सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के गोहत्या बैन आदेश पर लगाई रोक, कहा सुधार जरूरी
Jitendra Shrivastava | Jul 13, 2026, 18:02 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें तमिलनाडु में गोहत्या रोकने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि आदेश में सुधार की जरूरत है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट ने गोहत्या बैन आदेश पर लगाई रोक।
- मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति।
- तमिलनाडु सरकार को मिली राहत, हाईकोर्ट आदेश पर रोक।
- कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला।
- गोहत्या को लेकर दो हाईकोर्ट के अलग अलग रुख।
तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नोटिस जारी कर रोक का आदेश दिया।
क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश
बेंच ने संविधान सभा की बहस का जिक्र किया था। उसमें कहा गया था कि भारत में गाय पूजनीय मानी जाती है। यह भगवान कृष्ण के समय से संस्कृति का हिस्सा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मुस्लिम शासकों ने भी गोहत्या पर रोक लगाई थी। महात्मा गांधी भी गो संरक्षण को महत्वपूर्ण मानते थे।
संविधान और कानून का हवाला
इस कानून के अनुसार, 10 साल से ज्यादा उम्र और प्रजनन के अयोग्य पशु को ही प्रमाणपत्र मिलने के बाद काटा जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि इस प्रावधान की सख्ती से व्याख्या होनी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कुर्बानी दी जाती है, तो वह सिर्फ तय जगहों पर हो। सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर ऐसा नहीं हो सकता।
तमिलनाडु सरकार ने क्यों दी चुनौती
कलकत्ता हाईकोर्ट का अलग रुख
चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु के वध को पूरी तरह बैन बताया था। बेंच ने यह भी कहा कि ईद उल जुहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
अब आगे क्या
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गोहत्या रोकने वाले आदेश पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि आदेश में सुधार की जरूरत है। मामले में नोटिस जारी कर आगे सुनवाई तय की गई है। - मद्रास हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था
हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बकरीद या किसी भी दिन गाय बछड़ों के वध पर रोक सुनिश्चित करने को कहा था। यह आदेश 27 मई को दिया गया था। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला दिया था। - कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला मद्रास हाईकोर्ट से कैसे अलग है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की गाइडलाइन पर रोक लगाने से इनकार किया था। कोर्ट ने सिर्फ फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना वध पर रोक बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा था कि गाय की कुर्बानी इस्लाम में अनिवार्य नहीं है।
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