अमेरिका का 100% टैरिफ वाला खतरनाक बिल, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर
Manya Jain | Sept 17, 2026, 15:28 IST
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अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त बिल ला रहा है। ट्रंप को 100% टैरिफ की ताकत मिलने से भारत और चीन जैसे देश निशाने पर हैं। भारत ने राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर बताया है।
अमेरिकी संसद ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त बिल पास करने की तैयारी कर ली है। यह कानून बनने पर ट्रंप को 100% टैरिफ लगाने की ताकत मिल जाएगी। भारत और चीन समेत 5 देश इसके निशाने पर हैं।
भारत ने अपना रुख साफ रखते हुए कहा है कि वह राष्ट्रीय हित देखकर ही तेल खरीदता है। अगर यह टैरिफ लागू हुआ, तो भारत के कई उद्योगों पर बुरा असर पड़ सकता है।
इस नए अमेरिकी कानून का नाम लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 रखा गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसे आगे बढ़ाने का प्रस्ताव 214 के मुकाबले 211 वोटों से पास हुआ है।
इससे पहले अगस्त में ऊपरी सदन ने भी इसे भारी बहुमत से मंजूरी दे दी थी। वहां यह बिल 86-11 वोटों से पास हुआ था। अब सिर्फ राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की देरी है। हस्ताक्षर होते ही यह एक कड़ा कानून बन जाएगा।
ट्रंप के इस नए कानून का मकसद रूस की आर्थिक कमर तोड़ना है। अमेरिका चाहता है कि रूस की एनर्जी सेक्टर से कमाई पूरी तरह रुक जाए। इससे रूस यूक्रेन युद्ध में और पैसा नहीं झोंक पाएगा।
इस कानून की गाज उन टॉप 5 देशों पर गिरेगी, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल-गैस खरीदते हैं। इस लिस्ट में भारत और चीन के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। यह कानून ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों पर भी सख्ती करेगा।
इन धमकियों के बीच भारत ने अपना रुख एकदम साफ रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर बयान दिया है।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी जरूरत, राष्ट्रीय हित और ग्लोबल मार्केट की कीमतों को देखकर ही रूस से तेल खरीदता है। उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में पुराना और मजबूत रिश्ता है। दोनों देश कुडनकुलम जैसे परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट पर भी साथ काम कर रहे हैं। भारत इस साझेदारी को आगे भी जारी रखना चाहता है।
यह मुद्दा भारत के लिए काफी गंभीर है। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसमें से 35% से ज्यादा हिस्सा अकेले रूस से आता है। रूस भारत को सस्ते दाम पर तेल देता है, इसलिए यह हिस्सेदारी काफी बड़ी है।
अगर अमेरिका ने 100% टैरिफ लागू कर दिया, तो इसका असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात पर भी बड़ी मार पड़ सकती है। अमेरिका भारत के कई सामानों पर टैक्स बढ़ा सकता है।
इसका सबसे ज्यादा नुकसान इलेक्ट्रॉनिक्स खासकर स्मार्टफोन को झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा दवाइयां, कपड़ा उद्योग, गहने और ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। इससे इन सेक्टरों में जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
अगर टैरिफ लागू होता है, तो भारत को महंगे विकल्पों से तेल मंगाना पड़ सकता है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका है।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में हर राज्य के आम नागरिक को इसका असर महसूस हो सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत अपनी जरूरत, राष्ट्रीय हित और ग्लोबल मार्केट में कीमतों को देखकर ही रूस से तेल खरीदता है। भारत और रूस के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में पुराना और बेहद मजबूत रिश्ता है। दोनों देश लंबे समय से असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारत इस साझेदारी को आगे भी जारी रखना चाहता है।"
(स्रोत: विदेश मंत्रालय, भारत सरकार)
अगर अमेरिकी टैरिफ की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
इन राज्यों में कृषि उपज की ढुलाई और स्थानीय व्यापार पर भी महंगे डीजल का बोझ पड़ सकता है, इसलिए यह खबर इन राज्यों के आम लोगों के लिए भी अहम है। (डोनाल्ड ट्रंप)
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भारत ने अपना रुख साफ रखते हुए कहा है कि वह राष्ट्रीय हित देखकर ही तेल खरीदता है। अगर यह टैरिफ लागू हुआ, तो भारत के कई उद्योगों पर बुरा असर पड़ सकता है।
क्या है यह नया बिल
इससे पहले अगस्त में ऊपरी सदन ने भी इसे भारी बहुमत से मंजूरी दे दी थी। वहां यह बिल 86-11 वोटों से पास हुआ था। अब सिर्फ राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की देरी है। हस्ताक्षर होते ही यह एक कड़ा कानून बन जाएगा।
अमेरिका के निशाने पर कौन-कौन से देश
इस कानून की गाज उन टॉप 5 देशों पर गिरेगी, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल-गैस खरीदते हैं। इस लिस्ट में भारत और चीन के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। यह कानून ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों पर भी सख्ती करेगा।
भारत ने दिया साफ जवाब
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी जरूरत, राष्ट्रीय हित और ग्लोबल मार्केट की कीमतों को देखकर ही रूस से तेल खरीदता है। उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में पुराना और मजबूत रिश्ता है। दोनों देश कुडनकुलम जैसे परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट पर भी साथ काम कर रहे हैं। भारत इस साझेदारी को आगे भी जारी रखना चाहता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर
अगर अमेरिका ने 100% टैरिफ लागू कर दिया, तो इसका असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात पर भी बड़ी मार पड़ सकती है। अमेरिका भारत के कई सामानों पर टैक्स बढ़ा सकता है।
इसका सबसे ज्यादा नुकसान इलेक्ट्रॉनिक्स खासकर स्मार्टफोन को झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा दवाइयां, कपड़ा उद्योग, गहने और ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। इससे इन सेक्टरों में जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में हर राज्य के आम नागरिक को इसका असर महसूस हो सकता है।
एक्सपर्ट कोट्स
(स्रोत: विदेश मंत्रालय, भारत सरकार)
लोकल कनेक्शन
इन राज्यों में कृषि उपज की ढुलाई और स्थानीय व्यापार पर भी महंगे डीजल का बोझ पड़ सकता है, इसलिए यह खबर इन राज्यों के आम लोगों के लिए भी अहम है। (डोनाल्ड ट्रंप)
ये भी पढ़ें...
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यूपीआई पेमेंट पर किन्हें मिलेगी छूट और किन पर लगेगा जुर्माना, thesootr पर जानें सब कुछ
LPG E-KYC के नाम पर ठगी, गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाकर OTP मांग रहे साइबर ठग
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