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रायपुर. देश में दशकों से खून-खराबे और खौफ का पर्याय बने नक्सलवाद पर अब निर्णायक लड़ाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 के बाद नई सूची जारी की थी। नई सूची में यह साफ कर दिया है कि लाल आतंक का दायरा सिमटकर महज 6 जिलों तक रह गया है। इनमें सबसे ज्यादा चार जिले छत्तीसगढ़ के हैं।
छत्तीसगढ़ के ये जिले अब भी सूची में शामिल हैं।
• सुकमा
• नारायणपुर
• बीजापुर
• गरियाबंद
पूरी तहर खत्म नहीं हुआ नक्सलवाद
बस्तर संभाग के तीन मजबूत गढ़ सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर वर्षों से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे हैं। वहीं रायपुर संभाग का गरियाबंद भी अब संवेदनशील श्रेणी में बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन इलाकों में अब नक्सल नेटवर्क बेहद सीमित हो चुका है। पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
31 मार्च डेडलाइन: निर्णायक ऑपरेशन की तैयारी
केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि 31 मार्च को लक्ष्य मानते हुए इन शेष जिलों में व्यापक और अंतिम अभियान चलाया जाएगा। सुरक्षा बलों की रणनीति अंतिम चरण में है। खुफिया तंत्र सक्रिय है। ड्रोन निगरानी और विशेष ऑपरेशन ग्रुप की तैनाती बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक ऑपरेशन हो सकता है। ये ऑपरेशन लाल गलियारे की कमर तोड़ देगा।
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पहले 11 थे, अब सिर्फ छह
दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार देश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या 11 थी। इनमें छत्तीसगढ़ के सात जिले शामिल थे। अब तस्वीर तेजी से बदली है। दंतेवाड़ा, कांकेर, बस्तर, चौकी मोहला-मानपुर जिलों को सूची से बाहर कर दिया गया है। यह सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विकास योजनाओं का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि गरियाबंद अब भी सूची में बरकरार है।
अन्य राज्य भी रडार पर
पहले प्रभावित जिलों में झारखंड का पश्चिम सिंहभूम, ओडिशा का कंधमाल, महाराष्ट्र का गढ़चिरौली और मध्यप्रदेश का बालाघाट भी शामिल थे। अब केंद्र की सीधी नजर अंतिम 6 जिलों पर टिकी है।संदेश साफ है, लाल गलियारा अब इतिहास बनने की ओर है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि क्या देश नक्सलवाद के अंतिम अध्याय को बंद करने में सफल हो पाएगा।
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