शांतनु ठाकुर का दावा, सात दिन में पूरे देश में लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून, जानिए CAA लागू होने से किसका-क्या बदल जाएगा?

Jitendra Shrivastava | Jan 29, 2024, 19:52 IST
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शांतनु ठाकुर का दावा, सात दिन में पूरे देश में लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून, जानिए CAA लागू होने से किसका-क्या बदल जाएगा?
शांतनु ठाकुर का दावा, सात दिन में पूरे देश में लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून, जानिए CAA लागू होने से किसका-क्या बदल जाएगा?

सात दिन के अंदर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने किया है।

NEW DELHI. अगले सात दिन के अंदर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने किया है। ठाकुर ने यह बयान पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एक जनसभा में दिया है। शांतनु ने बंगाली में कहा, मैं गारंटी दे सकता हूं कि अगले सात दिनों में न सिर्फ पश्चिम बंगाल में, बल्कि पूरे देश में सीएए लागू कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद CAA एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय नागरिकता कानून क्या है और इसके लागू होने से क्या बदल जाएगा? किन प्रावधानों पर सबसे ज्यादा आपत्तियां हैं।

CAA को लेकर विपक्ष ने किया था विरोध

भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून पर 5 साल पहले ही मुहर लग गई थी। हालांकि, यह अब तक लागू नहीं हो पाया है। सीएए को लेकर पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। खासकर पूर्वोत्तर के सात राज्य इसके खिलाफ हैं। विरोध को लेकर नॉर्थ ईस्ट सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। वहां तोड़फोड़ की वजह से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था। इस कानून के खिलाफ विपक्ष का भी कड़ा रुख देखने को मिला था। इस महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि सीएए के नियम केंद्र के पास तैयार हैं और लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले नोटिफाई कर दिया जाएगा।

CAA लागू होने का क्या हैं नियम

CAA को लेकर साल 2020 से लगातार एक्सटेंशन लिया जा रहा है. दरअसल, संसदीय प्रक्रियाओं की नियमावली के मुताबिक किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की सहमति के 6 महीने के भीतर तैयार किए जाने चाहिए। ऐसा न होने पर लोकसभा और राज्यसभा में अधीनस्थ विधान समितियों से विस्तार की मांग की जानी चाहिए। सीएए के केस में 2020 से गृह मंत्रालय नियम बनाने के लिए संसदीय समितियों से नियमित अंतराल में एक्सटेंशन लेता रहा है।

क्या है सीएए?

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के लागू होने पर तीन पड़ोसी मुस्लिम बाहुल्य देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन लोगों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी, जो दिसंबर 2014 तक किसी ना किसी प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए। इसमें गैर-मुस्लिम माइनोरिटी- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं। नागरिकता संशोधन बिल पहली बार 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था। यहां से तो ये पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और फिर 2019 का चुनाव आ गया। फिर से मोदी सरकार बनी। दिसंबर 2019 में इसे लोकसभा में दोबारा पेश किया गया। इस बार ये बिल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह से पास हो गया। 10 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। लेकिन उस समय कोरोना के कारण इसमें देरी हुई।

किसे मिलेगी नागरिकता? और क्या रहेगी प्रक्रिया?

नागरिकता देने का अधिकार पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगा। जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले आकर भारत में बस गए थे, उन्हें ही नागरिकता मिलेगी। इस कानून के तहत उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है, जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट और वीजा) के बगैर घुस आए हैं या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हैं, लेकिन तय अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक गए हों। नागरिकता लेने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया गया है। आवेदकों को वह साल बताना होगा, जब उन्होंने दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था। आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। नागरिकता से जुड़े जितने भी ऐसे मामले पेंडिंग हैं वे सब ऑनलाइन कन्वर्ट किए जाएंगे। पात्र विस्थापितों को सिर्फ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उसके बाद गृह मंत्रालय जांच करेगा और नागरिकता जारी कर देगा।

9 राज्यों के डीएम को क्या मिले अधिकार?

पिछले दो साल में 9 राज्यों के 30 से ज्यादा जिला मजिस्ट्रेटों और गृह सचिवों को बड़े अधिकार दिए गए हैं। डीएम को तीन देशों से आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दी गई हैं। नागरिकता गृह मंत्रालय की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक इन गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 1,414 विदेशियों को भारतीय नागरिकता दी गई है। जिन 9 राज्यों में नागरिकता दी गई है, वे गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र हैं।

CAA के विरोध का ये है कारण...

  • विपक्ष का कहना है कि इस कानून के जरिए खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। वे जानबूझकर अवैध घोषित किए जा सकते हैं। वहीं, बिना वैध दस्तावेजों के भी बाकियों को जगह मिल सकती है। विपक्ष का तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जो समानता के अधिकार की बात करता है।
  • हालांकि, पूर्वोत्तर के पास अलग वजह है। वे मानते हैं कि अगर बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिली, तो उनके राज्य के संसाधन बंट जाएंगे। एक बड़ा वर्ग यह भी कहता है कि पूर्वोत्तर के मूल लोगों के सामने पहचान और आजीविका का संकट पैदा हो जाएगा।
  • पूर्वोत्तर के मूल निवासी यानी वहां बसे आदिवासी लोग सीएए के विरोध में हैं। इन राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं।
  • इन सातों राज्यों के मूल लोग सजातीय हैं। इनका खानपान और कल्चर काफी हद तक मिलता है, लेकिन कुछ दशकों से यहां दूसरे देशों से अल्पसंख्यक समुदाय भी आकर बसने लगा। खासकर बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक बंगाली यहां आने लगे।
CAA बीजेपी का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा था

CAA लागू करना BJP की प्रतिबद्धता में शामिल है। बंगाल के बनगांव से बीजेपी सांसद शांतनु ठाकुर ने वही बात दोहराई है, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सीएए को लेकर बयान में कही थी। पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सीएए लागू करेगी और इसे कोई भी रोक नहीं सकता है। शाह की इस टिप्पणी को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना माना गया, जो सीएए का जबरदस्त विरोध करती रही हैं। शाह ने कोलकाता में एक रैली में घुसपैठ, भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और तुष्टीकरण के मुद्दों पर ममता बनर्जी के खिलाफ तीखे हमले किए थे और लोगों से टीएमसी की सरकार को बंगाल से हटाने और 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जिताने की अपील की थी। सीएए को लागू करने का वादा पश्चिम बंगाल में पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा था।

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