मध्य प्रदेश बजट 2026-27 : कर्मचारियों को मिलेगी राहत या फिर नाराजगी बढ़ाएगी सरकार की चुनौती

Sanjay Sharma | Feb 16, 2026, 20:06 IST
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मध्य प्रदेश के बजट 2026-27 से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें हैं। कर्मचारी संगठनों ने वेतनमान, डीए और कैशलेस मेडिकल फैसिलिटी में सुधार की मांग की है।

News in Short

  • मध्य प्रदेश विधानसभा में 18 फरवरी को पेश किया जाएगा 2026-27 का बजट।
  • बजट से प्रदेश के लगभग 21 लाख कर्मचारी और पेंशनभोगियों को बड़ी उम्मीदें।
  • केंद्र के समान डीए और आठवें वेतनमान पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है।
  • कर्मचारी संगठन कैशलेस मेडिकल फेसिलिटी और पूरे वेतन की मांग कर रहे हैं।
  • बजट से स्कूल, कॉलेज और विभागों में खाली पद भरने के प्रावधान की भी आस है।

News in Detail

BHOPAL.मध्य प्रदेश के इस साल के बजट से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बजट में डीए और वेतनमान में सुधार संबंधी मांगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, कर्मचारियों की इन अपेक्षाओं को पूरी करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

18 फरवरी को बजट

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार 18 फरवरी को अपना बजट पेश करने जा रही है। यह बजट प्रदेश के करीब 21 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य की दिशा तय करेगा। एक तरफ 'लाड़ली बहना' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का वित्तीय भार है, तो दूसरी तरफ केंद्र के समान डीए और आठवें वेतनमान की गूंजती मांगें।

क्या सरकार चुनावी वादों और खजाने की खाली होती तिजोरी के बीच संतुलन बना पाएगी, या फिर यह बजट कर्मचारियों की 'उम्मीदों' पर 'उपेक्षा' की मुहर लगा देगा? वित्तीय दबाव और कर्मचारियों के आक्रोश के बीच फंसी सरकार के लिए यह बजट किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। राज्य में 7 लाख नियमित कर्मचारी, 4 लाख पेंशनर और लगभग 10 लाख आउटसोर्स, अंशकालिक और संविदा कर्मचारी हैं।

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डीए के बकाया भुगतान की चुनौती

कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी मांग 3 प्रतिशत DA (महंगाई भत्ता) की बकाया राशि का भुगतान है, जो जुलाई 2025 से लंबित है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारियों को 58 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को केवल 55 प्रतिशत ही मिलता है। इस 3 प्रतिशत का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है और खजाने की खस्ता हालत के कारण सरकार इसे चुकाने में असमर्थ है। इस राशि का भुगतान हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति और भी अधिक दबाव में आ रही है।

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आठवां वेतनमान देने का दबाव

कर्मचारी संगठन 8वें वेतनमान की भी मांग कर रहे हैं और इस पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि, प्रदेश सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कर्मचारी संगठन इस मांग को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। आठवें वेतनमान की घोषणा से राज्य सरकार के खजाने पर और दबाव बढ़ सकता है, और यह भी कर्मचारियों की उम्मीदों पर असर डाल सकता है।

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कर्मचारियों को राहत की आस

मध्य प्रदेश के 96 हजार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी बजट से राहत की उम्मीद है। 2019 के बाद नियुक्ति पाने वाले इस श्रेणी के कर्मचारियों को तीन साल तक पूरा वेतन नहीं मिला।

2022 के बाद नियुक्त हजारों कर्मचारियों के वेतन में अब भी कटौती हो रही है। इन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से पूरी तनख्वाह और बकाया एरियर देने की उम्मीद है। हाईकोर्ट ने हाल ही में इस पर फैसला दिया था, जिसने कर्मचारियों की आस बढ़ा दी है।

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आउटसोर्स-संविदाकर्मियों की मांग

प्रदेश के आउटसोर्स, संविदा और अंशकालिक कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा नाराजगी देखी जा रही है। ये कर्मचारी निजी कंपनियों के जरिए काम कर रहे हैं और उनके वेतन में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय करने की बात की है, लेकिन इससे सरकार पर हजारों करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।

अतिथि शिक्षक और गेस्ट फैकल्टी की मांग

स्कूलों और कॉलेजों में अतिथि शिक्षक और गेस्ट फैकल्टी की संख्या भी बड़ी है। इन कर्मचारियों को फॉलेन आउट के नियमों में बदलाव और निर्धारित वेतन की आवश्यकता है। इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है और आर्थिक बोझ के आंकलन के बाद ही कोई निर्णय लेने का संकेत दिया है।

कैशलेस मेडिकल फैसिलिटी की मांग

सरकारी कर्मचारियों ने कैशलेस मेडिकल फैसिलिटी की मांग पिछले पांच सालों से की है। सरकार इस पर घोषणा तो करती रही है, लेकिन इसे लागू करने के लिए सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा, जिससे सरकार अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है।

सरकारी बजट में 7.28 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार ने 2028 तक राज्य के बजट को 7.28 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाली हिस्सेदारी में कमी के कारण प्रदेश के खजाने पर दबाव बढ़ सकता है। अगले पांच साल में राज्य को केंद्र से करीब 7,500 करोड़ रुपए कम मिल सकते हैं, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति और कठिन हो सकती है।

निष्कर्ष

कर्मचारी वर्ग को सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन सरकार के लिए यह बजट पेश करना और कर्मचारियों की मांगों को पूरा करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। देखना यह है कि सरकार कैसे अपने आर्थिक दबाव को संतुलित करती है और कर्मचारियों की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करती है।

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