छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार और ज्ञानपीठ विजेता विनोद कुमार शुक्ल का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

Harrison Masih | Dec 23, 2025, 18:32 IST
Share
vinod-kumar-shukla-jnanpith-awardee-passes-away-raipur-aiims
vinod-kumar-shukla-jnanpith-awardee-passes-away-raipur-aiims

छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का रायपुर एम्स में निधन। छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता और अंतरराष्ट्रीय नाबोकॉव अवॉर्ड से हो चके थे सम्मानित।

Raipur. छत्तीसगढ़ के मशहूर कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर श्वसन रोगों (ILD) और निमोनिया से जूझ रहे थे।

रायपुर एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। महज एक महीने पहले ही विनोद कुमार शुक्ल को भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

छत्तीसगढ़ के पहले 'ज्ञानपीठ' विजेता

विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे साहित्यकार थे जिन्हें भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' (2024) से नवाजा गया था। स्वास्थ्य कारणों से वे पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो सके थे, इसलिए करीब एक महीने पहले ही ज्ञानपीठ के अधिकारियों ने उनके रायपुर स्थित निवास पर आकर उन्हें सम्मानित किया था।



Vinod Kumar Shukla death
Vinod Kumar Shukla death


ये खबरें भी पढ़ें...

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, रायपुर एम्स में थे भर्ती

दीवार में एक खिड़की रहती थी: विनोद कुमार शुक्ल की वो किताब, जिसने हिंदी साहित्य में रचा नया इतिहास

PM मोदी से मुलाकात, बोले थे- लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा

विनोद शुक्ल अपनी सादगी और शब्दों की जादूगरी के लिए जाने जाते थे। छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर रायपुर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विनोद कुमार शुक्ल से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना था।

इस मुलाकात के दौरान विनोद शुक्ल ने कहा था- "लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। मैं बस घर लौटकर फिर से लिखना चाहता हूँ।"

विनोद कुमार शुक्ल की उपलब्धियां

पुरस्कार / सम्मानवर्षयोगदान
ज्ञानपीठ पुरस्कार2024हिंदी साहित्य में असाधारण योगदान के लिए भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान।
साहित्य अकादमी पुरस्कार1999उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के लिए।
पेन/नाबोकोव पुरस्कार2023अंतर्राष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए; पहला एशियाई लेखक।
गजानन माधव मुक्तिबोध फैलोशिप—साहित्यिक अध्ययन और शोध के लिए सम्मान।
रज़ा पुरस्कार—साहित्य और कला में योगदान के लिए।
शिखर सम्मान (मध्य प्रदेश शासन)—साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए राज्य स्तरीय सम्मान।
दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान —कविता और साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार —आलोचनात्मक और साहित्यिक योगदान के लिए।


'मैजिक रियलिज्म' के उस्ताद और उनकी कृतियां

1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल पिछले 50 वर्षों से साहित्य सृजन कर रहे थे। उनकी लेखन शैली को विश्व स्तर पर 'जादुई यथार्थवाद' (Magic Realism) के समकक्ष माना जाता है।

उपन्यास: 'नौकर की कमीज' (जिस पर मणिकौल ने फिल्म बनाई), 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त), 'खिलेगा तो देखेंगे'।

कविता संग्रह: 'लगभग जय हिंद', 'वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहनकर विचार की तरह', 'सब कुछ होना बचा रहेगा'।

बच्चों के लिए: 'हरे पत्ते की रंग की पतरंगी' और 'कहीं खो गया नाम का लड़का'।

ये खबरें भी पढ़ें...

रायपुर में होगा साहित्य उत्सव, देश भर के 100 से अधिक साहित्यकार जुटेंगे

प्रतिष्ठित व्यास सम्मान से विभूषित और जाने माने साहित्यकार डॉ. शरद पगारे का निधन

नाबोकॉव अवॉर्ड पाने वाले पहले एशियाई

विनोद कुमार शुक्ल का कद केवल भारत तक सीमित नहीं था। वे पेन/नाबोकॉव (PEN/Nabokov) अवॉर्ड से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय और एशियाई लेखक थे। उनकी रचनाओं का अनुवाद अंग्रेजी, जर्मन और इतालवी सहित दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में हो चुका है।

नई पीढ़ी को संदेश

अपने अंतिम समय में भी वे नई पीढ़ी के प्रति आशावान थे। उन्होंने कहा था— "किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है। नई पीढ़ी को हर विचारधारा का सम्मान करना चाहिए।" उनके अनुसार, कविता की सबसे अच्छी आलोचना एक और 'बेहतर कविता' लिख देना है।

विनोद कुमार शुक्ल का निधन सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी सरल भाषा, गहरी संवेदना और मानवीय दृष्टि आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।

Tags:
  • रायपुर एम्स
  • विनोद कुमार शुक्ल
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार
  • विनोद कुमार शुक्ल का निधन
  • छत्तीसगढ़ के मशहूर कवि
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा