पब्लिक टॉयलेट की बदहाली पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: कहा- साफ टॉयलेट इस्तेमाल करना मौलिक अधिकार, छात्रों को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी
Arohi Raj | Oct 23, 2026, 20:45 IST
दिल्ली हाईकोर्ट ने गंदे टॉयलेट को लेकर नाराजगी जताई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों की खराब हालत पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। इसके अलावा कोर्ट ने साफ-सफाई और सुविधाओं की निगरानी के लिए नया तरीका सुझाया है। इसके तहत कॉलेज स्टूडेंट्स की टीमें सार्वजनिक शौचालयों का निरीक्षण करेंगी। टीमें तस्वीरों के साथ अपनी रिपोर्ट नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर को सौंपेंगी।
साफ पब्लिक टॉयलेट भी मौलिक अधिकार का हिस्सा
कोर्ट ने यह भी कहा कि पब्लिक टॉयलेट्स की उचित व्यवस्था करना सरकार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए सिर्फ शौचालय बनाना पर्याप्त नहीं है। उनकी नियमित सफाई और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम भी करना होगा।
टॉयलेट्स की खराब हालत पर कोर्ट ने जताई चिंता
इन समस्याओं का सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्य और लोगों की सुविधा पर पड़ता है। इसलिए टॉयलेट्स की नियमित निगरानी जरूरी है। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि संबंधित क्षेत्र की आबादी के हिसाब से सुविधाएं पर्याप्त हैं या नहीं।
कॉलेज के छात्र-छात्राएं करेंगे निरीक्षण
कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज, जामिया मिलिया इस्लामिया और अन्य संबंधित संस्थानों का उल्लेख किया। इनमें सॉल कॉलेज ऑफ आर्ट्स और आदिति महाविद्यालय भी शामिल हैं। इन संस्थानों के प्रशासन को निरीक्षण के लिए छात्र-छात्राओं की टीमें गठित करने को कहा गया है।
तस्वीरों के साथ नगर निगम को देनी होगी रिपोर्ट
इस व्यवस्था से टॉयलेट्स की समस्याओं को पहचानने में मदद मिल सकती है। साथ ही, अधिकारियों के लिए यह देखना आसान होगा कि कहां सुधार की जरूरत है। हालांकि, व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, यह इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
निरीक्षण के खर्च के लिए मिलेगा मानदेय
कोर्ट की टिप्पणी ने पब्लिक टॉयलेट्स की व्यवस्था को नागरिकों के जीवन के अधिकार से जोड़कर देखा है। अब निगरानी की इस व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
FAQs
- दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक टॉयलेट्स को मौलिक अधिकार का हिस्सा क्यों बताया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ-सुथरे सार्वजनिक टॉयलेट्स को नागरिकों के मौलिक अधिकार से जोड़ा है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए जीवन के अधिकार का हिस्सा है। - पब्लिक टॉयलेट्स की वर्तमान स्थिति पर कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने मौजूदा सार्वजनिक टॉयलेट्स की खराब स्थिति पर नाराजगी जताई और कहा कि इनके लिए नियमित सफाई और सुविधाओं का इंतजाम होना चाहिए। - पब्लिक टॉयलेट्स की निगरानी के लिए छात्रों की टीमें कैसे काम करेंगी?
हाईकोर्ट ने विद्यार्थियों से बनी निरीक्षण टीमों को टॉयलेट्स की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने और आवश्यक तस्वीरें लेकर रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपने के लिए कहा है।
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