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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- पंजीकरण में पिछड़ा MP: मध्य प्रदेश 480 ड्रोन के साथ राष्ट्रीय सूची में 14वें स्थान पर खिसका।
- महाराष्ट्र सबसे आगे: महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन रजिस्ट्रेशन के साथ देश में नंबर वन बना हुआ है।
- लोकसभा में खुलासा: नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री ने लिखित जवाब में यह आधिकारिक आंकड़े पेश किए।
- नियमों में बड़ी ढील: 90% हवाई क्षेत्र अब 'ग्रीन ज़ोन', ड्रोन उड़ाने के लिए परमिट की जरूरत नहीं।
- प्रक्रिया हुई आसान: पायलट सर्टिफिकेट के लिए अब पासपोर्ट की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म किया।
NEWS IN DETAIL
देश में आज कल हर तरफ 'ड्रोन' का शोर है। सरकार कह रही है कि खेती से लेकर दवाइयां सब कुछ आसमान से पहुंचेंगी। जब बात आंकड़ों की आती है तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का हाल काफी सुस्त नजर आता है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में जो आंकड़े सामने आए वो चौंकाने वाले हैं। जहां महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य आसमान छू रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश की 'ड्रोन' फाइलें दफ्तरों में कैद हैं।
लोकसभा में रखे गए आंकड़े
विपक्ष की सांसद साजदा अहमद ने सदन में ड्रोन को लेकर सवाल किया। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित जवाब दिया। 31 जनवरी 2026 तक के ताजा आंकड़ों ने बता दिया कि कौन सा राज्य कितनी तैयारी में है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने बताया कि सरकार ने नियम बहुत आसान कर दिए हैं। 2021 के ड्रोन नियमों को 2024 तक कई बार बदला गया ताकि आम आदमी भी इसे आसानी से उड़ा सके।
रजिस्ट्रेशन की रेस: कौन कहां खड़ा है?
अगर हम राज्यों की लिस्ट देखें, तो मध्य प्रदेश का नंबर 14वें स्थान पर आता है। यह काफी चिंता की बात है क्योंकि एमपी खुद को 'ड्रोन हब' बनाने का दावा करता रहा है।
| राज्य | ड्रोन पंजीकरण संख्या |
| महाराष्ट्र | 8,210 |
| तमिलनाडु | 5,878 |
| तेलंगाना | 3,657 |
| दिल्ली | 3,070 |
| हरियाणा | 2,179 |
| मध्य प्रदेश | 480 |
| छत्तीसगढ़ | 161 |
यह टेबल साफ दिखाती है कि महाराष्ट्र के मुकाबले एमपी कहीं भी नहीं टिकता।
नियमों में ढील, फिर भी क्यों है सुस्ती?
केंद्र सरकार ने ड्रोन उड़ाने के लिए बहुत बड़े बदलाव किए हैं। अब करीब 90% भारतीय हवाई क्षेत्र को 'ग्रीन ज़ोन' बना दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि यहां ड्रोन उड़ाने के लिए आपको बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके अलावा, रिमोट पायलट बनने के लिए अब पासपोर्ट की मजबूरी भी खत्म कर दी गई है। सरकार का मकसद है कि कृषि, सर्वे और आपदा के समय ड्रोन का भरपूर इस्तेमाल हो, लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जागरूकता की कमी साफ दिख रही है।
चुनावी वादे और जमीनी हकीकत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब सरकार 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात करती है, तो फिर रजिस्ट्रेशन की संख्या इतनी कम क्यों है? मध्य प्रदेश जैसे राज्य में, जहां खेती का रकबा इतना बड़ा है, वहां सिर्फ 480 ड्रोन होना यह दर्शाता है कि किसानों तक तकनीक पहुंचने में अभी वक्त लगेगा। छत्तीसगढ़ का हाल तो और भी बुरा है, यहां आंकड़ा अभी 200 भी पार नहीं कर पाया है।
नमो ड्रोन दीदी में भी मात्र 89 को प्रशिक्षण
कृषि कार्यों में उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव जैसी कामों में ड्रोन का उपयोग के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना बनाई गई है। इस योजना को लेकर भी एमपी में कोई खास रिस्पांस देखने को नहीं मिला है। 2022 में शुरु हुइ इस योजना में अब तक केवल 89 महिलाओं को ही प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही निजी तौर पर भी लोगों में ड्रोन रजिस्ट्रेशन को लेकर कोई खास जागरुकता दिखाई नहीं देती है।
निष्कर्ष: क्या होगा आगे?
अगर मध्य प्रदेश को ड्रोन के मामले में आगे बढ़ना है, तो उसे अपनी नीतियों को जमीन पर उतारना होगा। केवल घोषणाओं से आसमान में ड्रोन नहीं उड़ेंगे। ट्रेनिंग सेंटर बढ़ाने होंगे और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और भी ज्यादा 'यूजर फ्रेंडली' बनाना होगा।
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एमपी ड्रोन पॉलिसी
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