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News in Short
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराया।
- भारत पर 18% टैरिफ खत्म, 10% नया टैरिफ लागू होगा।
- ट्रंप ने नए टैरिफ को वैध बताते हुए राष्ट्रपति के अधिकार की बात की।
- कोर्ट के फैसले पर ट्रंप ने आपत्ति जताई, नई कार्रवाई का ऐलान किया।
- 10% टैरिफ 24 फरवरी से लागू होगा, व्यापार साझेदार देशों पर असर पड़ेगा।
News in Detail
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया। इस फैसले से भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ अवैध हो गया। ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए IEEPA कानून का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप को यह अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल संसद को है। कोर्ट के फैसले के 3 घंटे बाद ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए टैरिफ का ऐलान किया। उन्होंने 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया।
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ट्रंप ने फिर लगाया 10 प्रतिशत टैरिफ
ट्रंप ने 10% टैरिफ पर हस्ताक्षर किए। यह 24 फरवरी से लागू होगा। BBC के मुताबिक, ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय यूनियन पर यह टैरिफ लागू होगा। भारत पर टैरिफ 18% से घटकर 10% हो जाएगा। ट्रंप ने टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "मुझे शर्म आती है। वे देश के लिए कलंक हैं।" ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होने की बात कही। पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं।
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नया टैरिफ लगाएंगे ट्रंप
सेक्शन 122, ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है। यह अधिकार राष्ट्रपति को व्यापार घाटे या आर्थिक संकट के खतरे की स्थिति में आयात पर तुरंत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी रूप से टैरिफ लगा सकते हैं। यह टैरिफ आमतौर पर 150 दिनों तक लागू रहता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का निर्णय लेती है।
NBC न्यूज के अनुसार, 10% का ग्लोबल टैरिफ सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लागू होगा। इससे जिन देशों पर अधिक टैरिफ था, वह घट जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे बीफ, टमाटर, संतरा, महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह नया टैरिफ पुराने टैरिफ की जगह लेगा और अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेगा।
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ट्रंप को कोर्ट की फटकार
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को फटकारते हुए कहा कि अमेरिका हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि, तीन जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमत रहते हुए अपनी आपत्ति जताई।
कैवनॉ ने अपने नोट में कहा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन कानूनी तौर पर यह वैध थी। उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर आधारित थे।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों द्वारा नियुक्त किए गए हैं, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों द्वारा नियुक्त किए गए थे।
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क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ को लागू करने के लिए संसद की जरूरत नहीं है। उन्होंने राष्ट्रपति के अधिकारों के जरिए टैरिफ लगाने की बात की।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में रिफंड पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी कंपनी से वसूला गया टैरिफ वापस नहीं करेगी।
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को घटिया बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। उनका कहना है कि यदि टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश अमेरिका से आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कदम पहले के राष्ट्रपतियों को उठाना चाहिए था। वे देश को कमजोर होने देने के कारण दूसरे देशों को फायदा उठाने का मौका दे गए।
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