SEBI का नया नियम, तीन अगस्त से बदल जाएगा शेयर बाजार बंद होने का समय

Sandeep Kumar | Jul 29, 2026, 23:10 IST
तीन अगस्त से बदल जाएगा शेयर बाजार बंद होने का समय
तीन अगस्त 2026 से शेयर बाजार में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सेबी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस लागू करने जा रहा है। इससे बाजार बंद होने के समय और क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका बदल जाएगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • तीन अगस्त 2026 से शेयर बाजार में बदलाव होगा।
  • SEBI क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू करेगा।
  • क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका बदलेगा।
  • बाजार खुलने के समय में बदलाव नहीं होगा।
  • जानकारी ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा ने दी है।

किन स्टॉक्स पर कितना असर

F&O (Futures and Options) सेगमेंट वाले स्टॉक्स की सामान्य ट्रेडिंग अब दोपहर 3:15 बजे बंद होगी। इसके तुरंत बाद क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू हो जाएगा। बाकी सभी स्टॉक्स यानी नॉन-F&O शेयरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इनकी ट्रेडिंग पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे ही बंद होगी। इंडेक्स और स्टॉक F&O कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए अलग समय तय हुआ है। इनकी ट्रेडिंग दोपहर 3:40 बजे बंद होगी।



इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए नया समय

जो लोग MIS (Margin Intraday Square-off) के जरिए इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए भी नियम बदल गए हैं। यह बदलाव जेरोधा समेत सभी ब्रोकरों पर लागू होगा।



CAS के दायरे में आने वाले F&O स्टॉक्स का ऑटो स्क्वायर-ऑफ अब दोपहर 3:10 बजे होगा। गैर-CAS स्टॉक्स के लिए यह समय दोपहर 3:25 बजे रहेगा। इंडेक्स और स्टॉक F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का स्क्वायर-ऑफ भी दोपहर 3:25 बजे ही होगा। ट्रेडर्स को अपनी रणनीति इन नए समय के हिसाब से बदलनी होगी। देरी होने पर पोजीशन अपने आप कट सकती है।



क्लोजिंग प्राइस इतना जरूरी क्यों है

स्टॉक एक्सचेंज हर दिन शेयरों का क्लोजिंग प्राइस तय करता है। यह सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि कई बड़े वित्तीय कामों का आधार है।निफ्टी और सेंसेक्स जैसे इंडेक्स की वैल्यू इसी प्राइस से तय होती है। म्यूचुअल फंड कंपनियां भी अपने फंड का NAV (Net Asset Value) क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय करती हैं।



एक्सपायरी के दिन F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का फाइनल सेटलमेंट भी इसी प्राइस पर होता है। इसके अलावा पोर्टफोलियो वैल्यू, P&L रिपोर्ट और मार्जिन शेयर्स की वैल्यूएशन भी क्लोजिंग प्राइस से ही तय होती है।



CAS की जरूरत क्यों पड़ी

किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस और उसका आखिरी ट्रेड प्राइस हमेशा एक जैसा नहीं होता। कई बार आखिरी मिनट में हुआ एक छोटा ट्रेड पूरे दिन की सही वैल्यू नहीं दिखा पाता।



जैसे कोई शेयर दिनभर 1,000 से 1,010 रुपए के बीच ट्रेड होता रहे। लेकिन आखिरी समय में कोई 10 शेयर 980 रुपए में बेच दे। ऐसे में सिर्फ इस आखिरी दाम को क्लोजिंग प्राइस मानना गलत होगा।



अब तक इस समस्या से बचने के लिए VWAP (Volume Weighted Average Price) तरीका इस्तेमाल होता था। अब सेबी (SEBI – Securities and Exchange Board of India ) इसे और सटीक बनाने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लेकर आ रहा है।



ट्रेडर्स को क्या करना चाहिए

अगर आप शॉर्ट-टर्म या इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं, तो नए नियम ध्यान से समझ लें। अपनी ट्रेडिंग रणनीति को इन बदले हुए समय के हिसाब से एडजस्ट करना जरूरी होगा। ब्रोकर ऐप पर नए ऑटो स्क्वायर-ऑफ समय जरूर चेक करें। समय रहते तैयारी करने से किसी भी नुकसान से बचा जा सकता है।



इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?

इंट्राडे ट्रेडिंग में एक ही दिन के अंदर शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। इसमें निवेशक बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक सौदे कर सकते हैं। शेयर बाजार सुबह 9:15 बजे खुलता है और दोपहर 3:30 बजे बंद होता है। बाजार बंद होने से पहले सभी पोजीशन बंद करना जरूरी होता है।



FAQ

  1. तीन अगस्त 2026 से बाजार किस समय बंद होगा?
    F&O स्टॉक्स की ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे बंद होगी। नॉन-F&O स्टॉक्स पहले की तरह 3:30 बजे ही बंद होंगे।
  2. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) क्या है?
    यह क्लोजिंग प्राइस तय करने का एक नया और ज्यादा पारदर्शी तरीका है। सेबी इसे VWAP मेथड की जगह लागू कर रहा है।
  3. इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए स्क्वायर-ऑफ टाइम क्या रहेगा?
    CAS वाले F&O स्टॉक्स के लिए यह समय दोपहर 3:10 बजे है। बाकी स्टॉक्स और इंडेक्स के लिए यह 3:25 बजे रहेगा।

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