महंगाई से ज्यादा चुभ रही गर्मी: बिजली-पानी के लिए राशन में कटौती करने को मजबूर लोग

Amresh Kushwaha | Sept 12, 2026, 09:33 IST
महंगाई से ज्यादा सता रही गर्मी
भीषण गर्मी और महंगाई के कारण 73% परिवारों को अपने राशन का बजट घटाना पड़ा है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बिजली-पानी के बढ़े बिलों और कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग ने आम आदमी की रसोई के बजट को पूरी तरह से प्रभावित किया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भीषण गर्मी से 88% परिवारों का खर्च बढ़ा है।
  • 73% परिवारों को राशन बजट घटाना पड़ा है।
  • ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में असर सबसे ज्यादा दिखा है।
  • लोगों ने पंखा, कूलर और ठंडी चीजों पर खर्च बढ़ाया।

इस बार की गर्मी सिर्फ सेहत पर भारी नहीं पड़ी। इसने घर के बजट और रोजमर्रा की खरीदारी को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर (Worldpanel by Numerator) की एक ताजा सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 88% परिवारों ने माना कि मार्च से जून के बीच गर्मी की वजह से उनका खर्च बढ़ गया है।



खर्च बढ़ने की असली वजह

सर्वे में शामिल 81% परिवारों ने कहा कि इस बार गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ी। इसी वजह से बिजली का बिल काफी बढ़ गया। कई घरों में पानी की मरम्मत पर भी अतिरिक्त पैसा खर्च हुआ। ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल पर भी लोगों को ज्यादा खर्च करना पड़ा। यही तीन वजहें परिवारों के बजट बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण बनीं।



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73% परिवारों ने घटाया राशन बजट

गर्मी के असर से घर का पूरा बजट हिल गया। इसे संभालने के लिए 73% परिवारों ने राशन के खर्च में कटौती की। यानी बिजली-पानी जैसे जरूरी खर्च पूरे करने के लिए लोगों ने खाने-पीने का सामान कम खरीदा। यह आंकड़ा बताता है कि गर्मी सीधे घर के किचन तक पहुंच गई। सबसे ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में यह दबाव और भी ज्यादा देखा गया।



इन इलाकों में सबसे ज्यादा दबाव

सर्वे में इलाकों को उनके गर्मी के जोखिम के हिसाब से बांटा गया। सबसे ज्यादा गर्मी वाले क्षेत्रों में 82% परिवारों ने राशन बजट पर दबाव की बात कही। मध्यम जोखिम वाले इलाकों में यह आंकड़ा 68% रहा। वहीं कम जोखिम वाले क्षेत्रों में सिर्फ 64% परिवारों ने ऐसा दबाव महसूस किया। इससे साफ पता चलता है कि जितनी ज्यादा गर्मी, उतना ज्यादा बजट पर असर पड़ा।



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राशन नहीं घटा, तरीका बदल गया

यहां एक दिलचस्प बात भी सामने आई है। परिवारों ने रोजमर्रा के जरूरी सामान की मांग पूरी तरह नहीं घटाई। इसकी जगह उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदल दीं। सबसे ज्यादा गर्मी वाले क्षेत्रों में गेहूं को छोड़कर बाकी दैनिक जरूरत की चीजों की खपत सालाना 8% बढ़ी। मध्यम जोखिम वाले इलाकों में यह वृद्धि 5% रही। कम जोखिम वाले क्षेत्रों में सिर्फ 2% ही बढ़ोतरी दर्ज हुई। इससे साफ है कि परिवार जरूरी चीजों पर खर्च बनाए रखने के लिए बाकी सामान पर कटौती कर रहे हैं।



एक्सपर्ट का क्या कहना है

वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर के दक्षिण एशिया कमर्शियल निदेशक मनोज मेनन ने इस पर अपनी राय रखी। उनके मुताबिक अत्यधिक गर्मी अब सिर्फ मौसमी बदलाव तक सीमित नहीं रही। यह अब परिवारों के पूरे खर्च के पैटर्न को बदल रही है। मेनन का कहना है कि ब्रांड्स और दुकानदारों को यह समझना जरूरी है। उन्हें ऐसे प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध कराने होंगे, जो गर्मी से निपटने में मदद करें।



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गांवों में खपत ज्यादा बढ़ी

इस सर्वे का एक और अहम पहलू सामने आया है। सबसे ज्यादा गर्मी वाले ग्रामीण इलाकों में रोजाना इस्तेमाल की चीजों की खपत 11% बढ़ी। इसी जोखिम वाले शहरी इलाकों में यह वृद्धि सिर्फ 6% रही। इसकी वजह ठंडक, पानी की कमी पूरी करने और साफ-सफाई से जुड़े उत्पादों की जरूरत है। इसका मतलब है कि गर्मी का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। एयर कंडीशनर या कूलर खरीदने वाले परिवारों तक भी यह मामला नहीं रुका है।



कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी

गर्मी बढ़ने के साथ ठंडक देने वाले प्रोडक्ट्स की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इस साल मार्च से जून के बीच कोल्ड ड्रिंक्स की खपत 6% बढ़ी। टैल्कम पाउडर पर खर्च भी 13% तक बढ़ गया। टैल्कम पाउडर की खपत 9% बढ़ी, जबकि उस पर खर्च 13% ज्यादा हुआ।



ग्लूकोज पाउडर की खपत और खर्च दोनों में 8% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। शीतल पेय की खपत 6% बढ़ी और उस पर खर्च 7% ज्यादा रहा। त्वचा की क्रीम की खपत में भी 6% और खर्च में 5% की बढ़त देखी गई। बाल धोने के प्रोडक्ट की खपत 4% और खर्च 2% ज्यादा रहा। वहीं डिटर्जेंट की खपत 2% और खर्च 1% ज्यादा दर्ज हुआ।



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पंखा, कूलर और एसी की खरीद

गर्मी से राहत पाने के लिए लोगों ने ठंडक के उपकरण भी खूब खरीदे। सर्वे में शामिल हर तीन में से एक परिवार ने पंखा, कूलर या एसी (Air Conditioner) खरीदा। यानी कुल 35% परिवारों ने ऐसे उपकरण खरीदने की बात कही। इनमें से 75% खरीदारी सीधे गर्मी की वजह से हुई। घर से बाहर गर्मी का रस, छाछ-लस्सी, मिल्कशेक और कोल्ड कॉफी जैसी चीजों पर भी खर्च बढ़ा। यह खर्च मध्यम जोखिम वाले परिवारों के मुकाबले 10 से 24 पर्सेंट पॉइंट ज्यादा रहा।



बिजली-पानी के खर्च ने घटाई खरीद

बढ़े हुए बिजली-पानी के बिल ने कई गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी घटा दी। सबसे ज्यादा गर्मी वाले क्षेत्रों में अप्रैल-जून 2025 के मुकाबले 2026 में बदलाव साफ दिखा। चॉकलेट की खपत में इस दौरान 10% की गिरावट दर्ज हुई। दूध आधारित स्वास्थ्य पेय की खपत में भी 10% कमी आई।



मक्खन-पनीर की खपत में 1% की मामूली गिरावट देखी गई। इसका मतलब है कि परिवारों ने पूरा राशन कम नहीं किया। उन्होंने सिर्फ उन चीजों पर खर्च घटाया, जिन्हें टाला जा सकता है। यानी जरूरी चीजें बरकरार रहीं, लेकिन शौक वाली चीजों पर कैंची चली।



कुल मिलाकर यह सर्वे बताता है कि गर्मी अब सिर्फ मौसम की बात नहीं रही। यह सीधे घर की जेब और खरीदारी की आदतों तक पहुंच चुकी है। आने वाले सालों में अगर गर्मी और बढ़ती है, तो इसका असर और गहरा हो सकता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर हर आम परिवार की जेब से जुड़ी है। जब बिजली-पानी और गर्मी से बचाव पर खर्च बढ़ता है, तो इसका सीधा असर राशन और पोषण पर पड़ता है। संविधान हर नागरिक को स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों का अधिकार देता है, इसलिए खाने-पीने के बजट में कटौती चिंता की बात है।



यह सर्वे नीति बनाने वालों को यह समझने में मदद करता है कि जलवायु परिवर्तन आम परिवारों पर कैसे असर डाल रहा है। यह खबर उपभोक्ताओं, दुकानदारों और सरकार तीनों के लिए उपयोगी है। यह किसी वर्ग या समुदाय को निशाना नहीं बनाती, बल्कि तथ्यों पर आधारित है और सामाजिक व आर्थिक जागरूकता बढ़ाती है।



FAQ

  1. सर्वे के मुताबिक कितने प्रतिशत परिवारों का खर्च गर्मी से बढ़ा?
    वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर के सर्वे के अनुसार 88% परिवारों ने बताया कि मार्च से जून के बीच गर्मी की वजह से उनका खर्च बढ़ा। इसकी मुख्य वजह बढ़ा हुआ बिजली बिल, पानी की मरम्मत और ईंधन पर अतिरिक्त खर्च रही। यह सर्वे देश के 862 परिवारों पर किया गया था।
  2. गर्मी से कितने परिवारों को राशन का बजट घटाना पड़ा?
    सर्वे में शामिल 73% परिवारों ने बताया कि बिजली-पानी जैसे जरूरी खर्च पूरे करने के लिए उन्हें राशन का बजट घटाना पड़ा। सबसे ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में यह आंकड़ा 82% तक पहुंच गया, जबकि कम जोखिम वाले इलाकों में यह 64% रहा।
  3. गर्मी की वजह से किन चीजों की खपत सबसे ज्यादा बढ़ी?
    सर्वे के मुताबिक कोल्ड ड्रिंक्स की खपत 6%, टैल्कम पाउडर की खपत 9% और ग्लूकोज पाउडर की खपत 8% बढ़ी। इसके अलावा त्वचा की क्रीम की खपत में भी 6% की बढ़त दर्ज हुई। वहीं चॉकलेट और दूध आधारित पेय की खपत में गिरावट देखी गई।

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