माता-पिता का ध्यान नहीं रखा तो कटेगी 10% सैलरी, तेलंगाना सरकार ला रही नया कानून

Aman Vaishnav | Jan 14, 2026, 08:08 IST
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telangana government salary cut parents care
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तेलंगाना सरकार बुजुर्गों के लिए एक सख्त कानून लाने जा रही है। अब माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की सैलरी कटेगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इसकी घोषणा की है। सरकार ने दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर्स के लिए भी बड़े ऐलान किए हैं।

News In Short

  • माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की सैलरी कटेगी।
  • माता-पिता की शिकायत पर सैलरी से 10% कटौती होगी।
  • यह पैसा सीधे बुजुर्गों के बैंक खातों में जाएगा।
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रणाम डे-केयर सेंटर बनेंगे।
  • दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर्स के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं शुरू होगी।

News In Detail

बुजुर्गों के सम्मान में सख्त कदम

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुजुर्गों के लिए बड़ा ऐलान किया। अब सरकारी कर्मचारी माता-पिता की उपेक्षा नहीं कर पाएंगे। माता-पिता की देखभाल करना अब कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। कर्मचारियों की सैलरी का हिस्सा सीधे माता-पिता को मिलेगा। इससे बुजुर्गों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी।

सैलरी से 10 प्रतिशत की कटौती

नया कानून कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालेगा। यदि माता-पिता शिकायत करेंगे तो 10% सैलरी कटेगी। यह पैसा कर्मचारी के अकाउंट से खुद-ब-खुद कट जाएगा। फिर इसे माता-पिता के बैंक खाते में भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।

प्रणाम डे-केयर सेंटर की स्थापना

सरकार बुजुर्गों के लिए खास केंद्र भी बना रही है। इन केंद्रों का नाम प्रणाम डे-केयर सेंटर रखा गया। यहां बुजुर्गों को दिन में सहारा और साथ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा पर जोर दिया है।

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दिव्यांगों के लिए आधुनिक उपकरणों का वितरण

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सरकार ने 50 करोड़ आवंटित किए। उन्हें मोटराइज्ड वाहन और बैटरी व्हीलचेयर मुफ्त दी जा रही। लैपटॉप और सुनने की मशीनें भी वितरित की गईं। नवविवाहित दिव्यांग जोड़ों को 2 लाख रुपए भी मिलेंगे। शिक्षा और रोजगार में उन्हें विशेष कोटा दिया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ने को कहा।

ट्रांसजेंडर्स के लिए नगर निगम में जगह

अगले चुनावों के लिए एक बड़ी घोषणा की गई है। सभी नगर निगमों में ट्रांसजेंडर व्यक्ति नामांकित किए जाएंगे। उन्हें को-ऑप्शन सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। हर नगर निगम में एक पद आवंटित होगा। इससे उन्हें अपनी समस्याएं उठाने में मदद मिलेगी। सरकार दिव्यांगों के लिए पहले ही योजनाएं लाई है।

नई स्वास्थ्य नीति और आगामी बजट

वर्ष 2026-2027 के बजट में नई स्वास्थ्य नीति आएगी। सरकार राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने को प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना है। मुख्यमंत्री (तेलंगाना कांग्रेस सीएम रेवंत रेड्डी) ने पूर्व मंत्री जयपाल रेड्डी को भी याद किया। वे दिव्यांगता के बावजूद सभी के लिए प्रेरणा बने रहे। सरकार उनके आदर्शों पर चलते हुए काम कर रही है।

Sootr Knowledge

असम के बाद तेलंगाना ऐसा कानून लाने वाला राज्य बनेगा। सरकारी कर्मचारियों को अब अपने परिवार का ख्याल रखना होगा। बुजुर्ग अपनी शिकायत जिला अधिकारी या संबंधित विभाग में कर सकेंगे। शिकायत सही पाए जाने पर ही सैलरी कटौती लागू होगी।

असम में पहले से मौजूद है यह कानून

असम में यह कानून पहले से ही प्रभावी है। यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की उचित देखभाल नहीं करता है, तो कानून के अनुसार उसके वेतन से 10% से 15% तक की कटौती की जा सकती है। यह नियम केवल माता-पिता तक सीमित नहीं है। दिव्यांग भाई-बहनों की देखभाल न करने पर भी सैलरी काटने का प्रावधान है।

आगे क्या

इस कानून से बुजुर्गों के प्रति सामाजिक व्यवहार बदलेगा। सरकारी कर्मचारियों में अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी बढ़ेगी। अन्य राज्य भी इस मॉडल को भविष्य में अपना सकते हैं। इससे पारिवारिक ढांचे को कानूनी तौर पर मजबूती मिलेगी।

निष्कर्ष

तेलंगाना सरकार का यह फैसला मानवीय दृष्टिकोण वाला है। यह न केवल बुजुर्गों को आर्थिक आजादी देगा, बल्कि दिव्यांगों और वंचित वर्गों को समाज में बराबरी का हक भी प्रदान करेगा।

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