सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पैसों का हिसाब और घरेलू झगड़े क्रूरता नहीं

Aman Vaishnav | Jan 02, 2026, 16:22 IST
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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने अमेरिका में रहने वाले एक दंपती के केस में यह बड़ा फैसला सुनाया। पति का पत्नी पर पैसों का दबदबा होना 'क्रूरता' की श्रेणी में नहीं आता।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला



- पत्नी ने पति पर दहेज उत्पीड़न का केस किया था।


- पति ने घर के खर्च का एक्सेल शीट में हिसाब रखने को कहा।


- पत्नी को नौकरी छोड़कर गृहिणी बनना पड़ा।


- कोर्ट ने सभी आरोपों को शादी के सामान्य झगड़े कहा।


- बिना नुकसान के पैसों पर कंट्रोल क्रूरता नहीं माना ।



सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने कहा है कि पति का पत्नी पर पैसों का पूरा कंट्रोल क्रूरता नहीं माना जाएगा। अमेरिका में रहने वाले दंपती के केस में पत्नी के दहेज उत्पीड़न के आरोप खारिज हुए। कोर्ट बोला- ये शादी के रोजमर्रा झगड़े हैं। नुकसान साबित न हो तो मुकदमा नहीं चलेगा। इस फैसले ने शादी के केसों में सावधानी बरतने को कहा।



शादी में पैसों का कंट्रोल

पत्नी ने शिकायत की थी कि पति ने घर के हर पैसे का हिसाब रखा। एक्सेल शीट में रोज खर्च नोट करना पड़ा। पति माता-पिता को लाखों रुपए भेजते थे। कोर्ट बोला ये शादी का रोजमर्रा का झगड़ा है।



पत्नी सॉफ्टवेयर कंसल्टेंट थी। अमेरिका में रहते हुए नौकरी छोड़ दी। पति ने उसे घर संभालने को कहा गया। कोर्ट ने इसे क्रूरता नहीं माना। ये कहा कि शादी में ऐसा होता रहता है।



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रोजाना खर्च के लिए गिड़गिड़ाना

पत्नी ने कहा पति ने पैसे पर पूरा कंट्रोल रखा। रोज जरूरत के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा। बच्चा होने के बाद वजन घटाने का दबाव डाला। कोर्ट ने इसे हल्का बताया।



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गर्भावस्था में लापरवाही

पत्नी बोली कि पति ने गर्भावस्था में ध्यान नहीं दिया। डिलीवरी के बाद ताने भी मारे। मेरे वजन पर कमेंट किए। कोर्ट बोला ये क्रूरता नहीं है। मुकदमे से सजा नहीं मिलेगी। सबूत न होने पर आरोप कमजोर बताया।



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एक करोड़ दहेज की मांग

पत्नी ने कहा पति और ससुराल वालों ने एक करोड़ मांगे। कोर्ट ने इस बात को अस्पष्ट बताया। कोई सबूत या सामान नहीं मिला। ऐसे आरोप साबित नहीं होते।



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क्रूरता साबित करने के सख्त नियम क्या हैं?

कोर्ट ने कहा है कि शादी के छोटे-मोटे झगड़ों को जबरदस्ती केस बनाकर कोर्ट न लाएं। क्रूरता का आरोप तभी माना जाएगा जब गलत व्यवहार लगातार हुआ हो और हर आरोपी के खिलाफ साफ और ठोस सबूत हों।



भारतीय समाज का आईना

फैसले में कोर्ट ने कहा। ये भारतीय समाज की सच्चाई है। पुरुष अक्सर पैसों पर राज करते हैं। कानूनी लड़ाई इसका हल नहीं है। स्कोर सेटलिंग का जरिया न बने।



शादी के केसों में कोर्ट की सावधानी क्यों जरूरी?

कोर्ट ने जोर दिया है कि शादी के मामलों में आरोपों की अच्छी तरह जांच की जाए। इससे कानून का दुरुपयोग न हो और न्याय की कोई गलती न हो। अदालत ने हकीकत को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने को कहा है ताकि बेगुनाह लोग झूठे मुकदमों में न फंसें।



मुकदमे से पहले सोचें

यह फैसला सिखाता है कि शादी में छोटे-मोटे झगड़े आम हैं। रिश्ता बचाने की कोशिश करनी चाहिए। कोर्ट के अनुसार, जब तक कोई बड़ा नुकसान साबित न हो तब तक मुकदमा नहीं करना चाहिए। कोर्ट उसे खारिज कर देगा।



सोर्स क्रेडिट

- सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया का आधिकारिक फैसला (जस्टिस बीवी नागरत्ना बेंच)।


- लाइव लॉ और बार एंड बेंच रिपोर्ट्स (जनवरी 2026 तक अपडेटेड)।


- मूल मामले की हियरिंग डिटेल्स सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट से।





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