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Photograph: (The Sootr)
Jaipur: राजस्थान के पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय का दो साल में ही भाजपा से मोहभंग हो गया। उन्होंने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र लिखकर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जाहिर की हैं। मालवीय ने रविवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मालवीय ने भाजपा छोड़ने की घोषणा की।
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भाजपा में असंतोष की वजह
मालवीय ने कहा कि भाजपा सरकार में सत्ता होने के बावजूद वे जनता के लिए काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद गरीबों की समस्याओं को नहीं सुना जा रहा हैं। मनरेगा का भुगतान महीनों से अटका हुआ हैं। किसानों को खाद नहीं मिल रही हैं। कई बार मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखे लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
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कांग्रेस में वापसी की वजह
पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मालवीय के पत्र का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मालवीय ने यह स्वीकार किया है कि भारतीय जनता पार्टी में जाना उनकी ऐतिहासिक भूल थी। डोटासरा ने बताया कि यह निर्णय कांग्रेस की नीति और आदर्शों के अनुरूप था।
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कांग्रेस के प्रति आस्था
भाजपा में आने से पहले मालवीय कांग्रेस में पिछले 40 साल से जुड़े रहें। उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए सरपंच, प्रधान, विधायक, जिला प्रमुख और मंत्री के रूप में पार्टी के लिए काम किया। भाजपा में जाने के बाद, मालवीय को दो साल बाद यह महसूस हुआ कि वहां वे जनता का काम नहीं कर पा रहें हैं। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस में लौटने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें लगता है कि आने वाले समय में कांग्रेस फिर से सत्ता में आएगी।
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मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने दिया जवाब
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पार्टी बदलना हर व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है। वे मानते हैं कि मालवीय ने अपनी पुरानी यादों के आधार पर कांग्रेस में वापस जाने का निर्णय लिया है। उनका यह भी कहना था कि कांग्रेस में लौटने से मालवीय को अब स्वतंत्रता का अहसास होगा।
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कौन हैं महेन्द्रजीत सिंह मालवीय
महेंद्रजीत सिंह मालवीय को कांग्रेस का आदिवासी चेहरा माना जाता है. मालवीय के पास लम्बा राजनीतिक तजुर्बा है. वो सरपंच से लेकर, प्रधान, विधायक और सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं. दक्षिणी राजस्थान, ख़ास तौर पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर में उनका मज़बूत जनाधार है.
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सरपंच से मंत्री तक का सफर
मालवीय लगातार तीन बार बागीदौरा विधानसभा से विधायक रहे। उनका राजनीतिक कद मानगढ़ धाम में हुई राहुल गांधी की सभा के बाद बढ़ा। मालवीय ने सरपंच से अपने सियासी करियर का आगाज किया था। इसके बाद वो एक-एक पायदान चढ़ते हुए विधायक, सांसद, मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के मेंबर तक बने।
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मालवीय के इस्तीफे के मुख्य बिंदू:
- मालवीय ने भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया क्योंकि भाजपा में उनका दम घुट रहा था और वे जनता के लिए काम नहीं कर पा रहे हैं।
- कांग्रेस पार्टी ने मालवीय की वापसी का स्वागत किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे कांग्रेस की नीति और आदर्शों के अनुरूप बताया।
- मालवीय ने भाजपा में असंतोष और विकास की कमी का हवाला देते हुए कांग्रेस में वापसी का निर्णय लिया। उन्होंने 40 साल कांग्रेस में काम किया और अब आने वाले समय में कांग्रेस का राज फिर से लौटेगा, ऐसा विश्वास जताया।
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