ECG की रिपोर्ट नहीं बताती खतरा! डॉ. पखमोड़े की कहानी कर देगी हैरान

नागपुर के मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पखमोड़े की मौत ने सबको झकझोर दिया है। उनकी ईसीजी मेडिकल रिपोर्ट तो सामान्य थी, लेकिन शरीर अंदर से टूट चुका था।

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Aman Vaishnav
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News In Short

  • डॉ. चंद्रशेखर पखमोड़े का ईसीजी क्लीन था, फिर भी 3 दिन बाद मृत्यु हो गई।

  • डॉ. पखमोड़े की दिनचर्या अत्यधिक तनावपूर्ण और स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक थी।

  • उनकी भारी सफलता के पीछे मानसिक और शारीरिक थकावट का गहरा असर पड़ा।

  • यह घटना कार्य-जीवन संतुलन की अहमियत को मजबूती से समझाती है।

  • डॉ. पखमोड़े की कहानी जीवनशैली को बदलने का एक कड़ा संदेश देती है।

News In Detail

क्लीन रिपोर्ट और अचानक मृत्यु का रहस्य

नागपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पखमोड़े का मामला बेहद चौंकाने वाला है। मृत्यु से महज तीन दिन पहले करवाई गई उनकी ईसीजी (ECG) रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य थी। इसके बावजूद तीन दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना साबित करती है कि ईसीजी जैसे मानक टेस्ट हमेशा हृदय की वास्तविक स्थिति या आने वाले खतरे की पूरी गारंटी नहीं दे सकते।

ईसीजी टेस्ट रिपोर्ट की सीमाएं

यह घटना एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सबक देती है कि ईसीजी सिर्फ उसी पल की हृदय गति का चित्र पेश करता है जब टेस्ट हो रहा होता है। रिपोर्ट क्लीन होने का मतलब केवल तात्कालिक खतरे का न होना है। यह लंबे समय से शरीर में घर कर रही मानसिक और शारीरिक थकान के प्रभाव को मापने में पूरी तरह असमर्थ है।

सफलता की अदृश्य और भारी कीमत

डॉ. पखमोड़े चिकित्सा के क्षेत्र में बेहद सफल और प्रसिद्ध थे। इस कामयाबी की एक छिपी हुई कीमत थी जो वे अपने शरीर से चुका रहे थे। उनकी सफलता के पीछे की कहानी अथक परिश्रम की थी। इसने अंततः उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर थका दिया कि उनका शरीर और बोझ नहीं सह सका।

डॉ. पखमोड़े की जानलेवा दिनचर्या

उनकी दिनचर्या समर्पण की पराकाष्ठा थी लेकिन स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक थी। वे नागपुर में 200 बेड की क्षमता वाले दो विशाल अस्पतालों का संचालन कर रहे थे। उनका काम सुबह 5 बजे से शुरू होकर आधी रात तक चलता था। इसमें खुद के शरीर के लिए आराम का एक क्षण भी नहीं था।

अमानवीय कार्यभार और सर्जरी का दबाव

एक न्यूरोसर्जन के रूप में उनका काम बहुत भारी था। वे प्रतिदिन 8 से 9 सर्जरी करते थे और हर दिन 100 से अधिक मरीजों के मामले संभालते थे। उनका शेड्यूल सुबह 6 बजे से मरीजों की जांच, शाम 4 बजे सर्जरी और फिर देर रात तक आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में परामर्श तक फैला हुआ था।

जीवनशैली के प्रति एक कड़ी चेतावनी

यह दुखद घटना हम सबके लिए एक सवाल छोड़ गई है। हम अपनी तरक्की और अपनी जान के बीच की रेखा कहां खींचते हैं? काम में सबसे आगे रहने की होड़ में सेहत को पूरी तरह नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। अच्छी हेल्थ रिपोर्ट के बावजूद खराब लाइफस्टाइल किसी भी समय खतरनाक मोड़ ले सकती है।

Sootr Expert

डॉ. अंजुम मुजावर (MBBS) कहते हैं कि शॉर्ट PR इंटरवल जैसी असामान्यताओं पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। डॉ. जॉयदीप सरकार (कार्डियोलॉजिस्ट) बताते हैं कि ECG गलत असामान्यताएं दिखा सकता है, इसलिए अन्य जांच जरूरी हैं।

 Sootr Alert

  • Health Tips यदि आपको सीने में भारीपन, बेचैनी या सांस फूलने जैसा महसूस हो, तो रिपोर्ट का इंतजार किए बिना तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलें।
  • शरीर और हृदय के स्वास्थय के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की निर्बाध और गहरी नींद लेना अनिवार्य है।
  • घंटों तक लगातार काम करना बर्नआउट का कारण बनता है। हर एक-दो घंटे के काम के बाद छोटा ब्रेक जरूर लें।
  • ईसीजी सामान्य होने का मतलब यह नहीं कि आप पूरी तरह सुरक्षित हैं। तनाव का स्तर ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह और जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
  • मानसिक शांति और शारीरिक मजबूती के लिए रोजाना कम से कम 15 मिनट योग, ध्यान या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें।

आगे क्या

यह खबर प्रोफेशनल जगत में कार्य-संस्कृति को बदलने की मांग तेज करेगी। डॉक्टरों और उच्च दबाव वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए सेल्फ-केयर अब कोई विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन जाएगा।

निष्कर्ष

डॉ. चंद्रशेखर पखमोड़े की कहानी हमें यह कड़ा संदेश देती है कि सफलता तभी सार्थक है जब उसे भोगने के लिए शरीर स्वस्थ रहे। जीवनशैली में सुधार और खुद को समय देना आत्म-विनाश से बचने का एकमात्र रास्ता है।

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