ईवी की हरी प्लेट बनी मुसीबत, रात के अंधेरे में नहीं दिखते नंबर, उपाय सुझाने केंद्र से मांगी मदद

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) अब कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए चिंता का नया विषय बन गई हैं। दिक्कत यह है कि हाईटेक कैमरों में रात के समय ईवी की हरे रंग की नंबर प्लेट स्पष्ट दिखाई नहीं देती।

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VINAY VERMA
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Chhattisgarh traffic police ev green plate issue

NEWS IN SHORT 

  • ईवी गाड़ियां कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए सिरदर्द बन रही है। 
  • रात के समय अंधेरे में ईवी की हरे रंग की नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं दिखाई देती है। 
  • गलत चालान के बाद तकनीकी पेच सुलझाने के लिए केंद्र से गुहार लगाई है।
  • छत्तीसगढ़ में ईवी गाड़ियों की संख्या 1.50 लाख है।
  • 2027 तक 15 प्रतिशत गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर काम।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली गाड़ियां (ईवी) अब ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। समस्या की जड़ यह है कि इन वाहनों की 'हरी नंबर प्लेट', जो रात के अंधेरे और कैमरों की लाइट में धुंधली हो जाती है। जिससे ई-चालान काटने और अपराधियों की पहचान करने में भारी दिक्कत आ रही है। 

रायपुर में गलत चालान के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। जिसके चलते राज्य सरकार ने इस तकनीकी पेच को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। 2027 तक 15% ईवी (EV) का लक्ष्य रखने वाले राज्य के सामने अब एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सवाल यह है कि भविष्य में 'ग्रीन मोबिलिटी' के साथ 'सुरक्षा' का तालमेल कैसे बैठाया जाए।

“मिक्स” हो जाती है हरी नेम प्लेट

वर्तमान नियमों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हरे रंग की नंबर प्लेट निर्धारित है। निजी ईवी वाहनों में हरे बैकग्राउंड पर सफेद अक्षर और व्यावसायिक ईवी वाहन नंबर प्लेट में हरे बैकग्राउंड पर पीले अक्षर होते हैं। रात में सड़क किनारे लगे कैमरों और ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम में यह रंग पर्याप्त कॉन्ट्रास्ट नहीं दे पा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हरे रंग की प्लेट अंधेरे में आसपास के वातावरण में घुल-मिल जाती है। इस कारण कैमरों द्वारा वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से कैप्चर नहीं हो पाता है। इसका असर ई-चालान प्रणाली पर भी पड़ रहा है। कई मामलों में नंबर गलत पढ़ा जा रहा है और निर्दोष वाहन मालिकों को चालान जारी हो रहा है।

रायपुर में सामने आए 38 मामले

 रायपुर पुलिस के सामने अब तक ऐसे 38 मामले आए हैं। इनमें गलत वाहन नंबर के आधार पर चालान जारी हुआ है। बाद में जांच में पाया गया कि कैमरे में नंबर स्पष्ट नहीं दिखा और मिलते-जुलते नंबर वाले दूसरे वाहन पर चालान चला गया।

भविष्य में बड़ी बन सकती है चुनौती

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। इसके कारण भविष्य में कानून-व्यवस्था के लिए जोखिम भी बन सकती है। ईवी की नंबर प्लेट रात में स्पष्ट न दिखने की जानकारी अपराधियों के लिए मौका बन सकती है। ऐसी स्थिति में वे पुलिस से बचने के लिए जानबूझकर इन वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

केंद्र तय करता है नंबर प्लेट का रंग

 परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी. रविशंकर ने स्पष्ट किया है कि नंबर प्लेट का रंग निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। राज्य सरकार अपने स्तर पर इसमें बदलाव नहीं कर सकती।

इस संबंध में राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। साथ ही इस समस्या के समाधान के लिए दिशा-निर्देश मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि या तो नंबर प्लेट के रंग में संशोधन किया जाए या फिर ऐसी रिफ्लेक्टिव तकनीक अपनाई जाए जिससे रात में भी नंबर स्पष्ट दिखाई दे।

तेजी से बढ़ रही ईवी की संख्या

 छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जुलाई 2023 तक राज्य में पंजीकृत ईवी वाहनों की संख्या 69 हजार 662 थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में यह आंकड़ा 1.50 लाख के पार पहुंच चुका है।

राज्य सरकार की ई-वाहन नीति के तहत एक बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। इसके अनुसार 2027 तक नई पंजीकृत गाड़ियों में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी ईवी (EV) की होगी। पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को ध्यान में रखते हुए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है।

ई-वाहन नीति के तहत प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ सरकार की ई-वाहन नीति के तहत ई-कार खरीदने पर 1.5 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा पंजीयन शुल्क और अन्य करों में भी भारी छूट दी जा रही है। यही कारण है कि लोग अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पर्यावरण के लिहाज से यह पहल सकारात्मक है, लेकिन तकनीकी और निगरानी संबंधी व्यवस्थाओं को भी समान गति से अपडेट करना जरूरी हो गया है।

तकनीकी सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का समाधान बहुआयामी होना चाहिए। एक ओर नंबर प्लेट के रंग और डिजाइन में सुधार पर विचार किया जाना चाहिए। दूसरी ओर ट्रैफिक कैमरों और एएनपीआर सिस्टम को भी अपडेट करने की जरूरत है।

इससे ये सिस्टम कम रोशनी में भी वाहनों की सटीक पहचान कर सकें। फिलहाल राज्य सरकार केंद्र के जवाब का इंतजार कर रही हैं। यदि समय रहते आवश्यक संशोधन नहीं किए गए, तो ईवी की बढ़ती संख्या के साथ यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

क्यों आती है समस्या, जानिए कारण

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हरी नंबर प्लेट रात में नहीं दिखती। इसका बड़ा कारण 'कलर कंट्रास्ट' और 'इंफ्रारेड (IR) रिफ्लेक्शन' का कम अंतर होना है। ट्रैफिक कैमरे का एएनपीआर (ANPR) सिस्टम रात में इंफ्रारेड लाइट का उपयोग करते हैं। सफेद या पीली प्लेट पर यह लाइट सही काम करती है। लेकिन गहरे हरे रंग पर अक्षर साफ नहीं दिखते।

नंबर प्लेट की 'रेट्रो-रिफ्लेक्टिव' कोटिंग रोशनी को बहुत फैलाती है। कैमरे के फ्लैश से प्लेट एक चमकता धब्बा बन जाती है। इससे कैमरे के सेंसर नंबर और बैकग्राउंड नहीं पहचान पाते। अंत में पूरी नंबर प्लेट धुंधली नजर आने लगती है। यही वजह है कि रात में नंबर पढ़ना मुश्किल होता है।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025, छत्तीसगढ़ न्यूज 

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