी नेताओं का भी है।

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आलाकमान के स्तर पर होगा फैसला 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि अनेक नेताओं की घर वापसी के मामले अभी विचाराधीन है। इस संबंध में अनुशासन समिति की ​रिपोर्ट के आधार पर आलाकमान के स्तर पर फैसला होगा कि किसे वापिस लिया जाए और किसे नहीं।

मुख्य बिंदू :

  • राजस्थान कांग्रेस में घर वापसी के लिए फैसला आलाकमान की अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर आधारित होता है।
  • नेताओं को अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस आलाकमान की हरी झंडी का इंतजार करना होता है।
  • अधिकांश भाजपा में गए नेताओं को तवज्जो नहीं मिल रही है, जिससे कई नेता घर वापसी के लिए तैयार हैं।
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