हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष ज्ञानरंजन का निधन, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Aman Vaishnav | Jan 08, 2026, 07:57 IST
Share
gyanranjan passed away jabalpur
gyanranjan passed away jabalpur

विख्यात कथाकार और साहित्यिक पत्रिका पहल के संपादक ज्ञानरंजन का निधन 7 जनवरी को रात 10:30 बजे जबलपुर में 90 साल की उम्र में हो गया। उन्हें बुधवार सुबह इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

5 पॉइंट में समझें पूरी खबर...

  • हिंदी जगत के विख्यात कथाकार और यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन का निधन हो गया है।
  • 7 जनवरी को रात 10.30 बजे जबलपुर में अंतिम सांस ली।
  • ज्ञानरंजन जी ने साहित्यिक पत्रिका 'पहल' का दशकों तक संपादन किया।
  • पिता और घंटा जैसी कालजयी कहानियों के रचनाकार रहे।
  • आकाशदीप और मैथिलीशरण गुप्त जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित भी हुए।
विनोद कुमार शुक्ल के बाद साहित्य जगत के लिए एक और अपूरणीय क्षति... हिंदी के सुविख्यात कथाकार ज्ञानरंजन नहीं रहे। 90 वर्ष की उम्र में उन्होंने जबलपुर के एक अस्पताल में 7 जनवरी को रात 10.30 बजे अंतिम सांस ली।

उन्होंने मां नर्मदा के आंचल की छांव जबलपुर में अध्यापन से लेकर लगभग पूरी साहित्य साधना की। प्रति​ष्ठित साहित्यिक पत्रिका पहल का लंबे समय तक संपादन किया।

gyanranjan ji
gyanranjan ji


मध्यवर्गीय जीवन के कुशल शिल्पी

ज्ञानरंजन ने हिंदी कहानी को नई भाषा दी। उन्होंने पिता, घंटा और अमरूद जैसी कहानियां लिखीं। इन रचनाओं ने मध्यवर्ग के विरोधाभासों को दिखाया। उन्होंने समाज की विरूपताओं का गहरा खुलासा किया।

Read famous Poetry of Gyanranjan | Hindwi
Read famous Poetry of Gyanranjan | Hindwi


पहल पत्रिका और वैचारिक योगदान

ज्ञानरंजन ने पहल पत्रिका का लंबे समय तक संपादन किया। इस पत्रिका ने साहित्य में ऊंचा मुकाम हासिल किया। साठोत्तरी कथा-साहित्य में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नई पीढ़ी की सोच को गहराई से पकड़ा।

जन्म और शिक्षा

उनका जन्म 21 नवंबर, 1936 को हुआ था। जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले में हुआ था। उनका बचपन दिल्ली, अजमेर और बनारस में बीता। उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूर्ण हुई थी।

gyanranjan ji
gyanranjan ji


वैश्विक स्तर पर पहचान

ज्ञानरंजन की कहानियों की कुल संख्या 25 है। ये सभी सपना नहीं संकलन में मौजूद हैं। उनकी रचनाओं का कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। कई विदेशी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी उनकी कहानियां शामिल हैं।

सम्मान और पुरस्कार

उन्हें वर्ष 2019 में आकाशदीप सम्मान मिला। इसके अलावा सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से नवाजे गए। उन्हें साहित्य भूषण और शिखर सम्मान भी मिला। वर्ष 2001-02 में उन्हें मैथिलीशरण गुप्त सम्मान मिला।

ये खबरें भी पढ़िए...

क्यों चर्चित हुई थी विनोद कुमार शुक्ल की कहानी- दीवार में एक खिड़की रहती थी, जिसने हिंदी साहित्य में रचा नया इतिहास

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, रायपुर एम्स में थे भर्ती

भीष्म साहनी : एक ऐसे साहित्यकार जिन्होंने 'तमस' में बयां कर दी विभाजन की त्रासदी

रायपुर में होगा साहित्य उत्सव, देश भर के 100 से अधिक साहित्यकार जुटेंगे

Tags:
  • पिता
  • पत्रिका
  • मैथिलीशरण गुप्त
  • शिखर सम्मान
  • ज्ञानरंजन जी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा