सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, शादी से पहले फिजिकल रिलेशन समझ से परे

Sandeep Kumar | Feb 16, 2026, 21:42 IST
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शादी से पहले शारीरिक संबंध को लेकर सवाल उठाए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर लड़की गंभीर थी, तो दुबई क्यों गई।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले शारीरिक संबंध को लेकर सवाल उठाए।
  • युवती ने आरोपी पर शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया।
  • आरोपी पहले से शादीशुदा था और दूसरी शादी करने का आरोप भी था।
  • जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर महिला गंभीर थी, तो दुबई नहीं जाती।
  • कोर्ट ने युवती को मुआवजा देने का निर्देश और समझौते की संभावना तलाशने को कहा।

News in Detail

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रेप के आरोपों से जुड़े मामले में हैरानी जताई। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि लड़का और लड़की शादी से पहले अजनबी होते हैं। जस्टिस नागरत्ना के साथ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच एक जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में एक व्यक्ति पर शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है। आरोपी पर पहले से शादीशुदा होने और दूसरी महिला से शादी करने का आरोप भी है।



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ये है पूरा मामला

सरकारी वकील के अनुसार, लगभग 30 साल की युवती की 2022 में एक मैट्रिमोनियल साइट पर मुलाकात एक शख्स से हुई थी। आरोप है कि शख्स ने युवती से शादी का वादा करके दिल्ली और दुबई में शारीरिक संबंध बनाए। युवती का दावा है कि शख्स के कहने पर वह दुबई गई थी।



वहां आरोपी ने उसकी सहमति के बिना अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किए और विरोध करने पर वायरल करने की धमकी दी। शिकायतकर्ता को बाद में पता चला कि आरोपी ने 19 जनवरी, 2024 को पंजाब में दूसरी शादी कर ली थी।



इस मामले में निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि शादी का वादा शुरू से ही झूठा था, क्योंकि वह पहले से शादीशुदा था। आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।



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अगर महिला गंभीर थी, तो दुबई नहीं जाती

जस्टिस नागरत्ना ने सवाल किया कि युवती दुबई क्यों गई। सरकारी वकील ने बताया कि दोनों शादी की योजना बना रहे थे। जस्टिस ने कहा कि अगर महिला गंभीर थी तो दुबई नहीं जाती। उन्होंने कहा कि यह मामला सजा देने वाला नहीं है। संबंध आपसी सहमति से थे। कोर्ट ने आरोपी के वकील से युवती को मुआवजा देने का निर्देश दिया। बेंच ने युवती के वकील को समझौते की संभावना तलाशने को कहा। मामले की सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी गई।



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सहमति से संबंध और रेप में फर्क

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने 24 नवंबर 2025 को एक फैसले में कहा था कि सहमति से बना रिश्ता टूटने पर उसे रेप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि रेप जैसे आरोप तभी लगाए जाएं, जब जबरदस्ती, डर, दबाव या सहमति की कमी हो।



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