शौक से न खाएं, ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक से मौत का आंकड़ा आपको हैरान कर देगा
Amresh Kushwaha | Sept 01, 2026, 12:28 IST
एंटीबायोटिक से मौत
ICMR की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बिना डॉक्टरी सलाह एंटीबायोटिक खाने से सुपरबग संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। 1.6 लाख मरीजों पर हुई इस स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- ICMR की स्टडीमें दवा प्रतिरोधीसंक्रमण को खतरनाकबताया गया है।
- 20 बड़ेअस्पतालों में एक लाख 60 हजारमरीजों पर स्टडी हुई।
- 61.1 प्रतिशत संक्रमणकार्बापेनमएंटीबायोटिक केप्रतिरोधी मिले।
- इनसंक्रमण से मौत औरइलाज खर्च दोनोंज्यादा पाए गए।
- डॉक्टरों ने सहीएंटीबायोटिक इस्तेमालपर जोर दिया है।
बड़े अस्पतालों में हुई स्टडी
इस दौरानकरीब एक लाख 60 हजार भर्तीमरीजों का डेटा जुटायागया। इसमें मुंबई केमहिम स्थित हिंदुजाअस्पताल के मरीज भीशामिल थे। यह स्टडी दलांसेट रीजनल हेल्थसाउथईस्ट एशिया नाम कीमेडिकल पत्रिका मेंछपी है।
चार बैक्टीरिया पर हुआ फोकस
कार्बापेनम को कुछ सालपहले तक गंभीर संक्रमणके इलाज की आखिरी दवामाना जाता था। लेकिनअब इसका इस्तेमाल पहलेसे कहीं ज्यादा बढ़गया है। यही वजह है किबैक्टीरिया इस दवा केखिलाफ प्रतिरोधी बनतेजा रहे हैं।
ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक
एक्सपर्ट का क्या कहना है
डॉ. वालिया नेबताया कि स्टडी मेंसाफ दिखा है किकार्बापेनम प्रतिरोधीसंक्रमण में मौत औरइलाज खर्च दोनों काफीज्यादा हैं। उन्होंनेकहा कि इसका हल सिर्फज्यादा ताकतवरएंटीबायोटिक बनानानहीं है। असली जरूरतबेहतर संक्रमण बचाव,समय पर जांच और सहीएंटीबायोटिक इस्तेमालकी है।
एंटीबायोटिक से मौत के आंकड़े क्या कहते हैं
एसिनेटोबैक्टर बॉमानीमें मौत दर 37.9प्रतिशत और 32.8प्रतिशत पाई गई।स्यूडोमोनास एरुगिनोसामें यह आंकड़ा 28.9प्रतिशत और 20.2प्रतिशत रहा। यानी हरमामले में प्रतिरोधीसंक्रमण ज्यादाजानलेवा साबित हुए।
ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक
इलाज पर भी आया ज्यादा खर्च
क्लेब्सिएला निमोनियामें यह खर्च 587 डॉलरऔर 505 डॉलर रहा।एसिनेटोबैक्टर बॉमानीमें यह आंकड़ा 655डॉलर और 436 डॉलर रहा।स्यूडोमोनास एरुगिनोसामें खर्च 702 डॉलर और510 डॉलर पाया गया।
इसके अलावा प्रतिरोधीसंक्रमण वाले मरीजोंको अस्पताल में भीज्यादा दिन रुकनापड़ा। ई कोली से जुड़ेप्रतिरोधी मामलों मेंमरीज औसतन 23.1 दिनभर्ती रहे। जबकिसामान्य मामलों में यहअवधि 17.8 दिन थी।
ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक
मुंबई के डॉक्टरों की राय
हालांकिमॉलिक्यूलरडायग्नोस्टिक्स की मददसे यह प्रक्रिया अबतेज हो सकती है।उन्होंने यह भी बतायाकि ऐसे मरीजों कोअक्सर एक साथ कईएंटीबायोटिक देनेपड़ते हैं। इससे इलाजका खर्च और भी बढ़जाता है।
डॉ. पंडित नेकहा कि अब होम केयरसेवाएं भी उपलब्ध हैं।कुछ मरीजों को नर्सिंगनिगरानी में घर पर हीइंजेक्शन वालीएंटीबायोटिक दी जासकती है। इससे उन्हेंलंबे समय तक अस्पतालमें रहने की जरूरतनहीं पड़ती।
ICMR की रिसर्च में एंटीबायोटिक
आगे क्या सावधानी जरूरी है
देशमें एंटीमाइक्रोबियलरेजिस्टेंस की निगरानीऔर मजबूत करने कीजरूरत है। इसके साथ हीसंक्रमण नियंत्रण केउपाय भी बढ़ाने होंगे।एंटीबायोटिक के सहीइस्तेमाल पर सख्ती सेध्यान देना होगा। साथही मरीजों को सही समयपर असरदार दवाएं मिलनाभी जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर लोगोंको बिना जरूरतएंटीबायोटिक न लेने औरडॉक्टर की सलाह माननेके लिए जागरूक करतीहै। साथ ही यह सरकारऔर अस्पतालों कीजिम्मेदारी को भीसामने लाती है किसंक्रमण रोकथाम पर कामहो। सही जानकारी सेलोग समय पर इलाज औरबचाव के फैसले ले सकतेहैं।
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